पिछले साल यानी 2025 के अंत तक देश के सात प्रमुख शहरों में बिना बिके घरों की तादाद करीब 4 फीसदी बढ़ गई। अनारॉक नाम की रियल एस्टेट कंसल्टिंग कंपनी के आंकड़ों के मुताबिक, ये घर अब लगभग 5 लाख 77 हजार के करीब पहुंच गए हैं। 2024 के अंत में ये संख्या 5 लाख 53 हजार के आसपास थी। मतलब, एक साल में 23 हजार से अधिक घर और अनसोल्ड रह गए।
इसकी बड़ी वजह ये बताई जा रही है कि नए घरों की सप्लाई डिमांड से ज्यादा हो गई। लोग घर खरीदने में थोड़ा पीछे हट गए, जबकि डेवलपर्स ने नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च करने की रफ्तार नहीं रोकी। नतीजा ये हुआ कि स्टॉक बढ़ता चला गया।
हर शहर की कहानी अलग है। मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) और हैदराबाद में तो अनसोल्ड घरों की संख्या थोड़ी कम हुई, लेकिन बाकी शहरों में बढ़ोतरी हुई।
दिल्ली-NCR में अनसोल्ड स्टॉक 5 फीसदी बढ़कर 90,455 यूनिट्स हो गया, जो पहले 85,901 था। बेंगलुरु में सबसे ज्यादा उछाल आया जो पूरे 23 फीसदी था। वहां अब 64,863 घर बिना बिके पड़े हैं, जबकि एक साल पहले ये आंकड़ा 52,807 था।
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पुणे में 3 फीसदी का इजाफा हुआ और संख्या 83,491 पहुंच गई। चेन्नई में 18 फीसदी की बढ़त के साथ 33,434 घर अनसोल्ड हैं। कोलकाता में भी 9 फीसदी बढ़कर 29,007 यूनिट्स हो गए।
दूसरी तरफ, मुंबई में सिर्फ 1 फीसदी की मामूली गिरावट आई और स्टॉक 1 लाख 79 हजार 228 पर आ गया। हैदराबाद में 2 फीसदी कम होकर 96,140 घर बचे।
पूरा साल देखें तो सातों शहरों में घरों की बिक्री 14 फीसदी गिर गई। 2025 में सिर्फ 3 लाख 95 हजार 625 घर बिके। वहीं, नए घरों की लॉन्चिंग 2 फीसदी बढ़ी और कुल 4 लाख 19 हजार 170 यूनिट्स बाजार में आईं। यानी जितने घर बिके, उससे ज्यादा नए घर आए, इसलिए अनसोल्ड स्टॉक बढ़ना स्वाभाविक था।
अनारॉक का कहना है कि डिमांड थोड़ी सुस्त पड़ी और नई सप्लाई बढ़ी, इसी वजह से ये हालात बने। कंपनी को उम्मीद है कि अगर होम लोन पर ब्याज दरें कम होती हैं और घरों के दाम काबू में रहते हैं, तो आगे खरीदारों की संख्या बढ़ सकती है।