facebookmetapixel
ऑटो सेक्टर की कमाई रफ्तार पकड़ेगी, तीसरी तिमाही में बिक्री और मुनाफे में बड़ी छलांग के आसारक्विक कॉमर्स की रफ्तार पर सवाल: डिलिवरी कितनी तेज होनी चाहिए?Editorial: सुप्रीम कोर्ट का फैसला और कर अनिश्चितता — विदेशी निवेश के लिए नया खतरापाकिस्तान से ‘आजादी’ हासिल करने का वक्त: हर मोर्चे पर भारत से बढ़ता फासलाअगले हफ्ते बाजार का इम्तिहान: बैंकिंग, IT से लेकर अदाणी ग्रुप की कंपनियों के रिजल्ट्स तय करेंगे चालDARPG डेटा में खुलासा: 2025 में श्रम मंत्रालय को मिलीं शिकायतें, कुल ग्रीवांस में 15.5% हिस्सेदारी‘हम ब्लैकमेल नहीं होने वाले’, टैरिफ पर EU और ब्रिटेन का ट्रंप को जवाब: यह फैसला रिश्तों में दरार डालेगाQ3 Preview: घरेलू बिक्री बढ़ी, दवा कंपनियों की Q3 आमदनी में 8-11% तक उछालUPI को ग्लोबल बनाने की जरूरत, छोटे मर्चेंट्स के लिए सेटलमेंट को सही करना जरूरी: Pay10 के फाउंडरवर्कप्लेस पर तेजी से बढ़ रहा है AI का इस्तेमाल, लेकिन ट्रेनिंग में पीछे छूट रही हैं कंपनियां: रिपोर्ट

NSO ने जीडीपी ग्रोथ का अपना पहला अग्रिम अनुमान जारी किया, वृद्धि दर 7.4 फीसदी रहने की आस

चालू वित्त वर्ष में नॉमिनल और वास्तविक जीडीपी वृद्धि के बीच अंतर 60 आधार अंक रह गया है जो वित्त वर्ष 2011-12 के बाद सबसे कम है

Last Updated- January 07, 2026 | 10:27 PM IST
GDP

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने आज जारी अपने पहले अग्रिम अनुमान में देश की अर्थव्यवस्था के वित्त वर्ष 2026 में 7.4 फीसदी की दर से बढ़ने की उम्मीद जताई है। वित्त वर्ष 2025 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.5 फीसदी रही थी। यह लगातार बाह्य बाधाओं के बावजूद अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ता की ओर इशारा करता है।

हालांकि वृद्धि के दृष्टिकोण को जीडीपी डिफ्लेटर से मदद मिली है, जो 5 दशक के निचले स्तर 0.5 फीसदी पर है। इसी तरह वित्त वर्ष 2026 के लिए नॉमिनल जीडीपी में 8 फीसदी वृद्धि होने का अनुमान लगाया गया है जो कोविड महामारी से प्रभावित वित्त वर्ष 2021 के बाद सबसे धीमी वृद्धि है। चालू वित्त वर्ष में नॉमिनल और वास्तविक जीडीपी वृद्धि के बीच अंतर 60 आधार अंक रह गया है जो वित्त वर्ष 2011-12 के बाद सबसे कम है।

वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.4 फीसदी रहने का मतलब है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही (अक्टूबर-मार्च) में वृद्धि दर घटकर 6.9 फीसदी रहेगी जबकि पहली छमाही में यह 8 फीसदी थी।

पहले अग्रिम अनुमान में दिसंबर के लिए चुनिंदा प्रमुख संकेतकों के साथ-साथ अक्टूबर और नवंबर के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े को शामिल किया गया है। फरवरी से लागू होने वाले 2022-23 आधार वर्ष के साथ इन अनुमानों में संशोधन हो सकता है।

वित्त वर्ष 2026 में सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) 7.3 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है जिसका मतलब है कि शुद्ध अप्रत्यक्ष करों का मामूली सकारात्मक योगदान है। 8 फीसदी नॉमिनल जीडीपी वृद्धि वित्त वर्ष 2026 के लिए 10.1 फीसदी के बजट अनुमान से काफी कम है।

हालांकि राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.4 फीसदी पर समिति करने में सरकार को ज्यादा मुश्किल नहीं आएगी। मुद्रास्फीति में नरमी को देखते हुए चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में नॉमिनल जीडीपी वृद्धि 7.3 फीसदी रहने का अनुमान है जो पहली छमाही में 8.8 फीसदी बढ़ी थी।

एचडीएफसी बैंक की प्रधान अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता ने कहा कि वह आंकड़ों से कोई ठोस नतीजे निकालने से पहले 27 फरवरी को नई जीडीपी श्रृंखला जारी होने का इंतजार करेंगी। उन्होंने कहा, ‘अभी के लिए ये अनुमान महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि वे आगामी बजट अनुमान का आधार बनते हैं। नॉमिनल जीडीपी वृद्धि में कमी के साथ-साथ आयकर में कटौती और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में कटौती ने कर संग्रह को प्रभावित किया है और हमें राजस्व प्राप्तियों में लगभग 1.5 लाख करोड़ से 2 लाख करोड़ रुपये की कमी का अनुमान है। हालांकि खर्च में कुछ कमी आ सकती है और भारतीय रिजर्व बैंक से लाभांश मिल सकता है ताकि केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2026 के लिए राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.4 फीसदी तक सीमित रखने में मदद मिल सके।’

क्षेत्रवार वृद्धि के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि सांख्यिकी मंत्रालय ने पहली की तुलना में दूसरी छमाही में व्यापक मंदी मान ली है। कृषि क्षेत्र में पहली छमाही में 3.6 फीसदी की वृद्धि हुई जबकि वित्त वर्ष 2026 के लिए वृद्धि का अनुमान 3.1 फीसदी है।

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में विनिर्माण क्षेत्र 8.4 फीसदी से बढ़ा था मगर पूरे वित्त वर्ष में इसमें 7 फीसदी वृद्धि का अनुमान है। इसी तरह श्रम-गहन निर्माण क्षेत्र में पहली छमाही के दौरान 7.4 फीसदी की वृद्धि हुई और पूरे वित्त वर्ष के लिए 7 फीसदी वृद्धि का अनुमान है। सेवा क्षेत्र में पूरे वित्त वर्ष के दौरान 9.1 फीसदी वृद्धि का अनुमान है जो पहली छमाही में 9.3 फीसदी बढ़ा था। निवेश मांग को दर्शाने वाला सकल ​स्थिर पूंजी निर्माण के वित्त वर्ष 2026 में 7.8 फीसदी की दर से बढ़ने की उम्मीद है, जिसे सार्वजनिक क्षेत्र के पूंजीगत व्यय से सहारा मिलेगा। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में यह 7.6 फीसदी बढ़ा था।

निजी अंतिम उपभोग व्यय के वित्त वर्ष 2026 में 7 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है जो पहली छमाही के 7.5 फीसदी से धीमा है। सरकारी अंतिम उपभोग व्यय 5.2 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान है जो चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के 2.5 फीसदी से काफी अधिक है। यह राज्य सरकारों द्वारा खर्च में वृद्धि की उम्मीद को दर्शाता है। वित्त वर्ष 2026 में निर्यात के 6.4 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है जो वित्त वर्ष 2025 में 6.3 फीसदी बढ़ा था। इसमें मजबूत सेवा निर्यात और स्थिर वस्तु निर्यात से शुल्क संबंधित अनिश्चितताओं के प्रभाव को कम करने की उम्मीद है।

क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि अगले वित्त वर्ष में नॉमिनल और वास्तविक जीडीपी वृद्धि की दिशा अलग होने की संभावना है, जिसमें नॉमिनल जीडीपी वृद्धि अपने दीर्घकालिक औसत 10.5-11 फीसदी की ओर बढ़ने की उम्मीद है और वास्तविक जीडीपी वृद्धि कम होकर लगभग 6.7 फीसदी रह सकती है। इंडिया रेटिंग्स के एसोसिएट निदेशक पारस जसराय ने कहा कि उन्हें वित्त वर्ष 2027 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.9 फीसदी रहने की उम्मीद है।

First Published - January 7, 2026 | 10:18 PM IST

संबंधित पोस्ट