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AI से बदलेगा IT सेक्टर का खेल? Tata MF को सर्विस-ड्रिवन ग्रोथ की उम्मीद, निवेशकों के लिए अहम संकेत

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आईटी शेयर इस समय काफी उतार-चढ़ाव में हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि एआई उद्योग को तेजी से बदल रहा है

Last Updated- February 19, 2026 | 5:22 PM IST
AI Impact on IT Companies (1)
Photo: FreePik

AI impact on IT services: भारत का आईटी सर्विस सेक्टर अब वैल्यू क्रिएशन के अगले चरण में प्रवेश कर सकता है। टाटा म्युचुअल फंड की फरवरी 2026 की रिपोर्ट “थ्रू द लेंस: एआई इम्पैक्ट ऑन आईटी सर्विसेज” में यह बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, अब तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में सारा फायदा हार्डवेयर कंपनियों को हो रहा था। इसमें GPU और एआई चिप बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं। भारत इस चरण में बड़ी हिस्सेदारी नहीं ले पाया। हालांकि, अब एआई खर्च का फोकस सेवाओं की ओर बढ़ रहा है। रिपोर्ट का कहना है कि इस नई सर्विस-ड्रिवन एआई लहर में भारत बेहतर स्थिति में है और इसका लाभ उठा सकता है।

हार्डवेयर से सर्विसेज की ओर शिफ्ट

भारत में एआई अपनाने की प्रक्रिया फिलहाल सीखने और एकीकरण (इंटीग्रेशन) के चरण में है। कंपनियां नए उपयोग मामलों का ट्रायल कर रही हैं, वर्कफ्लो को दोबारा डिजाइन कर रही हैं और एआई को स्केल करने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, इससे सीधी कमाई अभी सीमित है। यह चरण भारत जैसे सेवा-आधारित इकोसिस्टम के लिए अनुकूल है, जहां आईटी सेवा कंपनियां और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) एंटरप्राइज एआई तैनाती के प्रमुख प्लेटफॉर्म बन रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एआई केवल नया टूल नहीं है, बल्कि यह कंपनियों के काम करने और निर्णय लेने के तरीके को बदलने वाली तकनीक है।

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AI कैसे IT सर्विस सेक्टर की मदद करेगा

लेगेसी सिस्टम्स का आधुनिकीकरण जरूरी: रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़ी कंपनियां अपने आईटी बजट का 60 से 80 फीसदी हिस्सा अलग-थलग पड़े पुराने (लेगेसी) सिस्टम्स के रखरखाव पर ही खर्च कर देती हैं। अब एआई तेज और ज्यादा किफायती आधुनिक टूल्स उपलब्ध करा रहा है। इससे कंपनियों के पास रखरखाव पर होने वाले खर्च को घटाकर उसे इनोवेशन की ओर मोड़ने का अनोखा अवसर है। यह बदलाव आईटी सेवा कंपनियों के लिए बड़ा अवसर है, जिससे वे ग्राहकों को नई वैल्यू दिलाने और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को गति देने में मदद कर सकती हैं।

‘बाय’ से ‘बिल्ड’ की ओर बदलाव और एजेंटिक इंटरफेस: कंपनियां अब तैयार SaaS प्रोडक्ट खरीदने के बजाय अपने खुद के एप्लिकेशन डेवलप करना ज्यादा प्रभावी समझेंगी, क्योंकि एआई विकास प्रक्रिया को तेज और आसान बना रहा है। साथ ही, कंपनियां “एजेंटिक इंटरफेस” अपना रही हैं। यह एआई की ऐसी परत (लेयर) होती है जो जटिल सिस्टम्स को सरल बनाती है और यूजर्स को सहज अनुभव प्रदान करती है। आईटी सर्विस कंपनियां अपने डोमेन ज्ञान के दम पर इन समाधानों को एंटरप्राइज स्तर पर जरूरी सटीकता और अनुपालन (कंप्लायंस) के साथ लागू कर सकती हैं।

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चुनौतियां भी कम नहीं

डिप्लॉयमेंट गैप और एग्जीक्यूशन रिस्क: रिपोर्ट के अनुसार, तकनीक बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। लेकिन कंपनियां उसे उतनी तेजी से अपना नहीं पा रही हैं। इससे डिप्लॉयमेंट गैप पैदा हो रहा है। संगठनों के भीतर अलग-अलग विभाग अलग-अलग काम करते हैं। सिस्टम्स के बीच छिपी हुई निर्भरता भी एक बड़ी समस्या है। बड़े स्तर पर बदलाव लागू करना आसान नहीं होता।

रिपोर्ट में कहा गया कि आईटी सर्विस कंपनियों के लिए समस्या मांग की कमी नहीं है। असल चुनौती काम को सही तरीके से और समय पर लागू करना है। उन्हें कर्मचारियों को नई स्किल्स सिखानी होंगी। उन्हें अपनी डिलीवरी क्षमता भी बढ़ानी होगी। साथ ही, तेजी से काम करना होगा। अगर मौजूदा सेवाओं की कीमतों पर दबाव पहले आ गया, तो इससे उनकी ग्रोथ धीमी हो सकती है।

ग्रीनफील्ड बनाम ब्राउनफील्ड आधुनिकीकरण: एआई नए कोड बनाने में बहुत प्रभावी है। इसे ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट कहा जाता है। लेकिन असली वैल्यू पुराने और जटिल सिस्टम्स को आधुनिक बनाने में है। इसे ब्राउनफील्ड कहा जाता है। पुराने लेगेसी सिस्टम्स में कई छिपी हुई जटिलताएं होती हैं। अक्सर उनकी पूरी जानकारी दस्तावेजों में दर्ज नहीं होती। सिस्टम्स के बीच कई अनजानी निर्भरताएं भी होती हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जो आईटी सेवा प्रदाता एआई की मदद से इन जटिलताओं को सुलझा सकते हैं और सिस्टम्स को अपग्रेड कर सकते हैं, वे इस तकनीकी चुनौती को अपने लिए प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त में बदल सकते हैं।

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निवेशकों को क्या करना चाहिए?

आईटी शेयर इस समय काफी उतार-चढ़ाव में हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि एआई उद्योग को तेजी से बदल रहा है। टाटा म्युचुअल फंड ने कहा कि आईटी सेवाओं में हालिया बिकवाली से लगता है कि निवेशक पुराने बिजनेस मॉडल के कमजोर पड़ने को पहले ही कीमतों में शामिल कर रहे हैं, जबकि नए मॉडल के फायदे अभी सामने नहीं आए हैं। आईटी कंपनियों पर एआई से होने वाला असर अचानक नहीं, बल्कि धीरे-धीरे दिखाई देगा। एआई ट्रांजिशन से नई कमाई के स्रोत बनने में समय लगेगा, जैसा डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के दौर में हुआ था।

यह बदलाव कुछ समय के लिए कठिन हो सकता है। हालांकि मजबूत फ्री कैश फ्लो और अच्छे डिविडेंड यील्ड शेयर कीमतों को सहारा दे सकते हैं। फिलहाल बाजार को उम्मीद थी कि दो साल की धीमी वृद्धि के बाद 2026 में ग्रोथ में सुधार होगा। लेकिन अब यह सुधार देर से आ सकता है या अपेक्षा से धीमा रह सकता है। अच्छी बात यह है कि मौजूदा वैल्यूएशन में इस जोखिम को काफी हद तक शामिल कर लिया गया है।

कमाई और वैल्यूएशन अभी भी संतुलित

रिपोर्ट बताती है कि पिछले छह महीनों में निफ्टी आईटी कंपनियों की आय (अर्निंग्स) के अनुमान स्थिर से लेकर हल्के पॉजिटव रहे हैं। वहीं व्यापक बाजार में कमाई के अनुमानों में लगातार कटौती देखी गई है। इससे संकेत मिलता है कि आईटी सेक्टर की कमाई शायद निचले स्तर पर पहुंचकर स्थिर हो चुकी है। यही वजह है कि व्यापक बाजार की तुलना में यह सेक्टर अपेक्षाकृत ज्यादा मजबूत स्थिति में दिख रहा है।

तुलनात्मक आधार पर निफ्टी आईटी का वैल्यूएशन अपने लॉन्ग टर्म एवरेज से थोड़ा ऊपर है। कमाई के अनुमानों में स्थिरता आने और वैल्यूएशन के अभी भी उचित दायरे में रहने से केवल वैल्यूएशन के कारण बड़ी गिरावट का जोखिम सीमित नजर आता है। मीडियम ग्रोथ और संतुलित वैल्यूएशन का यह मिक्स आईटी सेक्टर को कुछ हद तक सहारा प्रदान करता है।

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IT सेक्टर में धीरे-धीरे आएगा सुधार

आईटी सेक्टर में निकट अवधि में तेज उछाल की बजाय धीरे-धीरे सुधार देखने की उम्मीद है। कुछ योजनाओं में आईटी सेक्टर पर अंडरवेट रुख अपनाया गया है, जबकि बैंकिंग, कंज्यूमर, रिसोर्सेज एंड एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर अगले 6–12 महीनों में बेहतर स्थिति में दिखते हैं।

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First Published - February 19, 2026 | 5:22 PM IST

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