facebookmetapixel
Advertisement
अगर युद्ध एक महीने और जारी रहा तो दुनिया में खाद्य संकट संभव: मैट सिम्पसनहोर्मुज स्ट्रेट खुला लेकिन समुद्री बीमा प्रीमियम महंगा, शिपिंग लागत और जोखिम बढ़ेपश्चिम एशिया युद्ध का भारत पर गहरा असर, रियल्टी और बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव मेंगर्मी का सीजन शुरू: ट्रैवल और होटल कंपनियों के ऑफर की बाढ़, यात्रियों को मिल रही भारी छूटबाजार में उतार-चढ़ाव से बदला फंडरेजिंग ट्रेंड, राइट्स इश्यू रिकॉर्ड स्तर पर, QIP में भारी गिरावटपश्चिम एशिया संकट: MSME को कर्ज भुगतान में राहत पर विचार, RBI से मॉरेटोरियम की मांग तेजRCB की बिक्री से शेयरहोल्डर्स की बल्ले-बल्ले! USL दे सकती है ₹196 तक का स्पेशल डिविडेंडतेल में बढ़त से शेयर और बॉन्ड में गिरावट; ईरान का अमेरिका के साथ बातचीत से इनकारगोल्डमैन सैक्स ने देसी शेयरों को किया डाउनग्रेड, निफ्टी का टारगेट भी घटायाकिधर जाएगा निफ्टीः 19,900 या 27,500; तेल और भू-राजनीति तनाव से तय होगा रुख

केकेआर को देसी बाजार में बदलाव की उम्मीद

Advertisement

भारतीय बाजारों के लिए एक मुख्य अल्पावधि दिक्कत जेनरेटिव एआई और ऑटोमेशन को तेजी से अपनाना है।

Last Updated- February 20, 2026 | 9:27 AM IST
Stock Market today

निजी इक्विटी फर्म केकेआर का मानना है कि भारत के इक्विटी और निजी बाजारों में बड़ा बदलाव आ सकता है, भले ही एआई, आय वृद्धि और मौद्रिक उतार-चढ़ाव से जुड़ी चिंताओं के बीच जमीनी स्तर पर निवेशक धारणा सतर्क है।

‘थॉट्स फ्रॉम द रोड’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में मुख्य निवेश अधिकारी हेनरी मैकवे ने कहा है कि वैश्विक निवेशक कई वर्षों में भारतीय इक्विटी में सबसे कम अंडरवेट रहे हैं, जबकि अमेरिकी परिसंपत्तियों को लेकर वे ओवरवेट बने हुए हैं। मैकवे ने कहा, ‘जो दीर्घावधि निवेशक कम समय के उतार-चढ़ाव को देखना चाहते हैं, उनके लिए यह इन्फ्लेक्शन पॉइंट यानी बदलाव का समय और भी ज्यादा अहम साबित हो सकता है।’ उन्होंने कहा, ‘भारत की चुनौतियां निश्चित तौर पर वास्तविक हैं, लेकिन इनके फायदे भी उतने ही हैं।’

भारतीय इक्विटी ने 1998 के बाद से 2025 में अपना सबसे कमजोर प्रदर्शन किया है। यह बाजार मुद्रा की कमजोरी, धीमी आय वृद्धि और इस डर से दुबला हो रहा था कि एआई देश के आईटी सेवा मॉडल को बिगाड़ सकता है।

हाल में केकेआर के सह-संस्थापक हेनरी क्रैविस के साथ भारत आए मैकवे ने कहा, ‘मुंबई और दिल्ली में धारणा पिछली यात्रा की तुलना में साफ तौर पर ज्यादा शांत है। लेकिन लंबे समय का बैकग्राउंड बेहतर होता जा रहा है।’

भारतीय बाजारों के लिए एक मुख्य अल्पावधि दिक्कत जेनरेटिव एआई और ऑटोमेशन को तेजी से अपनाना है। इस कारण निवेशकों को डर है कि यह श्रम-केंद्रित आईटी आउटसोर्सिंग सेक्टर को कमजोर कर सकता है, जो लंबे समय से भारत के निर्यात और इक्विटी बाजारों का महत्त्वपूर्ण स्तम्भ रहा है।

मैकवे ने बताया कि वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में भारत की शीर्ष पांच आईटी फर्मों ने शुद्ध रूप से सिर्फ 17 कर्मचारी जोड़े। यह एक साल पहले इसी समय में जोड़े गए लगभग 18,000 कर्मचारियों की संख्या के मुकाबले बहुत कम है। फर्म ने कहा कि इससे पता चलता है कि एआई-आधारित डिलिवरी मॉडलों की वजह से अनुमान से ज्यादा तेजी से बदलाव हो रहा है, जिसमें राजस्व वृद्धि और हायरिंग का तालमेल गड़बड़ा रहा है।

भारतीय शेयर बाजारों ने 2025 में वैश्विक प्रतिस्पर्धियों से कमजोर प्रदर्शन किया, जबकि विदेशी प्रत्यक्ष निवेश 2020 के अपने लगभग 60 अरब डॉलर के ऊंचे स्तर से आगे निकल गया है। मैकवे ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राजकोषीय प्रोत्साहन, मौद्रिक नरमी और घरेलू बचतकर्ताओं की बढ़ती हिस्सेदारी से भारतीय शेयर बाजार मजबूत हो जाएंगे और 2026 की दूसरी छमाही में संभवतः रिकवरी दर्ज करेंगे।

Advertisement
First Published - February 20, 2026 | 9:27 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement