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कोयला खदानों का संचालन तेज करने के लिए समय-सीमा में होगा बदलाव! मंत्रालय ने रखा प्रस्ताव

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वाणिज्यिक और कैप्टिव खदानों के लिए माइलस्टोन-आधारित फ्रेमवर्क; आंशिक रूप से खोजी गई खदानों को 52 महीने, पूरी तरह खोजी गई को 40 महीने का लक्ष्य

Last Updated- February 20, 2026 | 9:34 AM IST
Representational Image

कोयला मंत्रालय ने कोयला खदानों के परिचालन को तेज करने के लिए वाणिज्यिक और कैप्टिव कोयला खनन समझौतों के तहत मौजूदा निर्धारित समय-सीमा में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। मंत्रालय ने एक नोटिस में कहा कि उसने कोयला खदान विकास और उत्पादन समझौते (सीएमडीपीए) और कोयला ब्लॉक विकास और उत्पादन समझौते (सीबीडीपीए) के तहत दक्षता मापदंडों में संशोधन का मसौदा तैयार किया है।

इस मसौदे में आवंटन से लेकर खदान खोलने तक एक स्ट्रक्चर्ड माइलस्टोन फ्रेमवर्क दिया गया है। इसमें पूरी तरह से खोजी गई खदानों के लिए कुल परिचालन समय-सीमा 40 महीने और आंशिक रूप से खोजी गई खदानों के लिए 52 महीने है, जिसके लिए भूवैज्ञानिक रिपोर्ट (जीआर) तैयार करने की आवश्यकता होती है।

प्रमुख माइलस्टोन में देरी प्रदर्शन सुरक्षा से जुड़ी होती है। प्रस्ताव के तहत आंशिक रूप से खोजी गई खदानों के लिए जीआर तैयार करने में देरी होने पर प्रदर्शन सुरक्षा का 50 प्रतिशत तक कमुलेटिव एप्रोप्रिएशन हो सकता है।

कोयला खनन में प्रदर्शन सुरक्षा एक वित्तीय गारंटी है। बोली हासिल करने वाले आमतौर पर एक बैंक गारंटी या फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद देते हैं, जो अनुबंध संबंधी दायित्वों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जमा की जाती है। इसमें खदान विकास और उत्पादन के लिए समय-सीमा भी शामिल है। यह प्रदर्शन न करने या देरी होने की स्थिति में सुरक्षा का काम करता है।

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First Published - February 20, 2026 | 9:34 AM IST

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