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Govt Scheme: सड़क हादसे के बाद नहीं लगेगा एक भी रुपया! इस सरकारी योजना में मिलेगा 1.5 लाख तक फ्री इलाज

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Govt Scheme: सड़क हादसे के बाद अब सरकार 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराएगी, ताकि समय पर उपचार मिल सके।

Last Updated- February 18, 2026 | 4:11 PM IST
Accidental Insurance
Representative image

Govt Scheme: सड़क दुर्घटनाएं देश में हर साल हजारों जिंदगियां प्रभावित करती हैं। कई बार घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल न पहुंच पाने या पैसों की कमी के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने PM राहत सड़क दुर्घटना योजना को मंजूरी दी है। इस पहल का उद्देश्य साफ है, हादसे के तुरंत बाद पीड़ित को बिना किसी आर्थिक दबाव के इलाज मिल सके।

यह व्यवस्था सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की निगरानी में लागू की जा रही है और इसे पूरी तरह तकनीक आधारित बनाया गया है ताकि प्रक्रिया तेज और पारदर्शी रहे।

हादसे के तुरंत बाद क्या करना होगा

किसी भी सड़क दुर्घटना की स्थिति में सबसे पहले 112 नंबर पर कॉल करना जरूरी है। यह कॉल घायल व्यक्ति, उसके साथ मौजूद व्यक्ति या कोई भी राहगीर कर सकता है। कॉल के बाद:

  • नजदीकी अस्पताल की जानकारी साझा की जाती है

  • एंबुलेंस की व्यवस्था की जाती है

  • पुलिस और अस्पताल के बीच डिजिटल सिस्टम के जरिए समन्वय शुरू होता है

इससे इलाज में देरी की संभावना कम हो जाती है और घायल को तुरंत चिकित्सा सहायता मिलती है।

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इलाज की सीमा और अवधि

योजना के तहत पात्र व्यक्ति को अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। यह सुविधा दुर्घटना की तारीख से सात दिनों तक लागू रहेगी।

यह लाभ देश की किसी भी सड़क पर हुए हादसे में उपलब्ध है, चाहे वह राष्ट्रीय राजमार्ग हो, राज्य मार्ग हो या ग्रामीण सड़क। जरूरी है कि मामला वास्तविक सड़क दुर्घटना का हो और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दर्ज किया गया हो।

सत्यापन की प्रक्रिया

इलाज शुरू होने के साथ ही दुर्घटना का विवरण डिजिटल पोर्टल पर दर्ज किया जाता है। इसके बाद पुलिस द्वारा तय समय सीमा में जांच की जाती है।

  • सामान्य स्थिति में 24 घंटे के भीतर सत्यापन

  • गंभीर स्थिति में 48 घंटे के भीतर सत्यापन

इस प्रक्रिया से फर्जी मामलों को रोका जा सकेगा और वास्तविक पीड़ित को समय पर सहायता मिलेगी।

भुगतान की व्यवस्था कैसे होगी

इस योजना में मरीज को सीधे पैसे नहीं दिए जाते। अस्पताल को भुगतान मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड के माध्यम से किया जाता है।

  • यदि दुर्घटना करने वाला वाहन बीमित है तो राशि बीमा कंपनियों के माध्यम से

  • यदि वाहन बीमित नहीं है या मामला हिट एंड रन का है तो भुगतान सरकारी फंड से

राज्य की स्वास्थ्य एजेंसी स्वीकृत दावे का निपटान 10 दिनों के भीतर करेगी, जिससे अस्पतालों को आर्थिक बोझ न उठाना पड़े।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से पारदर्शिता

पूरी योजना को डिजिटल ढांचे पर तैयार किया गया है।

  • दुर्घटना की एंट्री eDAR सिस्टम में दर्ज होती है

  • अस्पताल इलाज और बिलिंग का रिकॉर्ड ऑनलाइन अपलोड करते हैं

  • पुलिस प्रमाणन और क्लेम प्रोसेसिंग भी ऑनलाइन होती है

इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है और समय की बचत होती है।

बीमा अनिवार्य नहीं

योजना का लाभ लेने के लिए घायल व्यक्ति के पास खुद का बीमा होना जरूरी नहीं है। चाहे वाहन बीमित हो या न हो, पात्र पीड़ित को निर्धारित सीमा तक इलाज की सुविधा मिलेगी।

PM राहत योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में अंतर

दोनों योजनाएं दुर्घटना से जुड़ी हैं, लेकिन इनका उद्देश्य अलग है।

PM राहत योजना

  • फोकस: तत्काल चिकित्सा सहायता

  • लाभ: 1.5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज

  • कोई प्रीमियम नहीं

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना

  • फोकस: दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता पर आर्थिक सहायता

  • वार्षिक प्रीमियम: 20 रुपये

  • मृत्यु पर 2 लाख रुपये

  • पूर्ण स्थायी दिव्यांगता पर 2 लाख रुपये

  • आंशिक स्थायी दिव्यांगता पर 1 लाख रुपये

यानी एक योजना इलाज सुनिश्चित करती है, जबकि दूसरी योजना बाद की आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है।

आम जनता के लिए बड़ी राहत

इस पहल से खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। राहगीर भी बिना झिझक मदद कर सकेंगे क्योंकि उपचार की जिम्मेदारी सरकारी तंत्र संभालेगा। अस्पतालों को भी अग्रिम राशि की प्रतीक्षा किए बिना इलाज शुरू करने में आसानी होगी।

सरकार की यह कोशिश सड़क हादसों में होने वाली अनावश्यक देरी को रोकने और अधिक से अधिक जिंदगियां बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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First Published - February 18, 2026 | 4:10 PM IST

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