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देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो (IndiGo) ने हाल ही में हुए फ्लाइट संकट के बाद बड़े पैमाने पर पायलटों की नियुक्ति का निर्णय लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एयरलाइन 1,000 से अधिक पायलटों को नियुक्त करने की योजना बना रही है। इसे भारतीय विमानन क्षेत्र में हाल के वर्षों की सबसे बड़ी भर्ती प्रक्रिया माना जा रहा है।
दिसंबर 2025 में इंडिगो को गंभीर परिचालन संकट का सामना करना पड़ा था। एक सप्ताह के भीतर कंपनी को 5,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं। इस स्थिति के पीछे मुख्य कारण पायलटों की कमी और नए ड्यूटी नियमों का लागू होना था।
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए ने पायलटों के लिए संशोधित ड्यूटी और विश्राम नियम लागू किए थे। इन नियमों के तहत आधी रात से सुबह 6 बजे के बीच पायलटों द्वारा की जाने वाली लैंडिंग की संख्या सीमित कर दी गई और साप्ताहिक विश्राम अवधि बढ़ा दी गई। नए प्रावधानों के कारण एयरलाइन के मौजूदा शेड्यूल पर दबाव बढ़ गया।
नियामक संस्था की जांच में यह पाया गया कि इंडिगो ने नए नियमों के अनुरूप समय रहते पर्याप्त संख्या में पायलटों की भर्ती और प्रशिक्षण नहीं किया था। इससे उपलब्ध पायलटों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा। कई मामलों में पायलटों को बार बार पुनर्नियोजित किया गया, उनकी ड्यूटी अवधि लंबी रही और उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर यात्री के रूप में भेजा गया ताकि वे वहां से उड़ान संचालित कर सकें।
जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि एयरलाइन ने अपने संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर ज्यादा जोर दिया। रोस्टर इस तरह तैयार किए गए कि ड्यूटी समय का पूरा इस्तेमाल हो सके, जिससे आपात स्थिति के लिए पर्याप्त बैकअप नहीं बचा। इससे परिचालन लचीलापन कमजोर हुआ और संकट की स्थिति में सिस्टम संभल नहीं पाया।
रिपोर्ट के अनुसार कंपनी को अपने निर्धारित संचालन के लिए 2,422 कप्तानों की आवश्यकता थी, जबकि उस समय उसके पास 2,357 कप्तान ही उपलब्ध थे। हालांकि संकट के बाद डीजीसीए ने 10 फरवरी तक नाइट ड्यूटी से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी राहत दी, ताकि तत्काल परिचालन दबाव कम किया जा सके।
इंडिगो ने अपनी वेबसाइट पर जारी सूचनाओं में बताया है कि भर्ती प्रक्रिया में ट्रेनी फर्स्ट ऑफिसर, सीनियर फर्स्ट ऑफिसर और कप्तान शामिल होंगे। खास बात यह है कि कंपनी एयरबस ए320 विमान पर पूर्व अनुभव न रखने वाले पायलटों को भी अवसर देने के लिए तैयार है। ए320 इंडिगो के बेड़े का प्रमुख विमान है।
ट्रेनी फर्स्ट ऑफिसर को पूरी तरह से परिचालन में शामिल होने से पहले लगभग छह महीने का प्रशिक्षण लेना होता है। कंपनी हर महीने करीब 20 से 25 फर्स्ट ऑफिसरों को प्रशिक्षण के माध्यम से कप्तान के पद पर पदोन्नत करती है। सामान्य रूप से कप्तान बनने के लिए कम से कम 1,500 घंटे का उड़ान अनुभव जरूरी होता है, हालांकि एयरलाइन अपनी आंतरिक नीतियों के तहत अधिक अनुभव की शर्त भी रख सकती है।
इंडिगो हर महीने औसतन चार नए विमान अपने बेड़े में शामिल कर रही है। विमान संख्या बढ़ने के साथ पायलटों की जरूरत भी तेजी से बढ़ रही है। डीजीसीए के नियमों के अनुसार प्रत्येक विमान के लिए तीन सेट पायलट आवश्यक होते हैं, जिनमें प्रत्येक सेट में एक कप्तान और एक फर्स्ट ऑफिसर शामिल होता है। लेकिन इंडिगो के विमानों का उपयोग स्तर काफी अधिक है, इसलिए उसकी वास्तविक जरूरत न्यूनतम मानक से कहीं ज्यादा होती है।
सिर्फ भर्ती ही नहीं, एयरलाइन अपने नेटवर्क और शेड्यूल में भी बदलाव कर रही है। दिसंबर में जहां शेड्यूल में लगभग कोई बफर नहीं था, वहीं फरवरी में इसे बढ़ाकर करीब 3 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अलावा स्टैंडबाय क्रू की संख्या भी बढ़ाई गई है, जो अब न्यूनतम 15 प्रतिशत तक रखी जा रही है। इससे अचानक होने वाली अनुपस्थिति या आपात स्थिति में उड़ानों को रद्द करने की नौबत कम आएगी।
एयरलाइन का लक्ष्य है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने। इसके लिए वह भर्ती, प्रशिक्षण और शेड्यूल प्रबंधन तीनों स्तरों पर सुधार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इंडिगो अपनी मानव संसाधन योजना को विमान विस्तार योजना के साथ संतुलित रखती है, तो आने वाले समय में परिचालन स्थिरता मजबूत होगी और यात्रियों का भरोसा भी कायम रहेगा।