facebookmetapixel
शिक्षा मंत्री का आश्वासन: UGC के नए नियमों से किसी का उत्पीड़न नहीं होगा, हर छात्र को मिलेगा समान न्यायसंसद का बजट सत्र कल से: कामकाज का समय तो बढ़ा, पर विधायी चर्चा और बिलों की संख्या में आई कमीPM मोदी बोले: भारत के उर्जा क्षेत्र में 500 अरब डॉलर के निवेश का अवसर, देश बनेगा दुनिया का रिफाइनिंग हबIT पेशेवरों के लिए खुला यूरोप का द्वार: अमेरिका की सख्ती के बीच भारत-EU डील से वीजा की राह आसानइस साल लोग नए पर्यटन स्थलों का करेंगे रुख, लंबे वीकेंड का पूरा फायदा उठाने की योजनाइलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भारत की लंबी छलांग, यूरोप को होने वाले एक्सपोर्ट में 37% की भारी बढ़ोतरीसंसद का बजट सत्र बुधवार से शुरू, राष्ट्रपति के अभिभाषण और आम बजट पर होगी मुख्य चर्चाIndia-EU 6G Collaboration: तकनीक और विनिर्माण के मेल से संचार क्रांति को मिलेगी नई रफ्तारवस्त्र उद्योग के लिए ‘गेम चेंजर’ हो सकता है EU समझौता, 2030 तक $100 अरब निर्यात का लक्ष्य होगा पूराIndia-EU FTA: भारत-ईयू में बड़ा करार, बढ़ेगा साझा व्यापार; 2 अरब लोगों के बाजार तक पहुंच

पूंजीगत खर्च में गिरावट: छोड़ी गई परियोजनाओं का मूल्य पहुंचा 15 ट्रिलियन रुपये

India capital expenditure: पूर्ण और छोड़ी गई परियोजनाओं के बीच 8.1 ट्रिलियन रुपये का यह अंतर निवेश साइकिल में लगातार बना हुआ है।

Last Updated- February 16, 2024 | 4:47 PM IST
Economic Survey 2025: India needs to increase investment on infrastructure in the next two decades भारत को अगले दो दशक में इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ाने की जरूरत

दिसंबर 2023 को समाप्त होने वाली चार तिमाहियों में छोड़े गए पूंजीगत खर्च (capex) प्रोजेक्ट का मूल्य पूर्ण प्रोजेक्ट के मूल्य से दोगुना से ज्यादा हो गया। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के आंकड़ों से पता चलता है कि पूरी की गई परियोजनाएं कुल 6.9 ट्रिलियन रुपये की थीं, जबकि छोड़ी गई परियोजनाएं (dropped projects) 15 ट्रिलियन रुपये की थीं। पूर्ण और छोड़ी गई परियोजनाओं के बीच 8.1 ट्रिलियन रुपये का यह अंतर निवेश साइकिल में लगातार बना हुआ है।

दिसंबर 2009 का सबसे पुराना डेटा बताता है कि पूरी हो चुकी परियोजनाओं का मूल्य छोड़ी गई परियोजनाओं (dropped projects) की तुलना में थोड़ा कम था।

क्या हैं छोड़ी गई परियोजनाएं (dropped projects)?

छोड़ी गई परियोजनाओं (dropped projects) में वे परियोजनाएं शामिल हैं जिन्हें छोड़ दिया गया है, बंद कर दिया गया है, रुकी हुई हैं, या जिनके बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।

Capex का मतलब सड़कों, कारखानों और अन्य लॉन्ग टर्म एसेट में निवेश से है। सरकार विकास को बढ़ावा देने के लिए अधिक पूंजीगत व्यय को पुश कर रही है और इसने बड़े पैमाने पर देश में अतिरिक्त निवेश को प्रेरित किया है, हालांकि हाल के महीनों में यह पुश धीमा हो गया है।

Also Read: साल की दूसरी छमाही में भारत में दो बार दरों में कटौती की उम्मीद: गोल्डमैन सैक्स

हाल के दिनों में, सरकार समर्थित छोड़ी गई परियोजनाओं का मूल्य प्राइवेट सेक्टर की तुलना में अधिक रहा है। यह प्राइवेट सेक्टर की कम गतिविधि के कारण हो सकता है या सरकार ने उन परियोजनाओं को छोड़ने का निर्णय लिया है जो ठीक नहीं थीं।

दिसंबर 2023 को समाप्त चार तिमाहियों में, सरकार ने 8 ट्रिलियन रुपये की परियोजनाएं छोड़ दीं, जबकि निजी क्षेत्र ने 7.1 ट्रिलियन रुपये की परियोजनाएं छोड़ीं।

दिसंबर 2023 में, छोड़ी गई मैन्युफैक्चरिंग परियोजनाएं 4.4 ट्रिलियन रुपये की थीं, जो दिसंबर 2019 में 2.5 ट्रिलियन रुपये थी। इसने छोड़ी गई बिजली परियोजनाओं को पीछे छोड़ दिया, जो महामारी से पहले दूसरी सबसे बड़ी कैटेगरी थी।

दिसंबर 2019 से पहले, छोड़ी गई बिजली परियोजनाएं कुल मिलाकर लगभग 5.3 ट्रिलियन रुपये थीं। दिसंबर 2019 में, सेवाओं की छोड़ी गई परियोजनाओं में सबसे बड़ी हिस्सेदारी 7.8 ट्रिलियन रुपये थी, जो तब से घटकर 4 ट्रिलियन रुपये हो गई है।

सेवा क्षेत्र, जो भारत की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख हिस्सा है, के पिछले साल की तुलना में 2023-24 में अधिक धीमी गति से बढ़ने की उम्मीद है।

First Published - February 16, 2024 | 4:43 PM IST

संबंधित पोस्ट