फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बुधवार को कहा कि उनका देश वीजा और सोर्सिंग प्रक्रियाओं को सरल बनाएगा और अंग्रेजी में पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रमों का विस्तार करेगा ताकि 2030 तक फ्रांस में अध्ययन करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 30,000 के आंकड़े तक पहुंच जाए। वर्तमान में वार्षिक आधार पर 9000 से 10,000 छात्र फ्रांस में पढ़ते हैं। मैक्रों ने मंगलवार को मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इसके बाद बुधवार दोपहर वह मुंबई से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुंचे। यहां वह गुरुवार को एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लेंगे।
फ्रांस के राष्ट्रपति ने बुधवार शाम को स्वास्थ्य सेवा में एआई को समर्पित एक शोध केंद्र का शुभारंभ किया, जिसमें सोर्बोन्ने विश्वविद्यालय, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली और पेरिस ब्रेन इंस्टीट्यूट की साझेदारी है। भारत और फ्रांस ने एआई और डिजिटल स्वास्थ्य को इस क्षेत्र में अपने रणनीतिक सहयोग के मूल में रखा है।
एम्स में सभा को संबोधित करते हुए मैक्रों ने कहा कि फ्रांस में इस समय लगभग 9,000 से 10,000 भारतीय छात्र हर साल पढ़ने जाते हैं। हमने प्रधानमंत्री मोदी के साथ मिलकर इस संख्या को 2030 तक प्रति वर्ष 30,000 तक बढ़ाने का फैसला किया है।
उन्होंने यह भी कहा कि हम चाहते हैं कि और अधिक भारतीय छात्र फ्रांस जाएं और इसी तरह अधिक फ्रांसीसी छात्र भारत आएं। मैक्रों ने कहा, ‘इसके लिए हम प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित कर अधिक व्यावहारिक बनाएंगे, ताकि छात्रों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े।’
फ्रांस के राष्ट्रपति ने स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत-फ्रांसीसी सेंटर फॉर एआई का उद्घाटन किया। यह केंद्र डिजिटल स्वास्थ्य, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस, स्वास्थ्य के लिए मानव संसाधन और स्वास्थ्य डेटा के जिम्मेदारी से उपयोग जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में नवाचार को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेगा। यह केंद्र आईआईटी, दिल्ली और प्रमुख फ्रांसीसी संस्थानों से अकादमिक सहयोग भी लेगा, जिससे आर्टिफिशल इंटेलिजेंस, मस्तिष्क स्वास्थ्य और वैश्विक स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों में संबंधित विषयों में शोध को बढ़ावा मिलेगा।
दोनों देशों के बीच एआई सहयोग के बारे में मैक्रों ने कहा कि भारत और फ्रांस दोनों देश स्वयं के विश्वसनीय एआई प्रणाली बनाने के लिए आवश्यक कंप्यूटिंग क्षमता और प्रतिभा विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, क्योंकि हम केवल दूसरी जगह बनाई और प्रबंधित की जाने वाली टेक्नॉलजी पर निर्भर नहीं रह सकते।
मैक्रों और मोदी की मंगलवार शाम को हुई बैठक के बाद संयुक्त बयान में कहा गया कि अपने रक्षा सहयोग को गहरा करने के अलावा, फ्रांस यहां भारत में रेलवे और हाई स्पीड रेलवे के विकास पर सहयोग करने के लिए समझौता करेगा।
बयान में यह भी कहा गया है कि मैक्रों ने मोदी को इस वर्ष के जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है, जिसकी मेजबानी फ्रांस कर रहा है। उन्होंने भारत को शिखर सम्मेलन से पहले चर्चाओं और प्रारंभिक कार्य में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए आमंत्रित किया
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से इसी साल 11 और 12 मई को केन्या के नैरोबी में होने वाले ‘अफ्रीका फॉरवर्ड: इनोवेशन ऐंड ग्रोथ के लिए अफ्रीका और फ्रांस के बीच साझेदारी’ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भी अनुरोध किया। संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने फ्रांसीसी हवाई अड्डों के माध्यम से भारतीय नागरिकों की वीजा मुक्त आवाजाही की घोषणा का स्वागत किया। यह पायलट परियोजना छह महीने के लिए है और इसके बाद इसकी समीक्षा की जाएगी।
दोनों पक्षों ने कौशल विकास, व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्रों में अधिक सहयोग के लिए एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए। इस कदम से युवाओं और पेशेवरों के लिए अवसरों के और द्वार खुलेंगे।
संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं का मानना है कि भारत-फ्रांस की साझेदारी वैश्विक कल्याण के लिए ताकत के रूप में कार्य करे, ताकि इससे न केवल उनकी अर्थव्यवस्थाओं में समृद्धि और लचीलापन लाने में मदद मिले बल्कि अनिश्चित वैश्विक वातावरण में चुनौतियों का समाधान करने में आसानी हो।’ सिविल परमाणु सहयोग पर भारत और फ्रांस ने 2025 में छोटे और उन्नत मॉड्यूलर रिएक्टरों पर सहयोग स्थापित करने के लिए आशय की घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे।