facebookmetapixel
Advertisement
Credit Card Tips: क्या सच में फ्री होती है No Cost EMI? शर्तें पढ़े बिना न करें खरीदारीअब विदेशों में छाएगी यूपी की व्हिस्की, योगी सरकार की नई एक्सपोर्ट नीति से खुलेंगे दरवाजेदिसंबर संकट के बाद इंडिगो की बड़ी उड़ान, 1000 से ज्यादा पायलटों की भर्ती का ऐलानरेरा पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, रियल एस्टेट सेक्टर में बढ़ेगी जवाबदेहीनिफ्टी में आईटी सेक्टर की पकड़ कमजोर, 26 साल के निचले स्तर पर पहुंचा वेटेजQ3 में मजबूत प्रदर्शन के बाद इंफोसिस ने कर्मचारियों को औसतन 85% बोनस देने का ऐलान कियाFY26 में शहरी भारत देगा GDP का 70% योगदान, डन एंड ब्रैडस्ट्रीट की रिपोर्ट में बड़ा अनुमानBest FD Rates: एफडी में 8.95% तक ब्याज, फरवरी 2026 में कहां मिल रहा सबसे ज्यादा रिटर्न?मिडकैप निवेशकों के लिए बड़ी खबर, BSE लॉन्च करेगा नया इंडेक्स डेरिवेटिववैलेंटाइन डे से पहले ई-कॉमर्स बिक्री 60% तक बढ़ी, फूल-चॉकलेट की मांग में उछाल

MF AUM 100 ट्रिलियन होने का भरोसा, छोटे शहरों और SIP से बढ़ रहा निवेश

Advertisement

BFSI इनसाइट समिट में विशेषज्ञों का भरोसा: शेयर बाजार की स्थिरता के बीच निवेशकों की रुचि बनी रहेगी, म्युचुअल फंड उद्योग में बड़ी वृद्धि की संभावना

Last Updated- November 07, 2024 | 10:23 PM IST
BFSI Summit

घरेलू निवेश के पैटर्न में हुए ढांचागत बदलाव के दम पर हाल के वर्षों में म्युचुअल फंड उद्योग की रफ्तार खासी मजबूत रही है और अगर शेयर बाजार मंदी के दौर में पहुंच जाए तब भी इसमें बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है। म्युचुअल फंड उद्योग के दिग्गजों का ऐसा मानना है। बिज़नेस स्टैंडर्ड बीएफएसआई इनसाइट समिट में गुरुवार को भारत की प्रमुख म्युचुअल फंड कंपनियों के अधिकारियों ने भरोसा जताया कि अगले 2 से 3 साल में म्युचुअल फंड उद्योग की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां (एयूएम) 100 लाख लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। अभी एयूएम करीब 67 लाख करोड़ रुपये है।

देश के सबसे बड़े म्युचुअल फंड एसबीआई म्युचुअल फंड के उप- प्रबंध निदेशक डीपी सिंह ने कहा कि एयूएम के 100 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचने के लिए उसे सिर्फ 50 फीसदी और जोड़ना होगा। मुझे नहीं लगता कि इसमें 3-4 साल से ज्यादा लगेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि एयूएम में वृद्धि की आंशिक वजह बाजारों में आई तेजी है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में एयूएम में वृद्धि में खासी हिस्सेदारी मार्क टु मार्केट लाभ की रही है।

एचडीएफसी म्युचुअल फंड के प्रबंध निदेशक और सीईओ नवनीत मुनोत ने कहा कि एयूएम के आंकड़ों पर सबसे ज्यादा चर्चा होती है। लेकिन हमें छोटे शहरों से भी मिल रहे निवेश और एसआईपी के जरिये बढ़ रहे निवेश को देखकर बहुत खुशी हो रही है। उन्होंने इसे अपनी सबसे बड़ी संतोषजनक उपलब्धियों में से एक बताया। उन्होंने कहा, पिछले 20 साल में वृद्धि की इस रफ्तार से मुझे यह मानने की कोई वजह नहीं दिखती कि अगले 20 साल इससे बेहतर होंगे।

आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्युचुअल फंड के प्रबंध निदेशक और सीईओ ए. बालासुब्रमण्यम ने कहा कि उद्योग ने अनुमान से ज्यादा उच्च वृद्धि हासिल करने में कामयाबी पाई है। 100 लाख करोड़ रुपये के एयूएम का लक्ष्य जल्द हासिल हो जाएगा। सवाल यह है कि कितने नए निवेशक और आएंगे। वित्तीय सेवा क्षेत्र में म्युचुअल फंड उद्योग सबसे तेज वृद्धि वाला उद्योग बना रहेगा क्योंकि उसने पिछले 10-15 साल में निवेशकों को सबसे अच्छे अनुभव की पेशकश कर खुद को स्थापित किया है।

उद्योग के दिग्गज का अनुमान है कि फंडों का एयूएम अगले 3-4 वर्षों में बैंक जमाओं का करीब 50 फीसदी होगा। एडलवाइस म्युचुअल फंड की प्रबंध निदेशक और सीईओ राधिका गुप्ता म्युचुअल फंड उद्योग की वृद्धि को लेकर आशावादी हैं और भविष्य में 100 लाख करोड़ रुपये से कहीं अधिक बढ़ने का अनुमान लगाती हैं।

उन्होंने कहा, आइए 100 लाख करोड़ रुपये के 10 गुना तक की बात करें। 100 लाख करोड़ रुपये तो अगले 2-3 साल में हो जाएगा। भारत में एसआईपी का चलन बढ़ रहा है। उन्होंने इसे एक नई पीढ़ी की आर्थिक आदतों का प्रतीक बताते हुए कहा कि आजकल 30 साल से कम उम्र के लोग अपनी पहली सैलरी से ही एसआईपी या शेयर बाजार में कुछ न कुछ निवेश कर रहे हैं।

उन्होंने म्युचुअल फंड उद्योग में बढ़ती विविधता का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि अभी 45 म्युचुअल फंड हैं, 20 और लाइसेंस का इंतज़ार कर रहे हैं, जिनमें से ज्यादातर बैंक-समर्थित नहीं हैं। गुप्ता ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि वितरण सिर्फ बैंक-समर्थित ही है। यह अलग-अलग समूहों में भी होता है।

उनके अनुसार अगर फंड हाउस के पास गुणवत्तापूर्ण योजनाएं हैं और उसकी मजबूत डिजिटल मौजूदगी है, तो वह बैंक के सपोर्ट के बिना भी आगे बढ़ सकता है क्योंकि खरीद का अधिकार खुद उपभोक्ता के हाथ में है। मुनोत ने खुदरा निवेशकों की अहमियत को रेखांकित करते हुए उन्हें असली हीरो कहा। उन्होंने यह भी बताया कि अब खुदरा निवेशकों के पास प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां (एयूएम) संस्थागत निवेशकों से भी ज्यादा हो गई हैं।

देशी और विदेशी निवेशकों की ज़रूरत को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि घरेलू बचत का इक्विटी में हिस्सा अभी भी बहुत छोटा है। मुनोत ने बताया कि स्थानीय निवेशकों में पूरी हिम्मत है क्योंकि व्यवस्थित निवेश योजना (एसआईपी) में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है जिससे अगले तीन से चार सालों में स्थिर और बढ़ते फंड प्रवाह पर उनका भरोसा और मजबूत हुआ है।

छोटे और मिड-कैप फंडों में निवेश प्रवाह पर बात करते हुए कोटक म्युचुअल फंड के प्रबंध निदेशक नीलेश शाह ने कहा कि हम लोगों को लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करने की सलाह दे रहे हैं। दूसरा, हम लोगों को रिटर्न की अपेक्षा थोड़ी कम रखने की बात कह रहे हैं। इन दो बातों के साथ मुझे लगता है कि छोटे और मिड-कैप फंड सही हैं।

Advertisement
First Published - November 7, 2024 | 10:23 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement