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ग्रीनलैंड पर कब्जे की तैयारी तेज, ट्रंप के सहयोगी बोले- हफ्तों या महीनों में बड़ा कदम

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ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड को लेकर जल्द अहम फैसले ले सकता है, डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने फिर किया विरोध

Last Updated- January 14, 2026 | 11:43 AM IST
Trump Greenland Takeover
Representational Image

Trump Greenland Takeover: अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश अब और तेज होती दिख रही है। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिया है कि अमेरिका आने वाले हफ्तों या महीनों में इस दिशा में बड़े कदम उठा सकता है।

USA टूडे को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप के आर्कटिक मामलों के आयुक्त थॉमस डैन्स ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर तेजी से आगे बढ़ना चाहते हैं। डैन्स ट्रंप की ग्रीनलैंड नीति के प्रमुख समर्थकों में से एक हैं।

डैन्स ने कहा कि यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कई चरण हो सकते हैं, लेकिन अगर ट्रंप चाहें तो बीच के कदम छोड़े जा सकते हैं और सीधे लक्ष्य पर पहुंचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि ट्रंप इसी रफ्तार से काम होते देखना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि ग्रीनलैंड को पूरी तरह अमेरिका में शामिल करने में समय लगेगा। डैन्स ने कहा कि इसके लिए ग्रीनलैंड के लोगों की सहमति जरूरी होगी, जबकि वहां की जनता अमेरिका का हिस्सा बनने के खिलाफ है।

डेनमार्क और ग्रीनलैंड का साफ इनकार

ग्रीनलैंड और डेनमार्क के नेताओं ने बार-बार कहा है कि ग्रीनलैंड को अमेरिका के हवाले करने का सवाल ही नहीं उठता। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने कहा कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और यह डेनमार्क के साम्राज्य का हिस्सा बना रहेगा। उन्होंने साफ कहा कि ग्रीनलैंड का भविष्य वहां के लोग लोकतांत्रिक तरीके से तय करेंगे, न कि किसी बाहरी दबाव में।

डेनमार्क सरकार ने भी यही रुख दोहराया है। कोपेनहेगन का कहना है कि आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पहले से ही नाटो समझौतों के तहत कवर होते हैं और किसी भी आर्थिक या रणनीतिक वजह से संप्रभुता से समझौता नहीं किया जा सकता। सर्वे बताते हैं कि ग्रीनलैंड के लोग भले ही भविष्य में डेनमार्क से आजादी के पक्ष में हों, लेकिन अमेरिका का हिस्सा बनने के सख्त खिलाफ हैं।

यह भी पढ़ें: NATO का गठन क्यों हुआ था और ट्रंप का ग्रीनलैंड पर जोर देना कैसे इस गठबंधन की परीक्षा ले रहा है?

हाई लेवल बातचीत से बढ़ा तनाव

डैन्स के बयान ऐसे समय आए हैं, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस 14 जनवरी को व्हाइट हाउस में डेनमार्क और ग्रीनलैंड के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करने वाले हैं। पहले यह बैठक विदेश मंत्री मार्को रुबियो की अगुवाई में होनी थी, लेकिन उपराष्ट्रपति की मौजूदगी को इस मुद्दे की गंभीरता के तौर पर देखा जा रहा है। डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने कहा कि ट्रंप के कड़े बयानों के बाद डेनमार्क ने खुद बातचीत की इच्छा जताई थी।

आर्कटिक में रूस-चीन का डर

ट्रंप का कहना है कि अमेरिका को ग्रीनलैंड की जरूरत इसलिए है ताकि रूस और चीन आर्कटिक क्षेत्र में अपना असर न बढ़ा सकें। बर्फ पिघलने के कारण नए समुद्री रास्ते खुल रहे हैं, जिससे इस इलाके की रणनीतिक अहमियत बढ़ गई है। ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि वह ग्रीनलैंड को खरीदना चाहते हैं या कूटनीतिक तरीके से उस पर नियंत्रण हासिल करना चाहते हैं। उन्होंने सैन्य विकल्प को पूरी तरह नकारा भी नहीं है।

हाल ही में ट्रंप ने कहा था, “मैं यह काम आसान तरीके से करना चाहता हूं, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो हमें कठिन रास्ता अपनाना पड़ेगा।” हालांकि ट्रंप के सहयोगी डैन्स ने कहा कि फिलहाल फोकस कूटनीति और लंबे समय की बातचीत पर ही है।

यूरोपीय सहयोगी चिंतित

ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की नई कोशिशों से यूरोप के कई देश असहज हैं। यूरोपीय सरकारों ने चेतावनी दी है कि किसी भी देश की सीमाओं या संप्रभुता को दबाव डालकर बदलने की कोशिश ठीक नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला ऐसे समय में अमेरिका और यूरोप के रिश्तों पर असर डाल सकता है, जब यूक्रेन और मध्य पूर्व के युद्धों के कारण नाटो की एकता पहले ही दबाव में है।

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First Published - January 14, 2026 | 11:43 AM IST

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