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Zomato हर महीने 5,000 गिग वर्कर्स को नौकरी से निकालता है, 2 लाख लोग खुद छोड़ते हैं काम: गोयल

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कंपनी के फाउंडर और CEO दीपिंदर गोयल ने बताया है कि हर महीने करीब 5,000 गिग वर्कर्स को धोखाधड़ी (फ्रॉड) के मामलों में प्लेटफॉर्म से हटाया जाता है

Last Updated- January 04, 2026 | 7:28 PM IST
Deepinder Goyal
प्रफूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो (Zomato) के फाउंडर और CEO दीपिंदर गोयल | फाइल फोटो

फूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो (Zomato) से जुड़े गिग वर्कर्स को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है। कंपनी के फाउंडर और CEO दीपिंदर गोयल ने बताया है कि हर महीने करीब 5,000 गिग वर्कर्स को धोखाधड़ी (फ्रॉड) के मामलों में प्लेटफॉर्म से हटाया जाता है। वहीं, इससे कहीं ज्यादा संख्या में गिग वर्कर्स खुद ही काम छोड़ देते हैं।

यह बातें गोयल ने यूट्यूबर राज शमानी के साथ एक वीडियो पॉडकास्ट में कही हैं। गोयल के मुताबिक, जोमैटो प्लेटफॉर्म पर कुल करीब 7.5 लाख गिग वर्कर्स जुड़े हुए हैं। इनमें से हर महीने 1.5 से 2 लाख लोग अपनी मर्जी से काम छोड़ देते हैं। इसी तरह लगभग उतने ही नए लोग हर महीने प्लेटफॉर्म पर जोड़े भी जाते हैं। गोयल का कहना है कि ज्यादातर लोग गिग वर्क को स्थायी नौकरी की तरह नहीं, बल्कि अस्थायी काम के रूप में देखते हैं।

Also Read: Zomato CEO ने गिग वर्क मॉडल का बचाव किया, कहा: 10.9% बढ़ी कमाई

गिग वर्कर्स के विरोध और कंपनी का पक्ष

गोयल का यह बयान ऐसे समय आया है, जब जोमैटो समेत कई क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी कंपनियों को गिग वर्कर्स यूनियनों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। यूनियनों का आरोप है कि गिग वर्कर्स को ठीक काम करने की परिस्थितियां नहीं मिलतीं, सामाजिक सुरक्षा का अभाव है और मेहनत के मुकाबले कम भुगतान होता है।

इन आरोपों पर गोयल ने कहा कि कंपनी गिग वर्कर्स के लिए बीमा सुविधा देती है। अगर किसी डिलीवरी पार्टनर की दुर्घटना में मौत हो जाती है, तो उसके परिवार को बीमा का लाभ मिलता है और कुछ मामलों में परिवार के सदस्यों को नौकरी का ऑफर भी दिया जाता है। गोयल ने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति हफ्ते में छह दिन, रोजाना आठ से दस घंटे काम करता है, तो वह आसानी से 25,000 रुपये से ज्यादा कमा सकता है।

गोयल ने यह भी माना कि धोखाधड़ी सिर्फ गिग वर्कर्स की तरफ से ही नहीं होती, बल्कि कई बार ग्राहक भी गलत तरीके अपनाते हैं। ऐसे मामलों से निपटने के लिए कंपनी ने ‘कर्मा’ नाम का एक इंटरनल सिस्टम बनाया है। इस सिस्टम के जरिए ग्राहक और डिलीवरी पार्टनर दोनों की रेटिंग की जाती है। जब कोई शिकायत आती है, तो दोनों पक्षों की विश्वसनीयता देखकर फैसला लिया जाता है। गोयल के अनुसार, कई मामलों में कंपनी खुद 50 से 70 फीसदी तक नुकसान उठाती है।

पॉडकास्ट में गोयल ने फंडिंग को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि कंपनी ने कभी निवेशकों से भविष्य की कमाई को लेकर अनुमान नहीं दिए, बल्कि सिर्फ बाजार के आकार और उसमें मौजूद अवसरों पर ही चर्चा की।

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First Published - January 4, 2026 | 6:58 PM IST

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