भारत की सबसे बड़ी क्विक कॉमर्स कंपनी Blinkit के CEO अलबिंदर धिंदसा का कहना है कि यह क्षेत्र बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है। उनके अनुसार कई कंपनियों की फंडिंग कम हो रही है और वे लंबे समय तक भारी नुकसान सहन नहीं कर पाएंगी। इसके मुकाबले Blinkit को भरोसा है कि वह आगे भी बढ़ेगा और अपनी विस्तार योजनाओं को जारी रखेगा। धिंदसा का मानना है कि अब तक क्विक कॉमर्स सेक्टर लगातार फंडिंग पर निर्भर था, लेकिन यह मॉडल अब अपनी सीमा पर पहुंच रहा है। दुनिया के कई देशों में तेज डिलीवरी करने वाली कंपनियां पहले ही बंद हो चुकी हैं। भारत में हालांकि यह मॉडल काम कर रहा है क्योंकि यहां शहर घने हैं, मजदूरी सस्ती है और डिजिटल पेमेंट हर जगह उपलब्ध है। फिर भी, लंबे समय में टिके रहने के लिए मजबूत लॉजिस्टिक्स और पर्याप्त पूंजी जरूरी है।
धिंदसा का कहना है कि निवेशक अब पहले की तरह जोखिम लेने को तैयार नहीं हैं, जबकि कंपनियों को लगातार ज्यादा पैसा चाहिए। Swiggy लगभग 1.1 बिलियन डॉलर के शेयर बेचने की तैयारी (QIP) कर रही है, जो उसके पिछले साल के IPO के लगभग उसी दाम पर होगा। वहीं Zepto भी अगले साल के IPO से पहले 450 मिलियन डॉलर जुटा चुका है। यह स्थिति दिखाती है कि 10 मिनट की तेज डिलीवरी के लिए कंपनियों को भारी खर्च करना पड़ता है। धिंदसा ने कहा कि जब खर्च बढ़ जाए और पैसा मिलना कठिन हो जाए, तो बाजार में करेक्शन बहुत तेजी से आता है और कई कंपनियां अचानक मुश्किल में पड़ सकती हैं।
Bernstein के विश्लेषकों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि Blinkit लंबे समय में इस सेक्टर का लीडिंग प्लेयर बनकर उभर रहा है। उन्होंने इसके पीछे कंपनी की बेहतर कार्य क्षमता, मजबूत यूनिट इकोनॉमिक्स और 2 बिलियन डॉलर से ज्यादा की नकदी को कारण बताया है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि क्योंकि मुकाबला बहुत बढ़ रहा है, इसलिए Blinkit को आगे और ज्यादा पैसा लगाना पड़ेगा। अभी Blinkit मुनाफा नहीं कमा रही है, क्योंकि यह नए शहरों और नए इलाकों में लगातार अपनी सेवा बढ़ा रही है।
Blinkit के सामने अब Amazon, Flipkart और रिलायंस रिटेल जैसे बड़े समूह भी उतर चुके हैं, जिससे मुकाबला और कठिन हो गया है। भारत में सप्लाई चेन अभी भी बिखरी हुई है, कोल्ड स्टोरेज की कमी है और खरीद नेटवर्क भी समान रूप से विकसित नहीं हैं। इस वजह से क्विक कॉमर्स पारंपरिक ई-कॉमर्स की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण बन जाता है।
अलबिंदर धिंदसा का कहना है कि आगे चलकर तेज डिलीवरी और सामान्य ऑनलाइन शॉपिंग में ज्यादा फर्क नहीं रहेगा। Blinkit अभी भी फ्रिज, किताबें और कई तरह का जरूरी सामान लोगों को उपलब्ध करा रहा है। धिंदसा कहते हैं कि कंपनी सिर्फ वही नए प्रोडक्ट बेचेगी, जिनमें वह ग्राहकों की परेशानी- जैसे गलत साइज या सामान वापस करने की दिक्कत, अच्छे से हल कर सके। यानी कंपनी वही काम करेगी, जहां उसे सच में सफलता मिलने का अच्छा मौका हो।
Blinkit छोटे शहरों में भी अपनी सेवाएं बढ़ाना चाहता है। धिंदसा के अनुसार छोटे कस्बों में मांग तो काफी है, लेकिन समस्या है वहां की सप्लाई चेन और इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी। तेजी से डिलीवरी तभी संभव होगी जब स्थानीय स्तर पर ज्यादा डार्क स्टोर्स और बेहतर नेटवर्क बनेंगे। कंपनी स्थानीय लोगों और कारोबारियों के साथ मिलकर फल–सब्ज़ी की सप्लाई को बेहतर बना रही है। इससे छोटे शहरों में रोजगार बढ़ रहा है और कई लोग अपने गांव–कस्बों में वापस काम कर पा रहे हैं।
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धिंदसा कहते हैं कि पहले कंपनियां ज्यादा डिस्काउंट देकर मांग बढ़ाने की कोशिश करती थीं, लेकिन इससे उन्हें नुकसान होता था। अब Blinkit ऐसा नहीं करेगा। कंपनी वही काम करेगी जिससे उसे लंबे समय में फायदा हो। उनका मानना है कि आने वाले समय में पूरे क्विक कॉमर्स सेक्टर में बड़ा बदलाव आएगा। कंपनियों को अपनी उम्मीदें, खर्च और सप्लाई चेन की हकीकत- इन सबके बीच सही संतुलन बनाना होगा। धिंदसा कहते हैं कि बदलाव कब आएगा, यह नहीं कहा जा सकता, लेकिन इतना तय है कि सुधार जरूर होगा। (ब्लूमबर्ग के इनपुट के साथ)