अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने मंगलवार को (भारतीय समयानुसार) भारतीय चावल पर नए टैरिफ लगाने का संकेत दिया। यह धमकी ऐसे समय में दी गई है जब अमेरिका के उप व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते का आकलन करने के लिए नई दिल्ली में है।
ट्रंप ने कहा, ‘उन्हें डंपिंग नहीं करनी चाहिए। इसके बारे में मैंने सुना है। आप ऐसा नहीं कर सकते।’ उन्होंने कहा कि वह अमेरिकी बाजार में उस कमोडिटी की कथित डंपिंग पर नजर रखेंगे।
ट्रंप व्हाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे जहां अमेरिकी किसानों के लिए 12 अरब डॉलर की नई सहायता की घोषणा की गई। लुइसियाना में अपने परिवार के कृषि व्यवसाय कैनेडी राइस मिल चलाने वाली मेरिल कैनेडी ने ट्रंप को बताया कि दक्षिणी हिस्से में चावल उत्पादक वास्तव में संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत सहित तमाम देश अमेरिका में चावल की डंपिंग कर रहे हैं।
भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में भारत ने अमेरिका को 39.2 करोड़ डॉलर मूल्य का चावल निर्यात किया, जबकि इसका वैश्विक चावल निर्यात 12.95 अरब डॉलर रहा। फिलहाल भारतीय निर्यातकों को अमेरिका में 50 फीसदी शुल्क का सामना करना पड़ता है।
भारत के 39.2 करोड़ डॉलर के चावल निर्यात में बासमती चावल की हिस्सेदारी 33.71 करोड़ डॉलर रही। इस प्रकार अमेरिका भारतीय बासमती चावल के लिए चौथा निर्यात बाजार बन गया।
भारतीय चावल निर्यातकों के संगठन इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (आईआरईएफ) ने कहा कि अमेरिका को निर्यात पूरी तरह से मांग द्वारा संचालित है जिसमें अधिकतर ऑर्डर अमेरिकी आयातकों के अग्रिम खरीद के हैं।अमेरिका में भारतीय चावल की खपत मुख्य तौर पर खाड़ी और उस उपमहाद्वीप के समुदायों द्वारा की जाती है और उसकी मांग लगातार बढ़ रही है। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिका में उगाया जाने वाला चावल भारतीय चावल का विकल्प नहीं है। भारतीय बासमती चावल में एक खास सुगंध और स्वाद है। आईआरईएफ के अनुसार, अमेरिका में उगाई जाने वाली किस्में आम तौर पर खाड़ी एवं दक्षिण एशियाई क्षेत्रों के पारंपरिक व्यंजनों की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती हैं।
आईआरईएफ के उपाध्यक्ष देव गर्ग ने कहा, ‘खुदरा बाजारों से प्राप्त साक्ष्यों से पता चलता है कि शुल्क का अधिकांश बोझ अमेरिकी उपभोक्ताओं पर डाला गया है। खुदरा पैक की कीमतों में वृद्धि से भी इसका संकेत मिलता है। भारतीय किसानों और निर्यातकों के लिए निर्यात प्राप्तियां मोटे तौर पर स्थिर हैं। भारतीय चावल निर्यात उद्योग काफी मजबूत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी है।’
इस बीच, अमेरिका के उप व्यापार प्रतिनिधि रिक स्विट्जर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल 9 से 11 दिसंबर तक भारत दौरे पर है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत इस साल के आखिर तक द्विपक्षीय व्यापार समझौते का एक चरण पूरा कर लेना चाहता है। वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बुधवार और गुरुवार को सभी व्यापार संबंधी मुद्दों पर बातचीत होगी।