उत्तर प्रदेश में जल्दी ही 500 करोड़ रूपये के निवेश से खाद्य प्रसंस्करण की 22 नई परियोजनाओं पर काम शुरू होगी। उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के तहत गठित राज्य स्तरीय इम्पावर्ड समिति (एसएलईसी) ने अपनी बैठक में 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी है। नीति के तहत इन प्रस्तावों के द्वारा स्थापित होने वाली इकाइयों को राज्य सरकार की ओर से कुल 55 करोड़ रूपये अनुदान मिलेगा।
खाद्य एवं प्रसंस्करण विभाग के अधिकारियों ने बताया की नीति के अब तक एसएलईसी ने 460 परियोजनाओं को स्वीकृति दी है। इनमें बरेली जिला कुल स्वीकृत 33 परियोजनाओं के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर, वहीं कानपुर नगर 24 परियोजनाओं के साथ दूसरे जबकि 22 परियोजनाओं के साथ आगरा एवं रामपुर तीसरे स्थान पर है।
बुधवार को राज्य स्तरीय इम्पावर्ड समिति की बैठक में पेश किए गए 22 प्रस्तावों में कानपुर के 3, कुशीनगर, सुल्तानपुर, नोयडा, कौशांबी, वाराणसी, शामली, गोरखपुर, मुरादाबाद, सीतापुर, एटा से एक-एक जबकि बाराबंकी व अमेठी के दो-दो प्रस्ताव शामिल थे। बैठक मे बताया गया कि विगत वर्ष के अंत तक कुल 127 इकाईयों की सब्सिडी के सापेक्ष वर्तमान वित्तीय वर्ष में 311 इकाइयों को सब्सिडी दी गई जो कि 144.88 फीसदी अधिक है। बीते साल जहां 13 करोड़ रूपये सब्सिडी के मद में खर्च हुए थे वहीं इस साल यह 111.67 करोड़ रूपये रहा है।
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प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के मंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बताया कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग तेजी से एक प्रमुख औद्योगिक हब के रूप में विकसित हो रहा है। यूपी की खाद्य प्रसंस्करण नीति से निवेश, रोजगार और निर्यात को नई रफ्तार मिल रही है।
बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार ने कहा कि अमेठी एवं सुलतानपुर पशु एवं कुक्कुट चारा उत्पादन एवं बरेली, रामपुर, सहारपुर एवं पीलीभीत फ्रोजेन फल एवं सब्जियों तथा मशरूम उत्पादन के हब के रूप में विकसित हो रहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि संबन्धित विभागों एवं उद्यमियों के साथ पाक्षिक वर्चुवल मीटिंग की जाय एवं प्रकरणों के निस्तारण की कार्यवाही में तेजी लायी जाय।