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यूरोपियन यूनियन के साथ मुक्त व्यापार समझौते के बाद उत्तर प्रदेश की योगी सरकार विदेशों में स्कॉच व उम्दा व्हिस्की के निर्यात की संभावनाओं पर काम कर रही है। उत्तर प्रदेश अपनी पृथक आबकारी निर्यात नीति लाने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
प्रदेश के आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने आबकारी विभाग के अधिकारियों व सभी हितधारकों से विचार-विमर्श के बाद यह निर्यात नीति तैयार की है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश तीन वित्तीय वर्षों के लिए पृथक आबकारी निर्यात नीति लाने वाला देश का पहला राज्य है। इस नीति का उद्देश्य स्थानीय कृषि से जुड़े अनाज एवं फल आधारित निर्यात के लिए एथेनॉल व अन्य संबंधित उत्पादों के उत्पादन में वृद्धि करना व साथ ही शराब निर्यात के लिए औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करना है। आबकारी मंत्री के मुताबिक नीति से प्रदेश से निर्यात होने वाली मदिरा की तादाद में वृद्ध के साथ ही अंतरर्राष्ट्रीय बाजारों में उत्तर प्रदेश की स्थिति मजबूत होगी और विदेशी मुद्रा कोष बढ़ेगा।
उत्तर प्रदेश की आबकारी निर्यात नीति में निर्धारित पेय क्षमता के 25 फीसदी तक किए जाने वाले निर्यात के लिए बोतल भराई शुल्क, निर्यात पास फीस, फ्रैंचाइज फीस व स्पेशल फीस की दरों को न्यूनतम स्तर तक कम कर दिया गया है। निर्यात किए जाने वाले मदिरा के ब्रांडों के ब्रांड पंजीकरण व लेबल अनुमोदन के प्रावधानों को शिथिल कर दिया गया है और फीस की दरों को न्यूनतम कर दिया गया है। नीति में शीरा आधारित ईएनए के देश के अन्य राज्यों को निर्यात किए जाने पर लगने वाली निर्यात फीस में 0.50 रूपये प्रति बल्क लीटर की कमी कर दी गयी है। नीति में हेरिटेज मदिरा के निर्माण, टेस्टिंग टैवर्न व फुटकर बिक्री की अनुमति डिस्टिलरीज को दी गयी है।
आबकारी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि निर्यात नीति आने के बाद जल्दी ही प्रदेश में निवेशकों का सम्मेलन कराया जाएगा। इस सम्मेलन में आबकारी उद्योग से जुड़ी बड़ी-छोटी कंपनियों के प्रबंधन को बुलाकर नीति के फायदे व इसके तहत दी जाने वाली रियायतों के बारे में बताया जाएगा।
गौरतलब है कि बीते कुछ सालों में उत्तर प्रदेश को मिलने वाले आबकारी राजस्व में अप्रत्याशित उछाल देखने को मिला है। आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल का कहना है प्रवर्तन की कार्रवाई को तेज कर, शुल्क को सुसंगत कर और ग्राहक व निर्माता दोनो के अनुकूल नीतियां लागू करने का सीधा असर राजस्व पर पड़ा है। वित्त वर्ष 2026-27 के यूपी सरकार के बजट में 71278 करोड़ रूपये आबकारी राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा गया है जो पिछले साल से करीब 8000 करोड़ रूपये अधिक है। अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश से विदेशी मदिरा का निर्यात बढ़ने के बाद राजस्व में और वृद्धि होगी।
आबकारी क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशों में सिंगल माल्ट स्कॉच की मांग सबसे अधिक है। प्रदेश में रेडिको खेतान व मोहन मीकिंस इसका उत्पादन व निर्यात करते हैं। हाल के दिनों में मोदी इल्वा, इंडो स्प्रिट व ग्लोबस स्प्रिट ने भी प्रदेश में अपने संयंत्र लगाए हैं और इनमें भी सिंगल माल्ट स्कॉच का उत्पादन होगा।