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भारत की अर्थव्यवस्था में शहरी क्षेत्रों की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। डेटा और एनालिटिक्स कंपनी डन एंड ब्रैडस्ट्रीट की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 तक देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद में शहरी भारत की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। यह आंकड़ा 1990 के दशक में करीब 45 प्रतिशत था, जिससे स्पष्ट है कि पिछले तीन दशकों में शहरी अर्थव्यवस्था ने तेज रफ्तार से विस्तार किया है।
कंपनी की ‘सिटी वाइटैलिटी इंडेक्स’ (CVI) रिपोर्ट, जो वर्ष 2026 की पहली तिमाही पर आधारित है, बताती है कि भारत तेजी से शहरीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अनुमान है कि वर्ष 2036 तक देश की शहरी आबादी करीब 60 करोड़ तक पहुंच जाएगी। यह उस समय देश की कुल आबादी का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा होगी। तुलना करें तो वर्ष 2011 में शहरी आबादी का हिस्सा लगभग 31 प्रतिशत था। इस बदलाव से स्पष्ट है कि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर बुनियादी ढांचे की तलाश में बड़ी संख्या में लोग शहरों की ओर रुख कर रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आने वाले वर्षों में शहरीकरण की रफ्तार और तेज हो सकती है। देश में शहरी स्थानीय निकायों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2016 में जहां इनकी संख्या 4,567 थी, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 4,958 हो गई। आठ वर्षों में करीब 8.5 प्रतिशत की यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि प्रशासनिक ढांचा भी तेजी से फैलते शहरी दायरे के अनुरूप विकसित हो रहा है।
एक महत्वपूर्ण रुझान के रूप में रिपोर्ट में कहा गया है कि क्लास वाई यानी टियर 2 और टियर 3 शहर अब निवेश और औद्योगिक गतिविधियों के नए केंद्र बनकर उभर रहे हैं। ये शहर वैश्विक क्षमता केंद्र स्थापित करने के लिए प्रमुख विकल्प बन रहे हैं। इससे न केवल बड़े शहरों पर दबाव कम होगा, बल्कि छोटे और मध्यम शहरों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इससे क्षेत्रीय संतुलन को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बुनियादी ढांचे, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं, डिजिटल कनेक्टिविटी और शहरी प्रशासन में सुधार की गति बरकरार रहती है, तो शहरी अर्थव्यवस्था देश की विकास दर को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है। हालांकि इसके साथ आवास, यातायात, प्रदूषण और संसाधनों के प्रबंधन जैसी चुनौतियों का समाधान भी उतना ही जरूरी होगा।
केंद्र सरकार के बजट 2026-27 में शहर आधारित विकास को प्राथमिकता दिए जाने के बाद देश के कई बड़े और उभरते शहरों की आर्थिक रफ्तार पर नई चर्चा शुरू हो गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में घोषणा की है कि प्रत्येक सिटी इकोनॉमिक रीजन को अगले पांच वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जाएगी। यह राशि खास तौर पर टियर-2 और टियर-3 शहरों के साथ-साथ प्रमुख तीर्थ नगरों के विकास के लिए निर्धारित की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि महानगरों के साथ छोटे और मध्यम शहर भी आर्थिक गतिविधियों के मजबूत केंद्र बन सकें।
रिपोर्ट के अनुसार, देश के प्रमुख महानगरों में अहमदाबाद ने विकास दर के मामले में पहला स्थान हासिल किया है। इसके बाद बेंगलुरु और दिल्ली का नंबर आता है। यदि उद्यम पंजीकरण की बात करें तो पुणे सबसे आगे रहा। यहां करीब 6.20 लाख उद्यमों ने पंजीकरण कराया है, जो इसे कारोबारी गतिविधियों का बड़ा केंद्र बनाता है।
उद्यम पंजीकरण केंद्र सरकार की ऑनलाइन प्रणाली है, जिसके माध्यम से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को औपचारिक मान्यता दी जाती है। इससे कारोबारियों को सरकारी योजनाओं, वित्तीय सहायता और अन्य सुविधाओं का लाभ उठाने में आसानी होती है। अधिक पंजीकरण का अर्थ है कि शहर में उद्यमिता और व्यवसायिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।
रिपोर्ट में कुछ ऐसे शहरों की भी पहचान की गई है जो तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उत्तर 24 परगना को प्रमुख उभरते शहरों में पहला स्थान मिला है। इसके बाद ठाणे और जयपुर का नाम शामिल है। उभरते शहरों में उद्यम पंजीकरण के मामले में ठाणे सबसे आगे रहा, जहां करीब 4.30 लाख पंजीकरण दर्ज किए गए।
सिटी वाइटैलिटी इंडेक्स यानी सीवीआई देश के 100 गैर-महानगरीय शहरों को उनके आर्थिक आकार, विकास की गति और समग्र सक्रियता के आधार पर रैंकिंग देता है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि किसी शहर का आकार बड़ा है लेकिन विकास की रफ्तार धीमी है तो यह संकेत हो सकता है कि वह शहर आर्थिक रूप से संतृप्ति की ओर बढ़ रहा है। इसके विपरीत, जिन शहरों का आकार अपेाकृत छोटा है लेकिन विकास दर ऊंची है, वे भविष्य में बड़े आर्थिक केंद्र बन सकते हैं।
उदाहरण के तौर पर, पुणे जनसंख्या और भौगोलिक विस्तार के आधार पर आकार में पहले स्थान पर रहा, लेकिन विकास दर और समग्र रैंकिंग में वह पांचवें स्थान पर पहुंच गया। गैर-महानगरीय शहरों में उत्तर 24 परगना आकार में दूसरे स्थान पर है, लेकिन विकास रैंकिंग में 115वें स्थान पर रहा। इसी तरह ठाणे आकार में पहले स्थान पर होने के बावजूद विकास के मामले में काफी पीछे रहा और उसे 290वीं रैंक मिली।
दूसरी ओर अहमदाबाद आकार के मामले में चौथे स्थान पर रहा, लेकिन विकास की रफ्तार में शीर्ष पर पहुंच गया। उभरते शहरों में मुजफ्फरपुर का उदाहरण उल्लेखनीय है, जहां आकार के आधार पर 45वां स्थान होने के बावजूद विकास रैंकिंग में 24वां स्थान प्राप्त हुआ।