facebookmetapixel
Advertisement
Yellow peas import: आयात शुल्क के डंडे से सुस्त पड़ा पीली मटर का आयातक्या आप भी ले रहे हैं SWP से मंथली इनकम? जान लीजिए टैक्स का ये गणित वरना कट जाएगी आपकी जेबपेट्रोल-डीजल महंगा हुआ तो बाजार में बढ़ेगी टेंशन? इन 5 सेक्टर और स्टॉक्स पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असरMulti-Asset FoF: निवेश करें या नहीं? एक्टिव vs पैसिव में कहां है ज्यादा फायदा, कितना है रिस्कआम आदमी पार्टी में बड़ी बगावत: राघव चड्ढा समेत तीन राज्यसभा सांसद अब थामेंगे भाजपा का हाथअटल पेंशन योजना का नया रिकॉर्ड: 9 करोड़ से ज्यादा लोग जुड़े, जानिए आपके लिए क्यों है जरूरीसात समंदर पार रहकर भी अपनों का रखें ख्याल! NRIs के लिए भारतीय टर्म इंश्योरेंस क्यों है सबसे बेस्ट?अब खेती से डॉलर कमाएंगे किसान? जानें Amazon की नई डील क्या हैगिरावट में मौका? ₹225 का लेवल टच करेगा PSU Bank Stock! Q4 नतीजों के बाद ब्रोकरेज ने दी BUY रेटिंगअब बम नहीं, जिद का खेल; ईरान-अमेरिका युद्ध का नया चेहरा सामने

निर्यात से पहले कफ सिरप की जांच पर विचार कर रही सरकार

Advertisement
Last Updated- May 16, 2023 | 10:58 PM IST
All brands of cough medicine will be discontinued, the reason is Pholcodine

भारत से निर्यात किए जाने वाले कफ सिरप में मिलावट की घटनाओं को देखते हुए सरकार खांसी की दवाई के निर्यात से पहले परीक्षण करने की व्यवस्था बनाने पर विचार कर रही है। सरकार की कवायद है कि दवा की पहले ही जांच कर ली जाए, जिससे निर्यात के बाद इसमें कोई शिकायत न आने पाए।

सूचना के मुताबिक केंद्रीय औषिध मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के पास इस तरह का प्रस्ताव भेजा है। इसके पीछे विचार यह है कि निर्यात के पहले सरकारी प्रयोगशालाओं में दवाओं की जांच हो। सूत्रों ने कहा कि इस सिलसिले में अब तक कोई फैसला नहीं हुआ है।

CDSCO के अधीन 5 केंद्रीय औषधि परीक्षण प्रयोगशालाएं कसौली, कोलकाता, हैदराबाद, चेन्नई और मुंबई में स्थित हैं। वहीं गुवाहाटी और चंडीगढ़ में 2 क्षेत्रीय औषधि परीक्षण प्रयोगशालाएं हैं। इसके अलावा भारत इंडियन फार्माकोपिया कमीशन लैबोरेटरी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। उद्योग के सूत्रों ने दावा किया कि एनएबीएल से संबद्ध प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट को भी विनिर्माताओं और निर्यातकों द्वारा सर्टिफिकेट आफ एनालिसिस (सीओए) माना जा सकता है। जनवरी 2022 तक के आंकड़ों के मुताबिक एनएबीएल से मान्यता प्राप्त 2,300 से ज्यादा मेडिकल टेस्टिंग लैब भारत में स्थित हैं।

औषधि उद्योग से जुड़े एक दिग्गज ने कहा कि सरकार सभी सिरप और सॉल्वेंट विनिर्माताओं के लिए ग्लाइकोल का परीक्षण अनिवार्य किए जाने पर विचार कर सकती है। एक व्यक्ति ने नाम न छापे जाने की शर्त पर कहा, ‘अब तक इंडियन फार्माकोपिया को अनिवार्य ग्लाइकॉल टेस्टिंग सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होती है। विनिर्माण इकाई द्वारा सीओए उपलब्ध कराया जाता है। अगर अन्य अनिवार्य परीक्षणों में ग्लाइकॉल के परीक्षण को अनिवार्य कर दिया जाए तो मिलावट की मूल समस्या खत्म हो जाएगी।’

इस समय फार्मास्यूटिकल उत्पादों के विनिर्माता राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन से किसी खास उत्पाद को बनाने के लिए सर्टिफिकेट आफ फार्मास्यूटिकल प्रोडक्ट (सीओपीपी) लेते हैं। सीओपीपी जांच के बाद दिया जाता है और अपेक्षा की जाती है कि विनिर्माता अपनी खेप के साथ सीओए प्रस्तुत करेंगे, चाहे वह घरेलू बाजार में खपत के लिए हो या निर्यात के लिए हो।

उद्योग के एक और सूत्र ने कहा कि भारत इस समय 200 देशों को निर्यात करता है और निर्यात के लिए भेजने के पहले भौतिक रूप से हर बैच के कफ सिरप का परीक्षण करना असंभव होगा।

Also read: चीन पर इलेक्ट्रॉनिक बैन का फायदा नहीं उठा पाया भारत, एक्सपोर्ट में पिछड़ा

व्यक्ति ने कहा, ‘नाइजीरिया जैसे देशों का उन देशों में टेस्टिंग लैब है, जहां से दवा भेजी जाती है। वहीं यूरोप के देशों में दवा के प्रवेश बिंदु पर ही परीक्षण होता है। वहीं अमेरिका बंदरगाह पर दवा पहुंचने के बाद किसी खेप से नमूने लेकर परीक्षण कर लेता है। भारत सरकार की एजेंसी अब तक निर्यात किए जाने वाले माल के परीक्षण का काम नहीं करती है। इस में बहुत ज्यादा समय लग सकता है, अगर परीक्षण केवल सरकारी प्रयोगशालाओं में किया गया।’

यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब गांबिया, उज्बेकिस्तान सहित कुछ देशों में भारत के कफ सिरप और यहां तक कि आई ड्रॉप की शिकायतें हो रही हैं। उद्योग का कहना है कि इन घटनाओं से भारत की निर्यातक के रूप में वैश्विक छवि खराब हुई है। उन्होंने कहा कि इसे देखते हुए केंद्र सरकार कुछ कदम उठाने पर विचार कर रही है, जिससे खराब गुणवत्ता की दवाओं को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में जाने से रोका जा सके।

Also read: Jet Airways के दिवालिया होने से Go First को क्या सबक लेने की जरूरत

उत्तर प्रदेश औषधि नियंत्रक ने मैरियन बायोटेक का विनिर्माण लाइसेंस रद्द कर दिया, जिसके कफ सिरप डॉक-1 को उज्बेकिस्तान में 18 बच्चों की मौत से जोड़ा गया था। फार्मास्यूटिकल एक्सपोर्ट्स प्रमोशन काउंसिल (फार्मेक्सिल) ने मैरियन बायोटेक की सदस्यता निलंबित कर दी है, जिससे वह मार्केट एक्सेस इनीशिएटिव स्कीम के तहत प्रोत्साहन के लिए अपात्र हो गई है।

Advertisement
First Published - May 16, 2023 | 10:58 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement