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थोक महंगाई 34 माह बाद शून्य से भी कम, मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की कीमतों में आई सबसे ज्यादा कमी

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Last Updated- May 15, 2023 | 10:24 PM IST
Inflation

थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति अप्रैल में घटकर -0.92 फीसदी रह गई, जो 34 महीनों में इसका सबसे कम आंकड़ा है। मार्च में यह 1.34 फीसदी थी। अधिक आधार प्रभाव (यानी पहले मुद्रास्फीति बहुत अधिक होने के कारण) और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में लगातार गिरावट से मुद्रास्फीति थम गई। अप्रैल 2022 में मुद्रास्फीति 15.38 फीसदी थी और जून 2020 में यह -1.81 फीसदी थी।

वा​णि​ज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा आज जारी आंकड़ों से पता चलता है कि विनिर्मित उत्पादों की कीमतों (-2.42 फीसदी) में कमी ज्यादा रही, जो मार्च में -0.77 फीसदी था। पेय, तंबाकू, परिधान, चमड़ा, फार्मास्युटिकल्स और सीमेंट जैसे उत्पादों की कीमतों में गिरावट कुछ कम रही। दूसरी ओर रसायन (-3.29 फीसदी), कपड़ा (-5.76 फीसदी), विनिर्मित खाद्य उत्पाद (-5.65 फीसदी), वसा (-25.91 फीसदी), बुनियादी धातु (-9.8 फीसदी) और रबर उत्पाद (-2.51 फीसदी) की कीमतें पिछले साल अप्रैल के मुकाबले नीचे रह गईं।

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि पिछले साल मुद्रास्फीति का आंकड़ा बड़ा होने के कारण और दुनिया भर में जिंस के दाम गिरने के कारण थोक मुद्रास्फीति में नरमी बनी रह सकती है।

विनिर्मित खाद्य उत्पादों को छोड़कर खाद्य मुद्रास्फीति मार्च में 5.48 फीसदी से घटकर 3.54 फीसदी रह गई। अनाज (7.69 फीसदी), धान (7.12 फीसदी), गेहूं (7.27 फीसदी), दूध (7.10 फीसदी) और दलहन (5.55 फीसदी) सहित कई वस्तुओं के लिए मुद्रास्फीति में तेजी बरकरार रही। मगर अप्रैल में सब्जियों (-1.50 फीसदी), प्याज (-18.41 फीसदी), आलू (-18.66 फीसदी) और फलों (-4.55 फीसदी) की कीमतों में एक साल पहले के मुकाबले गिरावट दर्ज की गई।

सबनवीस ने कहा, ‘खाद्य मुद्रास्फीति पर नजर रखने की जरूरत है क्योंकि बाजार ​स्थितियों के कारण उसमें तेजी आ सकती है। साथ ही खरीफ फसलों में मुद्रास्फीति पर मॉनसून का असर भी दिखेगा। आगे यह चिंता का विषय हो सकता है।’ अप्रैल में ईंधन की मुद्रास्फीति में 0.93 फीसदी की गिरावट आई, जो मार्च में 8.96 फीसदी थी। इसकी मुख्य वजह पेट्रोल की कीमतों में 1.53 फीसदी और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में 1.42 फीसदी की गिरावट रही। अप्रैल में रसोई गैस की कीमतों में 10.49 फीसदी कमी दिखी।

थोक मुद्रास्फीति में गिरावट से पहले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में 4.7 फीसदी रही, जो 18 महीने का सबसे निचला स्तर था। लगातार दूसरे महीने मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक की सहजता के दायरे से नीचे रही है। पिछले महीने भारतीय रिजर्व बैंक की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने एकमत से नीतिगत रीपो दर को 6.5 फीसदी पर बनाए रखने का निर्णय लिया था। मगर उन्होंने यह मानने से इनकार किया था कि दरों में वृद्धि का चक्र अपने चरम पर पहुंच गया है।

आरबीआई अपनी मौद्रिक नीति से जुड़े निर्णय लेने के लिए खुदरा मुद्रास्फीति पर नजर रखता है। मगर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के साथ-साथ थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति में भी नरमी दिखने से आरबीआई के लिए नीतिगत दरें लंबे समय तक इसी स्तर पर बनाए रखना आसान हो सकता है।

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First Published - May 15, 2023 | 10:24 PM IST

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