India AI Impact Summit 2026: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तक असमान पहुंच से वैश्विक असमानताएं और बढ़ सकती हैं। गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) Sundar Pichai ने गुरुवार को कहा कि दुनिया को यह सुनिश्चित करना होगा कि डिजिटल डिवाइड आगे चलकर “AI डिवाइड” में न बदल जाए। इसके लिए कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी में निवेश जरूरी है।
उन्होंने इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में कहा, “हम डिजिटल डिवाइड को AI डिवाइड नहीं बनने दे सकते।” उन्होंने यह भी कहा कि जिम्मेदारी का मतलब यह भी है कि AI के कारण अर्थव्यवस्था में होने वाले बड़े बदलावों को संभाला जाए, क्योंकि AI कुछ कामों को ऑटोमेट करेगा और साथ ही बिल्कुल नए करियर भी बनाएगा।
Sundar Pichai ने घोषणा की कि गूगल विशाखापट्टनम में एक फुल-स्टैक AI हब स्थापित कर रहा है। यह भारत में कंपनी के 15 अरब डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश का हिस्सा होगा। यह हब पूरा होने के बाद गीगावॉट-स्केल कंप्यूट और एक नया अंतरराष्ट्रीय सबसी केबल गेटवे भी रखेगा।
पिचाई ने कहा कि दुनिया तकनीकी प्रगति के एक अहम मोड़ पर खड़ी है। उन्होंने कहा कि हम हाइपर प्रोग्रेस के दौर के करीब हैं, और ऐसी नई खोजों के करीब हैं जो उभरती अर्थव्यवस्थाओं को पुराने अंतराल (legacy gaps) तेजी से पाटने में मदद कर सकती हैं। लेकिन यह नतीजा न तो तय है और न ही अपने आप होगा।
उन्होंने आगे कहा कि उपयोगी AI बनाने के लिए हमें इसे साहस के साथ आगे बढ़ाना होगा, जिम्मेदारी से अपनाना होगा और इस निर्णायक समय में मिलकर काम करना होगा।
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AI के व्यापक असर पर बात करते हुए पिचाई ने कहा कि AI अरबों लोगों की जिंदगी बेहतर कर सकता है और कुछ सबसे कठिन समस्याओं को हल कर सकता है। उन्होंने दुनिया भर में तकनीक तक पहुंच के अंतर को कम करने की जरूरत पर जोर दिया और कई उदाहरण दिए।
उन्होंने कहा कि एल साल्वाडोर में गूगल ने सरकार के साथ साझेदारी की है ताकि हजारों लोगों को कम कीमत पर AI आधारित जांच और इलाज मिल सके, जो सामान्य तौर पर इलाज का खर्च नहीं उठा सकते।
Sundar Pichai ने कहा, भारत में, जहां हमारा काम किसानों को मानसून के असर के बीच अपनी आजीविका बचाने में मदद कर रहा है। पिछले साल भारतीय सरकार ने पहली बार गूगल के Neural GCM मॉडल की मदद से लाखों किसानों को AI आधारित मौसम पूर्वानुमान भेजे थे।
पिचाई ने कहा कि भाषा को शामिल करना (language inclusion) अभी भी एक बड़ी प्राथमिकता है। घाना में गूगल विश्वविद्यालयों और NGOs के साथ मिलकर 20 से अधिक अफ्रीकी भाषाओं में रिसर्च और ओपन-सोर्स टूल्स बढ़ाने पर काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि हमें ऐसी ही साहसी सोच और ज्यादा जगहों पर चाहिए ताकि स्वास्थ्य, शिक्षा, आर्थिक अवसर और अन्य क्षेत्रों में और ज्यादा समस्याओं का समाधान किया जा सके। तकनीक बहुत बड़े फायदे देती है, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी को इसकी पहुंच मिले।
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Sundar Pichai ने कहा कि AI अपनाने के लिए भरोसा सबसे जरूरी होगा। उन्होंने SynthID जैसे टूल्स का जिक्र किया, जो पत्रकारों और फैक्ट-चेकर्स को डिजिटल कंटेंट की असलियत जांचने में मदद करते हैं। AI की पूरी क्षमता हासिल करने के लिए सरकारों, नियामकों और उद्योग जगत के बीच सहयोग जरूरी है।
उन्होंने कहा कि चाहे हम कितने भी जिम्मेदार हों, अगर हम मिलकर काम नहीं करेंगे तो AI के पूरे फायदे हासिल नहीं कर पाएंगे। सरकारों की भूमिका अहम है, क्योंकि उन्हें नियम तय करने और जोखिमों को संभालने की जरूरत होगी। टेक कंपनियों को भी ऐसे उत्पाद बनाने होंगे जो ज्ञान, रचनात्मकता और उत्पादकता बढ़ाएं। साथ ही हर आकार के व्यवसायों को AI का उपयोग कर नवाचार करना होगा, क्षेत्रों को बदलना होगा और कामगारों को सशक्त बनाना होगा।
उन्होंने कहा कि हमारे पास एक ऐसा मौका है जिससे हम एक पीढ़ी में एक बार आने वाले स्तर पर लोगों की जिंदगी बेहतर कर सकते हैं। मुझे भरोसा है कि हमारे पास यह करने की क्षमता भी है और इच्छा भी।