facebookmetapixel
अजित पवार का राजनीतिक सफर: 1991 में पहली बार जीता लोकसभा चुनाव, समर्थकों में ‘दादा’ के नाम से लोकप्रियIndia-EU ट्रेड डील पर मार्केट का मिक्स्ड रिएक्शन! ब्रोकरेज क्या कह रहे हैं?Budget Expectations: बजट में बड़ा ऐलान नहीं, फिर भी बाजार क्यों टिका है इन सेक्टरों परBudget Session 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा – सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध है सरकारShadowfax Tech IPO Listing: निवेशकों को झटका, 9% डिस्काउंट के साथ 113 रुपये पर लिस्ट हुए शेयरAsian paints share: कमजोर नतीजों से ब्रोकरेज निराश, रेटिंग और टारगेट डाउनग्रेड; निवेशकों के लिए क्या संकेत?Auto Sector: CV से लेकर टू व्हीलर तक बूम का अनुमान, नुवामा के टॉप पिक में ये 3 स्टॉक सबसे आगेविमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की मौत, पीएम मोदी ने असमय निधन पर जताया दुखGold, Silver Price Today: सारे रिकॉर्ड टूटे, सोना ₹1.62 लाख और चांदी ₹3.77 लाख के पारकंपनियां बॉन्ड छोड़ बैंकों की ओर क्यों लौटीं? SBI रिसर्च की रिपोर्ट में जानें

सरकारी खरीद बाजार में ब्रिटेन की फर्मों की होगी पहुंच

ब्रिटेन की कंपनियों को ‘मेक इन इंडिया’ नीति के तहत सरकारी खरीद में प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलेगा

Last Updated- May 07, 2025 | 11:00 PM IST
India-UK FTA

सरकार ने मंगलवार को संपन्न मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के अंतर्गत ब्रिटेन को एक महत्त्वपूर्ण रियायत दी है। इसके तहत भारत ने विशाल सरकारी खरीद बाजार तक ब्रिटेन को ‘कानूनी रूप से गारंटीशुदा पहुंच’ प्रदान की है। कुल मिलाकर ब्रिटेन के लिए सरकारी खरीद का बाजार एक तरह से खोल दिया है। ब्रिटेन सरकार के अनुसार इससे वहां के व्यवसायों को हर साल तकरीबन 38 अरब पाउंड मूल्य के लगभग 40,000 भारतीय निविदाओं के लिए बोली की अनुमति मिलेगी।

नीति पत्र में ब्रिटेन के कारोबार एवं व्यापार विभाग ने कहा, ‘पहली बार ब्रिटेन की कंपनियां भारत में अधिकांश केंद्रीय संस्थाओं और साथ ही सरकार के स्वामित्व वाले उद्यमों के लिए विभिन्न प्रकार की वस्तुओं, सेवाओं और निर्माण खरीद में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होंगी।’ भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार करार के सरकारी खरीद अध्याय के तहत हुए समझौते के माध्यम से ब्रिटेन की कंपनियों को ‘मेक इन इंडिया’ नीति के तहत उसी तरह की रियायत मिलेगी जिस तरह भारत में विनिर्माण या उत्पादन करने वाली कंपनियों को सरकारी खरीद में तरजीह दी जाती है। नीति पत्र में कहा गया है कि ब्रिटेन की कंपनियों को श्रेणी 2 का आपूर्तिकर्ता माना जाएगा।

भारत अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का करीब 20 फीसदी सार्वजनिक खरीद पर खर्च करता है और ब्रिटेन के आपूर्तिकर्ताओं को इनमें से अनेक अनुबंधों के लिए बेहतर शर्तों पर बोली लगाने का अवसर मिलेगा।

First Published - May 7, 2025 | 11:00 PM IST

संबंधित पोस्ट