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India Manufacturing: अक्टूबर में भारत के विनिर्माण क्षेत्र में सुधार, नए ऑर्डर और अंतरराष्ट्रीय बिक्री ने दी रफ्तार

एचएसबीसी का अंतिम भारत विनिर्माण पर्चेजिंग मैनेजर्स सूचकांक (पीएमआई) अक्टूबर में बढ़कर 57.5 हो गया जबकि यह सितंबर में आठ माह के निचले स्तर 56.5 पर था।

Last Updated- November 04, 2024 | 10:16 PM IST
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उत्पादन तेजी से बढ़ने के कारण भारत के विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि में सुधार आया। सितंबर में आठ माह से निचले स्तर पर रही विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि में अक्टूबर के दौरान बेहतर रही। सोमवार को जारी एक निजी कारोबारी सर्वेक्षण के अनुसार कुल नए ऑर्डर और अंतरराष्ट्रीय बिक्री में तेजी ने उत्पादन को बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाई।

एचएसबीसी का अंतिम भारत विनिर्माण पर्चेजिंग मैनेजर्स सूचकांक (पीएमआई) अक्टूबर में बढ़कर 57.5 हो गया जबकि यह सितंबर में आठ माह के निचले स्तर 56.5 पर था। इस सूचकांक में 50 से ऊपर का आंकड़ा गतिविधियों में विस्तार और इससे कम गिरावट का संकेत देता है। इस आंकड़े का संकलन एसऐंडपी ग्लोबल ने किया है।

सर्वेक्षण के अनुसार, ‘कंपनियों ने ऑर्डर बुक में तेजी से विस्तार दर्ज किया और यह करीब 20 वर्ष के डेटा संग्रह के औसत से अधिक नजर आया। रिपोर्ट व अनुमान के मुताबिक नए उत्पादों और सफलतापूर्वक मार्केटिंग की पहल के कारण बिक्री के मामले में प्रदर्शन बेहतर हुआ।’

नए निर्यात ऑर्डर में मजबूत वृद्धि दिखी जबकि इससे पहले सितंबर में डेढ़ साल की सबसे कमजोर वृदि्ध हुई थी। समिति के सदस्यों की रिपोर्ट के मुताबिक एशिया, यूरोप, लैटिन अमेरिका और यूएस से नए अनुबंधों की मांग में वृद्धि हुई। सर्वेक्षण के अनुसार ‘अक्टूबर में उत्पादन गतिविधियों में तेजी से खासा उछाल आई। इसका कारण उपभोक्ता और निवेश की वस्तुओं की श्रेणियों का अधिक तेजी से बढ़ना था।

कंपनियों ने मांग में जबरदस्त उछाल, सकारात्मक बिक्री की उम्मीद और बाजार की अनुकूल स्थितियों को उत्पादन में आई हालिया तेजी की वजह बताया।’एचएसबीसी की भारत की प्रमुख अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि अर्थव्यवस्था के संचालन की स्थितियां व्यापक रूप से सुधरने के कारण अक्टूबर में भारत में हेडलाइन विनिर्माण पीएमआई पर्याप्त रूप से सुधरा।

उन्होंने कहा, ‘भारत के विनिर्माण क्षेत्र की मजबूत मांग नए ऑर्डर व अंतरराष्ट्रीय बिक्री की तेजी से बढ़ते विस्तार से प्रदर्शित होती है। हालांकि सामग्री, श्रम व ढुलाई की लागत से नियमित रूप से महंगाई का दबाव रहा और इससे वस्तुओं के उत्पादन की लागत व बिक्री मूल्य में इजाफा हुआ।’

First Published - November 4, 2024 | 10:16 PM IST

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