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Electoral Bonds: चुनावी बॉन्ड पर SBI को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, चीफ जस्टिस ने कहा- करना ही होगा बॉन्ड नंबर का खुलासा

CJI की पीठ ने चुनाव आयोग के आवेदन को निपटाते हुए रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि आयोग द्वारा प्रस्तुत डेटा को 16 मार्च की शाम0 5 बजे तक स्कैन करके डिजिटलीकृत किया जाए।

Last Updated- March 15, 2024 | 9:37 PM IST
SBI ने सुप्रीम कोर्ट में दायर किया हलफनामा, कहा चुनाव आयोग को सौंप दी सभी जानकारी, Electoral Bonds: SBI filed an affidavit in the Supreme Court, said that it has submitted all the information to the Election Commission

सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को चुनावी बॉन्ड की खरीद और उन्हें भुनाए जाने के ब्योरों के अलावा उनकी बॉन्ड संख्या का भी खुलासा करना होगा। इसके लिए बैंक को नोटिस भी जारी किया गया है। मामले पर सोमवार को दोबारा सुनवाई होने की संभावना है।

देश के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने सुनवाई के दौरान पूछा, ‘भारतीय स्टेट बैंक की ओर से कौन पेश हो रहा है? उन्होंने बॉन्ड संख्या का खुलासा नहीं किया है। भारतीय स्टेट बैंक को इसका खुलासा करना ही होगा।’

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ‘मैं भारतीय स्टेट बैंक की ओर से पेश नहीं हुआ हूं। परंतु माननीय न्यायाधीश महोदय एसबीआई को नोटिस जारी कर सकते हैं क्योंकि शायद उन्हें कुछ कहना हो। मुझे लगता है कि उन्हें यहां होना चाहिए।’

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि न्यायालय के 11 मार्च के निर्णय में स्पष्ट कहा गया था कि सभी जरूरी ब्योरे पेश किए जाने चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘सच कहें तो एसबीआई ने जो खुलासा किया है हम उस पर आपत्ति जता सकते हैं।’

उन्होंने स्टेट बैंक के अधिवक्ता की गैर मौजूदगी पर भी आपत्ति जताई जिस पर सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि वे चुनाव आयोग के आवेदन में पक्ष नहीं थे। इसके पश्चात मुख्य न्यायाधीश ने एसबीआई को नोटिस जारी करके कहा कि वह विस्तृत ब्योरा जारी करे।

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बी आर गवई, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा दाखिल एक आवेदन की सुनवाई कर रहे थे जिसमें मांग की गई थी कि न्यायालय के अंतरिम आदेश का पालन करते हुए जो सील बंद दस्तावेज उसके समक्ष पेश किए गए थे उन्हें वापस लौटा दिया जाए। निर्वाचन आयोग ने अदालत से कहा कि गोपनीयता बरतने के नाते उसने इन दस्तावेजों की कोई प्रति नहीं रखी है। आयोग ने कहा कि अदालत के आदेश के अनुसार उन्हें सीलबंद लिफाफे चाहिए।

पीठ ने चुनाव आयोग के आवेदन को निपटाते हुए रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि वह सुनिश्चित करें कि आयोग द्वारा प्रस्तुत डेटा को शनिवार 16 मार्च की शाम 5 बजे तक स्कैन करके डिजिटलीकृत कर दिया जाए। एक बार यह काम पूरा होने के बाद मूल कॉपी को चुनाव आयोग को लौटाने का निर्देश दिया गया है और यह भी कहा गया है कि स्कैन करके डिजिटलीकृत की गई फाइलों की एक प्रति भी उन्हें सौंपी जाए। उसके बाद इस डेटा को चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।

स्टेट बैंक ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद 12 मार्च को चुनाव आयोग से डेटा साझा किया था। सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग को 15 मार्च की शाम पांच बजे तक सूचना अपनी वेबसाइट पर डालने को कहा था।

चुनाव आयोग ने दो हिस्सों में बॉन्ड की जानकारी अपनी वेबसाइट पर डाली है जिसमें एक हिस्सा बॉन्ड खरीदने वालों तथा दूसरा उन्हें भुनाने वाले राजनीतिक दलों से संबंधित है। यह जानकारी 12 अप्रैल, 2019 से 11 जनवरी, 2024 की अवधि में खरीदे गए बॉन्डों के बारे में है।

चुनाव आयोग ने गुरुवार को सर्वोच्च न्यायालय से आग्रह किया था कि उसके द्वारा न्यायालय के पास जमा कराए गए दस्तावेजों को सील बंद लिफाफे में लौटा दिया जाए।

न्यायालय ने सोमवार को चुनाव आयोग से कहा था कि वह उसके अंतरिम आदेश के मुताबिक दी गई सूचना की जानकारी अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित कर दे। गत वर्ष नवंबर में दिए गए इस अंतरिम आदेश के माध्यम से न्यायालय ने चुनाव आयोग से कहा था कि वह 30 सितंबर तक सभी राजनीतिक दलों को चुनावी बॉन्ड के रूप में मिले चंदे की जानकारी एक सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करे।

सोमवार को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा था, ‘भारतीय निर्वाचन आयोग ने हमारे समक्ष जो कुछ प्रस्तुत किया है, हम उसे खोलेंगे। चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश के अनुरूप जानकारी प्रस्तुत की है जिसे सुरक्षित रखा गया है। हम उसे अभी खोलने का आदेश देंगे।’

First Published - March 15, 2024 | 9:37 PM IST

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