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Credit Card Tips: क्या सच में फ्री होती है No Cost EMI? शर्तें पढ़े बिना न करें खरीदारी

No-Cost EMI दिखने में आसान लगती है, लेकिन अक्सर कुल भुगतान बढ़ा देती है और अतिरिक्त शुल्क भी जोड़ देती है।

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- February 14, 2026 | 5:25 PM IST

डिजिटल दौर में खरीदारी का तरीका तेजी से बदला है। आज किसी भी ई कॉमर्स वेबसाइट पर महंगा मोबाइल, लैपटॉप या घरेलू उपकरण देखते ही एक आकर्षक मैसेज सामने आता है – “कम मासिक भुगतान में खरीदें, बिना अलग से ब्याज की सुविधा या फिर नो-कॉस्ट ईएमआई (No-Cost EMI)।” यह लाइन कई बार ग्राहक का फैसला तुरंत बदल देती है। छोटी किस्त देखकर लगता है कि खर्च बोझ नहीं बनेगा।

लेकिन क्या यह विकल्प सच में उतना ही आसान और सस्ता है, जितना दिखाया जाता है? आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

No-Cost EMI का मतलब क्या है?

No Cost EMI का सीधा अर्थ बताया जाता है कि ग्राहक को किस्तों में भुगतान करने पर अतिरिक्त ब्याज नहीं देना होगा। यानी किसी भी प्रॉडक्ट की कुल कीमत जितनी है, उतनी ही रकम किस्तों में चुकाई जाएगी।

पहली नजर में यह ऑफर बेहद आकर्षक लगता है। पर असल में कहानी यहीं खत्म नहीं होती। बैंक या वित्तीय संस्थान बिना किसी लाभ के EMI सुविधा नहीं देते। ऐसे में सवाल उठता है कि उनकी कमाई कैसे होती है?

असली गणित कहां छिपा है?

अक्सर फुल पेमेंट पर मिलने वाला सीधा डिस्काउंट EMI विकल्प चुनते ही कम हो जाता है। यही अंतर बैंक के ब्याज की भरपाई करता है।

दिखने में ग्राहक को लगता है कि वह बिना ब्याज के भुगतान कर रहा है, लेकिन वास्तविकता में प्रॉडक्ट की प्रभावी कीमत पहले ही बढ़ चुकी होती है। ब्याज सीधे EMI में नहीं जोड़ा जाता, बल्कि छूट कम करके उसकी भरपाई कर ली जाती है।

एक और उदाहरण से समझें

मान लीजिए आप 50,000 रुपये का कोई प्रोडक्ट खरीदना चाहते हैं। यदि आप एकमुश्त भुगतान करते हैं, तो कंपनी आपको 4,000 रुपये का सीधा डिस्काउंट देती है। इस तरह आपकी अंतिम कीमत 46,000 रुपये रह जाती है।

लेकिन जैसे ही आप No Cost EMI का विकल्प चुनते हैं, वही डिस्काउंट घटकर 1,500 रुपये रह जाता है। अब आपकी प्रभावी कीमत 48,500 रुपये हो जाती है।

यानी किस्तें भले ही आसान लगें, लेकिन आप 2,500 रुपये ज्यादा चुका रहे होते हैं, जो सीधे दिखाई नहीं देते।

छोटा मंथली अमाउंट देखकर दिमाग को बड़ा खर्च महसूस नहीं होता। हर महीने थोड़ी रकम देना आसान लगता है, इसलिए हम कुल भुगतान पर ध्यान नहीं देते।

यही कारण है कि कई बार EMI सुविधा सुविधाजनक तो होती है, लेकिन किफायती नहीं।

अतिरिक्त शुल्क जो नजर नहीं आते

No Cost EMI के साथ कुछ अन्य शुल्क भी जुड़े हो सकते हैं, जिन पर अक्सर ध्यान नहीं जाता।

  • प्रोसेसिंग फीस, जो कुछ सौ रुपये तक हो सकती है

  • ब्याज वाले हिस्से पर लागू 18 प्रतिशत GST

  • EMI कन्वर्जन चार्ज या अन्य सेवा शुल्क

ये सभी खर्च मिलकर कुल भुगतान बढ़ा सकते हैं।

खरीदारी से पहले क्या जांचें?

  1. फुल पेमेंट और EMI दोनों विकल्पों की कुल लागत की तुलना करें।

  2. नियम और शर्तों को ध्यान से पढ़ें।

  3. सभी अतिरिक्त शुल्क की जानकारी पहले लें।

  4. यदि संभव हो, तो डिस्काउंट के साथ एकमुश्त भुगतान पर विचार करें।

First Published : February 14, 2026 | 5:25 PM IST