भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने बुधवार को बंबई उच्च न्यायालय से कहा कि वह ब्रिटेन से भारत वापसी के समय के बारे में निश्चित तौर पर कुछ नहीं कह सकते, क्योंकि वहां उनकी यात्रा पर प्रतिबंध लगा है। माल्या का यह बयान उस सुनवाई के दौरान आया जिसमें उन्होंने भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति अनखड़ के पीठ ने दोहराया कि यदि माल्या अपनी चुनौती पर निर्णय चाहता है तो उसे भारतीय न्यायालयों के समक्ष पेश होना ही होगा।
माल्या की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने एक बयान पढ़कर समझाया कि उनके मुवक्किल का पासपोर्ट 2016 में ही रद्द कर दिया गया था और ब्रिटेन की एक अदालत के आदेश के चलते वह उस इंगलैंड और वेल्स से बाहर नहीं जा सकते हैं। न ही वह अंतरराष्ट्रीय यात्रा संबंधी कोई दस्तावेज रख सकते हैं या उसके लिए आवेदन कर सकते हैं।
देसाई ने कहा, ‘उन्हें इंगलैंड और वेल्स से बाहर जाने या इसका प्रयास करने की अनुमति नहीं है। उन्हें किसी अंतरराष्ट्रीय यात्रा दस्तावेज के लिए आवेदन करने या उसे रखने की इजाजत भी नहीं है। किसी भी स्थिति में याची पक्के तौर पर यह नहीं बता सकता कि वह भारत कब लौटेगा।’
देसाई ने कहा, ‘यदि मैं (माल्या) भारत आता हूं, तो ये सारी कार्यवाहियां अप्रासंगिक हो जाएंगी। क्योंकि कानून की धारा में कहा गया है कि यदि आप देश में उपस्थित होते हैं, तो ये सभी आदेश निरस्त हो जाते हैं। यही कानून स्वयं कहता है। इसलिए यदि मैं संवैधानिक वैधता को चुनौती देता हूं तो फिर अपील या रिट दाखिल नहीं कर पाऊंगा।’
पीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह माल्या के बयान पर एक सप्ताह के भीतर जवाब दे। उसने मामले को मार्च 2026 के दूसरे सप्ताह के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार ने एक हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें माल्या पर कथित बकाया राशि और भारत में उसकी संपत्तियों की कुर्की व बिक्री के माध्यम से की गई वसूली का विवरण दिया गया है।
उन्होंने कहा कि माल्या 2 मार्च , 2016 से फरार हैं और 5 जनवरी, 2019 को उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया था। मेहता ने चिंता जताई कि वर्तमान कार्रवाई में दिए गए बयान प्रत्यर्पण कार्यवाही में उपयोग किए जा सकते हैं, जो इस समय अंतिम चरण में है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि वर्तमान रिट याचिका या संबंधित कार्यवाहियों में दिए गए बयान प्रत्यर्पण प्रक्रिया में उपयोग नहीं किए जा सकते।