Capex: ICICI सिक्योरिटीज की नई रिपोर्ट कहती है कि देश की लिस्टेड कंपनियां पहले से ज्यादा पैसा अपने कारोबार को बढ़ाने (कॉरपोरेट Capex) में लगा रही हैं। सितंबर 2025 तक एक साल में कंपनियों ने कुल 11.7 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है। अगर इसमें केंद्र और राज्य सरकारों का खर्च भी जोड़ दें, तो कुल खर्च 31.6 लाख करोड़ रुपये के सबसे बड़े स्तर पर पहुंच गया है। बिजली, ऊर्जा, फैक्टरी से जुड़ी कंपनियां, धातु उद्योग और गाड़ियों से जुड़े सेक्टर इस बढ़त को आगे बढ़ा रहे हैं।
अब सिर्फ बड़ी कंपनियां नहीं, बल्कि दूसरी और छोटी कंपनियां भी ज्यादा पैसा निवेश कर रही हैं। पहले 135 कंपनियां साल में 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा निवेश करती थीं, अब यह संख्या बढ़कर 169 हो गई है। इससे पता चलता है कि देश में निवेश अब हर तरफ बढ़ रहा है।
रिपोर्ट कहती है कि आने वाले समय में बैंकों, कैपिटल गुड्स, मटेरियल से जुड़े उद्योगों और बड़े निर्माण वाले सेक्टरों में तेजी आ सकती है। SBI, Axis Bank, L&T, BHEL, JSW Energy, NTPC, Reliance Industries, HPCL, Vedanta, Bharti Airtel, Ambuja Cement, Suzlon Energy और GR Infraprojects जैसी कंपनियों को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है। इन कंपनियों के पास अभी अच्छा पैसा आ रहा है और इन पर कर्ज भी कम है, इसलिए ये अपनी बिजनेस बढ़ाने की योजनाओं को आसानी से आगे बढ़ा सकती हैं।
दुनिया में अब कई देश बाहर से सामान लेने के बजाय खुद बनाने पर जोर दे रहे हैं। इसी वजह से वे अपनी जरूरी चीजें अपने देश में ही तैयार करने की क्षमता बढ़ा रहे हैं। भारत भी ऊर्जा, रक्षा, रेयर-अर्थ, सड़क–पुल जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर, फैक्टरी उत्पादन और डिजिटल नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में अपनी ताकत तेजी से बढ़ा रहा है। रिपोर्ट कहती है कि भारत में निवेश ज्यादातर पुराने और मजबूत उद्योगों में हो रहा है, जबकि अमेरिका जैसे देशों में निवेश अब ज्यादा तर AI पर निर्भर है।
इस वजह से भारत दुनिया के लिए एक सुरक्षित और स्थिर निवेश विकल्प बन रहा है। FY26 के पहले छह महीनों में भारत का निवेश दर 34% तक पहुंच गया है, जो दिखाता है कि देश में निवेश बहुत तेजी से बढ़ रहा है। रियल एस्टेट की मांग बढ़ने से भी निवेश को बढ़ावा मिल रहा है, हालांकि सस्ते घरों की मांग अभी पूरी तरह नहीं बढ़ी है।
रिपोर्ट कहती है कि अभी असली ब्याज दरें (यानी बैंक जिस दर पर लोन देते हैं, उसमें से महंगाई घटाने पर जो दर बनती है) काफी ज्यादा हैं। इसका कारण है कि महंगाई इस समय काफी कम है। अगर RBI आगे भी ब्याज दरें कम करता रहा और महंगाई सामान्य स्तर पर बनी रही, तो असली ब्याज दरें भी नीचे आएंगी। जब ब्याज दरें कम होती हैं, तो कंपनियों के लिए लोन लेना आसान और सस्ता हो जाता है। इससे वे ज्यादा निवेश कर सकती हैं और अपने कारोबार को तेजी से बढ़ा सकती हैं।
रिपोर्ट बताती है कि भारत की कंपनियों का मुनाफा अब GDP के मुकाबले 5.2% तक पहुंच गया है। इसका मतलब है कि कंपनियां अच्छी कमाई कर रही हैं और उनके पास अपने काम को बढ़ाने के लिए अंदरूनी पैसा भी काफी है। कंपनियों का कर्ज भी इस समय बहुत कम है, इसलिए वे चाहें तो आसानी से दोबारा लोन लेकर अपने कारोबार का विस्तार कर सकती हैं।
बैंकिंग सेक्टर की हालत भी अच्छी है क्योंकि एनपीए बहुत कम हैं और कंपनियां ज्यादा कर्ज मांग भी नहीं रही हैं। इससे बैंकों के पास लोन देने के लिए पर्याप्त पैसा उपलब्ध है। शेयर बाजार भी मजबूत है, जिससे कंपनियां शेयर बेचकर भी आसानी से पैसा जुटा पा रही हैं। इन सभी बातों से देश में निवेश और तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।