कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अनुपालन निगरानी को मजबूत करने और रोजगार से जुड़ी योजनाओं के कार्यान्वयन को सुव्यवस्थित करने के लिए कई केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों के साथ अपने डेटाबेस को जोड़ सकता है। नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि ईपीएफओ इस समय 2024 और वित्त वर्ष 2025 के लिए गवर्नमेंट ई-मार्केट प्लेस (जेम) से मिले वन टाइम डेटा डंप की जांच कर रहा है।
नवंबर 2025 में ईपीएफओ ने वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन चलने वाले जेम के साथ एक समझौता किया था, जिससे सेवा प्रदाताओं द्वारा भविष्य निधि में किए जा रहे योगदान का मासिक सत्यापन सुनिश्चित हो सके।
जेम केंद्र का ऑनलाइन सार्वजनिक खरीद मंच है। इससे केंद्रीय मंत्रालय, राज्य सरकारें, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) और स्वायत्त निकाय ऑनलाइन वस्तुओं और सेवाओं की खरीद कर सकते हैं। आपूर्तिकर्ता सरकारी खरीदारों को बेचने के लिए मंच पर पंजीकरण करते हैं।
अधिकारी ने कहा कि श्रम और रोजगार मंत्रालय और राजस्व विभाग के बीच आधिकारिक पत्राचार के बाद जीएसटी विभाग भी सैद्धांतिक रूप से प्रतिष्ठान का पंजीकरण डेटा साझा करने के लिए सहमत हो गया है। अधिकारी ने कहा कि आंकड़ों के आदान-प्रदान का उद्देश्य प्रधान मंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएमवीबीआरवाई) के अधिक प्रभावी कार्यान्वयन को सक्षम करना और ईपीएफओ के अनुपालन ढांचे को मजबूत करना है।
ईपीएफओ 99,446 करोड़ रुपये के बजट वाली पीएमवीबीआरवाई योजना का कार्यान्वयन कर रहा है। योजना के तहत लाभ के लिए आवेदन करने वाले प्रतिष्ठानों को उनका लाभ उठाने के लिए जीएसटीएन वस्तु एवं सेवा कर संख्या) प्रस्तुत करना आवश्यक है। खबर प्रकाशित होने के लिए जाने तक ईपीएफओ को भेजे गए ई-मेल का कोई जवाब नहीं मिला था।
ईपीएफओ अनुपालन जांच को व्यापक बनाने के लिए राज्य सरकारों के साथ आंकड़ों को जोड़ने पर भी विस्तार कर रहा है। इसका पेरोल डेटा नियमित रूप से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान की सरकारों के साथ साझा किया जाता है। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के साथ डेटा साझा करने की प्रक्रिया भी अपने उन्नत चरणों में है, जबकि अन्य राज्यों से आगे की जानकारी का इंतजार है।