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Motor accident claim: सड़क हादसा हुआ? मुआवजा गंवा सकते हैं सिर्फ 1 छोटी गलती की वजह से!

सड़क हादसे में मुआवजे के लिए तुरंत FIR दर्ज करना और सभी जरूरी दस्तावेज़ रखना बेहद जरूरी है, वरना दावा खारिज हो सकता है।

Last Updated- November 29, 2025 | 12:10 PM IST
Motor insurance
Representative image

हाल ही में कर्नाटक हाईकोर्ट के एक फैसले ने सड़क दुर्घटना मुआवजा मामले में एक महत्वपूर्ण बात सामने रखी है। अदालत ने कहा कि मामूली देरी, दस्तावेजों की कमी या सबूतों में खामियां भी पीड़ित के हक के मुआवजे को खोवा सकती हैं। इस मामले में, शिकायत दर्ज कराने में 24 दिन की देरी और आरोपी वाहन के शामिल होने को साबित न कर पाने के कारण मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) ने दावे को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने भी इस फैसले को सही ठहराया।

MACT कैसे काम करता है

MACT, मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 की धारा 165 के तहत स्थापित है। यह मृत्यु, चोट या तीसरे पक्ष की संपत्ति को हुए नुकसान के मामलों में मुआवजा देने का काम करता है।

कानूनी विशेषज्ञ मनीत कौर के अनुसार, “यह सामान्य सिविल कोर्ट की तरह लंबी प्रक्रिया नहीं अपनाता। आवेदन मिलने के बाद, ट्रिब्यूनल धारा 168 के तहत जांच करता है और संक्षिप्त प्रक्रिया के तहत फैसला सुनाता है।”

MACT में दावा कैसे दर्ज करें

दावा करने के लिए आवेदन में दुर्घटना का पूरा विवरण, चोट या नुकसान और मुआवजे की मांग लिखना जरूरी है। इसे पीड़ित, मृतक के कानूनी प्रतिनिधि, नुकसान उठाने वाले संपत्ति के मालिक या अधिकृत प्रतिनिधि द्वारा दाखिल किया जा सकता है।

दावा उस MACT में दाखिल किया जा सकता है, जहां दावेदार या आरोपी का निवास या व्यवसाय है। दावे की समय सीमा आम तौर पर दुर्घटना के 6 महीने के भीतर होती है। विशेषज्ञ मनीत कौर कहती हैं कि यह सीमा सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के तहत है, इसलिए कोर्ट इस आधार पर दावे को अभी खारिज नहीं कर सकती।

मुआवजा कैसे तय होता है

ट्रिब्यूनल दुर्घटना के पीड़ित पर असर को ध्यान में रखकर मुआवजा तय करता है। इसमें उम्र, आय और कमाई की क्षमता का भी मूल्यांकन किया जाता है। भविष्य की आय के नुकसान का आकलन करने के लिए “मल्टीप्लायर मेथड” का इस्तेमाल किया जाता है।

इसके अलावा, मेडिकल सर्टिफिकेट, अस्पताल के बिल, लंबी अवधि के इलाज की जरूरत और मृतक के मामले में आश्रितों की संख्या व उनकी निर्भरता को भी देखा जाता है। दर्द, तकलीफ और साथ न होने जैसी गैर-आर्थिक क्षतियों का मुआवजे में ध्यान रखा जाता है।

अगर पीड़ित खुद कुछ हद तक दुर्घटना में दोषी है, तो मुआवजा उसकी गलती के अनुपात में घट सकता है।

मजबूत दावा कैसे करें

पीड़ित को तुरंत FIR दर्ज करानी चाहिए। दुर्घटना स्थल से सबूत जुटाएं, तुरंत इलाज कराएं, अस्पताल और बिल का रिकॉर्ड रखें और मेडिकल-लीगल केस (MLC) दर्ज कराएं।

विशेषज्ञ शंके अग्रवाल कहते हैं कि देरी, दस्तावेज़ों की कमी या सबूतों में अंतराल से मामला कमजोर हो सकता है और दावा खारिज हो सकता है, जैसा कि कर्नाटक हाईकोर्ट के मामले में हुआ।

अक्सर दावे क्यों खारिज होते हैं

  • FIR में देरी या स्पष्टीकरण न होना

  • आरोपी वाहन की भूमिका साबित न होना

  • मेडिकल सबूतों की कमी

  • अत्यधिक या झूठा दावा

  • प्रक्रियात्मक नियमों का पालन न करना

गलतियों से बचें

  • FIR में देरी न करें

  • सिर्फ मौखिक बयान पर भरोसा न करें

  • मेडिकल डॉक्यूमेंटेशन पूरा रखें

  • आय या चोट को बढ़ा-चढ़ा कर न बताएं

  • सुनवाई में शामिल हों और नोटिस का समय पर जवाब दें

सही समय पर कार्रवाई और सही दस्तावेज़ रखने से ही सड़क हादसे के मुआवजे का दावा सफल हो सकता है।

First Published - November 29, 2025 | 12:10 PM IST

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