मेटा के चीफ एआई ऑफिसर अलेक्जेंडर वांग ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास के लिए भरोसा, डेटा और कंप्यूटिंग क्षमता बेहद जरूरी हैं। उन्होंने वैश्विक एआई इकोसिस्टम में भारत की बढ़ती भूमिका पर भी जोर दिया। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में बोलते हुए वांग ने कहा कि एआई के चार बुनियादी स्तंभ टैलेंट, एनर्जी, डाटा और कंप्यूट हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार और इंडस्ट्री को मिलकर काम करना चाहिए ताकि हर देश अपनी जरूरतों के मुताबिक एआई सिस्टम विकसित कर सके, न कि बाहरी प्राथमिकताओं पर निर्भर रहे। इसके लिए मजबूत नेशनल एआई स्ट्रैटेजी और लगातार ऐसी नीतियां जरूरी हैं जो इनोवेशन को बढ़ावा दें और बेवजह की नियमावली बाधाएं न पैदा करें। उन्होंने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग पर भी जोर दिया ताकि एआई सिस्टम लोगों के काम आएं और आर्थिक विकास में मदद करें।
वांग ने कहा कि मेटा उन चुनिंदा कंपनियों में है जिनके पास एआई रिसर्च को आगे बढ़ाने और बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए संसाधन और प्रतिभा है। उन्होंने कहा कि अगर आप ऐसी तकनीक बनाना चाहते हैं जो समाज की सेवा करे, तो मेटा के पास इसे लोगों तक पहुंचाने का बड़ा अवसर है। हर दिन 3.5 अरब लोग मेटा के किसी न किसी ऐप का उपयोग करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में भी मेटा के एआई टूल्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। जैसे- सोशल मीडिया रील्स का अपने-आप अलग-अलग भाषाओं में अनुवाद और व्हाट्सऐप पर छोटे कारोबारियों के लिए एआई आधारित ग्राहक संवाद टूल।
वांग ने कहा कि भारत के डेवलपर्स सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए नए एआई समाधान बना रहे हैं। उन्होंने अशोका यूनिवर्सिटी का उदाहरण दिया, जहां वैज्ञानिकों ने मेटा के Sam 3 मॉडल की मदद से कैंसर ट्यूमर और जोखिम वाले अंगों की पहचान तेज की।
उन्होंने मेटा के ओम्नी-लिंगुअल मॉडल का भी जिक्र किया, जो 1,600 से अधिक भाषाओं में बोलचाल पहचान सकता है और कम ऑडियो नमूनों से नई भाषाओं को सीख सकता है। कुछ ही वर्षों में दुनिया की हर भाषा के लिए रियल-टाइम वॉइस-टू-वॉइस अनुवाद संभव हो सकता है।
वांग ने बताया कि मेटा भारत सरकार के साथ एआई कोच प्लेटफॉर्म के जरिए सहयोग कर रहा है। कंपनी ने 10 प्रमुख भारतीय भाषाओं के डाटा सेट उपलब्ध कराए हैं ताकि स्थानीय संदर्भ समझने वाले मॉडल बनाए जा सकें।
वांग ने कहा कि एआई विकास में सुरक्षा सबसे अहम है। हमारा एआई उसी तरह काम करे जैसा हम कहते हैं और पूरी तरह सुरक्षित हो- यह हमारी प्राथमिकता है। कंपनी मॉडल की जांच, परीक्षण ढांचे में सुधार और नए जोखिमों से निपटने के तरीकों पर लगातार काम कर रही है। इसमें जोखिम आकलन, विशेषज्ञ समीक्षा, रेड-टीमिंग और मॉडल जारी करने से पहले फाइन-ट्यूनिंग शामिल है। मेटा अपने ऐप्स पर उपयोग के रुझानों की निगरानी भी करता है ताकि संभावित जोखिमों की पहचान कर सिस्टम को और बेहतर बनाया जा सके।