facebookmetapixel
दूध के साथ फ्लेवर्ड दही फ्री! कहानी क्विक कॉमर्स की जो बना रहा नए ब्रांड्स को सुपरहिटWeather Update Today: उत्तर भारत में ठंड की लहर! IMD ने जारी किया कोहरा-बारिश का अलर्ट67% चढ़ सकता है सिर्फ ₹150 का शेयर, Motilal Oswal ने शुरू की कवरेज; BUY की दी सलाहअमेरिका का सख्त कदम, 13 देशों के लिए $15,000 तक का वीजा बॉन्ड जरूरीवेनेजुएला के तेल उद्योग पर अमेरिका की नजर: ट्रंप बोले- अमेरिकी कंपनियों को मिल सकती है सब्सिडीस्टॉक स्प्लिट का ऐलान: इस रियल्टी कंपनी के शेयर 15 जनवरी से होंगे स्प्लिट, जानें डिटेलStock Market Update: हैवीवेट शेयरों में बिकवाली से बाजार की कमजोर शुरुआत, सेंसेक्स 340 अंक गिरा; निफ्टी 26,200 के पासStocks To Watch Today: ONGC से Adani Power तक, आज बाजार में इन स्टॉक्स पर रहेगी नजरमजबूत फंडामेंटल के साथ शेयर बाजार में बढ़त की उम्मीद, BFSI क्षेत्र सबसे आगे: रमेश मंत्रीअमेरिकी प्रतिबंधों से वेनेजुएला की तेल अर्थव्यवस्था झुलसी, निर्यात पर गहरा असर; भारत का आयात भी घटा

Crude Oil Imports: पश्चिम एशिया में टकराव के कारण ईरान से तेल आयात की योजना अधर में

Crude Oil Imports: रूस से तेल आयात पर भी दबाव बढ़ रहा है

Last Updated- April 16, 2024 | 10:56 PM IST
Crude Oil

पश्चिम एशिया में चल रहे ताजा टकराव के कारण ईरान से कच्चे तेल का आयात बहाल करने की भारत की शुरुआती योजना पटरी से उतर गई है। मामले से जुड़े अधिकारियों ने यह जानकारी दी। जनवरी में अधिकारियों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया था कि सरकार इस प्रस्ताव का अध्ययन कर रही है, क्योंकि भारत अपने आयात के स्रोतों को व्यापक बनाना चाहता है।

पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी ने सोमवार को कहा, ‘कच्चे तेल के आवक के मामले में हम हमेशा स्थिति की निगरानी करते हैं। ईरान से कच्चे तेल का आयात बहाल करने का प्रस्ताव था। लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए फिलहाल अब यह योजना दरकिनार कर दी गई है।’

भारत ने अब तक किसी ऐसे देश से तेल नहीं खरीदा है, जिस पर वैश्विक प्रतिबंध लगा हो। सरकार ने वेनेजुएला से तभी आयात शुरू किया, जब दक्षिण अमेरिकी देशों पर से अमेरिका ने प्रतिबंध खत्म कर दिया। ईरान से तेल आयात के मसले पर संभवतः विदेश मंत्री एस जयशंकर की जनवरी में हुई ईरान यात्रा के दौरान द्विपक्षीय बातचीत हुई थी।

ईरान से तेल आयात बहाल करने की योजना के पीछे कई वजहें थीं, जिसमें एक यह है कि ईरान पर क्षेत्रीय अस्थिरता का असर कम होता है। एक अधिकारी ने कहा, ‘ईरान से शिपमेंट फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी होकर आती है, जहां हूती चरमपंथियों की सीमित मौजूदगी है।’ इसके अलावा हूती ईरान के शासन के सहयोगी भी हैं, जिससे तेहरान के लिए महत्त्वपूर्ण व्यापार में उनके हस्तक्षेप की आशंका नहीं रह जाती।

एक साल से अधिक समय से रूस के कच्चे तेल की बड़ी खेप मंगाने के बाद भारत अब पश्चिम एशिया के अपने परंपरागत तेल साझेदारों के साथ आपूर्ति के संबंध फिर से स्थापित करने की कवायद कर रहा है। जनवरी तक के आंकड़ों के मुताबिक ईराक और सऊदी अरब भारत के कच्चे तेल के दूसरे और तीसरे सबसे बड़े स्रोत थे। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि ईरान के तेल का आयात बहाल हो सकता है या नहीं, यह व्यापक कवायद का हिस्सा है।

बहरहाल रूस से आयात को लेकर भी दबाव बढ़ रहा है, क्योंकि अमेरिका ने रूस के प्रमुख टैंकर ग्रुप सोवकॉमफ्लोट पर फरवरी में नए प्रतिबंध लगाए हैं और इसकी वजह से भुगतान करने को लेकर चुनौतियां बढ़ रही हैं। भारत को मिल रहा डिस्काउंट भी अब घटकर सबसे निचले स्तर 3 से 4 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है।

2018-19 तक ईरान कच्चे तेल का भारत का तीसरा सबसे बड़ा स्रोत था, जब 12.1 अरब डॉलर का तेल आयात हुआ था। जून 2019 में डॉनल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली अमेरिकी सरकार ने परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान पर नए सिरे से प्रतिबंध लगा दिया था।

First Published - April 16, 2024 | 10:56 PM IST

संबंधित पोस्ट