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मोबाइल के लिए देसी ऑपरेटिंग सिस्टम!

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Last Updated- January 16, 2023 | 12:12 AM IST

भारत स्वदेशी मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम बनाने की परियोजना पर काम कर रहा है। इसका नाम संभवत: इंडओएस हो सकता है। यह सरकार, स्टार्टअप कंपनियों और शिक्षा जगत की पहल है।

सरकार के शीर्ष सूत्रों का कहना है कि इसका उद्देश्य मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम बाजार में गूगल के ऐंड्रॉयड (97 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी) और ऐपल आईओएस को टक्कर देना है।

घटनाक्रम की पु​ष्टि करते हुए एक वरिष्ठ सरकारी अ​धिकारी ने कहा, ‘भारत दुनिया के सबसे बड़े मोबाइल उपकरण बाजार में से एक है। हमारा मकसद ग्राहकों के लिए सुर​क्षित भारतीय मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम तैयार करना और ऐंड्रॉयड के वर्चस्व को टक्कर देना है। बाजार में आईओएस की भी छोटी हिस्सेदारी है।’

इंडओएस विकसित करने का काम तब किया जा रहा है, जब जब गूगल के ऑपरेटिंग सिस्टम की देश में जांच चल रही है और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने ऐंड्रॉयड प्लेस्टोर नीति में प्रतिस्पर्द्धा दबाए जाने के कारण गूगल पर जुर्माना भी लगाया है। इसने गूगल को निर्देश दिया है कि अपना एका​धिकार कम करने के लिए वह डेवलपर के ऐप को भी साइडलोडिंग की इजाजत दे।

अग्रणी मोबाइल उपकरण विनिर्माताओं ने गूगल के इस कदम को खारिज कर दिया है क्योंकि उन्हें लगता है कि साइडलोड किए गए ऐप्स की सुरक्षा और उपयोगकर्ता सुरक्षा सुविधाओं का ख्याल रखने की जिम्मेदारी उन्हीं पर आएगी तथा इसके लिए उन्हें अतिरिक्त निवेश करना होगा। ऐसा करने पर मोबाइल फोन महंगे हो जाएंगे।

उपकरण विनिर्माताओं का कहना है कि साइडलोड ऐप्स की सुरक्षा का ख्याल रखने का जिम्मा उनका नहीं बल्कि गूगल का है और सरकार को फैसला करना है कि सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है।

देसी मोबाइन फोन विनिर्माताओं ने स्वदेशी ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए सरकार की पहल का समर्थन किया है और कहा, ‘हम ग्राहकों को फोन बेचते हैं और बिक्री के बाद कुछ वारंटी भी देते हैं। गूगल को इस बारे में सीसीआई या सरकार के साथ बात कर तय करना होगा कि साइडलोड ऐप की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी। इसकी जिम्मेदारी हमारी को नहीं होगी।’

पहले ऐप डेवलपरों के पास गूगल प्ले स्टोर पर अपने ऐप डालने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं था और गूगल ही उसकी सुरक्षा की जांच करती थी। अब वे सीधे तौर पर ऐप दे सकते हैं, जिसे साइडलोडिंग कहा जाता है। इससे प्ले स्टोर का दबदबा कम हो जाएगा।

देसी मोबाइल उपकरण विनिर्माता भी गूगल जैसी वैश्विक तकनीकी दिग्गजों के समर्थन के साथ या उसके बिना भारतीय मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने निजी तौर पर कहा कि सीसीआई की पहल इस दिशा में पहला कदम है।

उन्होंने कहा कि देसी ऑपरेटिंग सिस्टम ग्राहकों को ज्यादा सुरक्षा एवं संरक्षा प्रदान करेगा। सूत्रों ने कहा कि सीसीआई के इस निर्णय से तकनीकी दिग्गजों में हड़कंप मच गया है। अगर गूगल साइलोड ऐप को सुरक्षित नहीं कर सकती और मोबाइल विनिर्माता भी इससे इनकार करते हैं तो सरकार को तय करना होगा कि इन ऐप्स की जांच कौन करेगा।

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First Published - January 16, 2023 | 12:12 AM IST

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