कर्नाटक उच्च न्यायालय के साउथ इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन मामले में दिए गए फैसले से उन कारोबारियों को राहत मिलने की उम्मीद है जो जीएसटी रिफंड का इंतजार कर रहे हैं। यह राहत खासतौर पर खाद्य तेल, पेट्रोलियम वितरण, गैस सिलिंडर भरने और ज्यादा पैकेजिंग वाले एफएमसीजी कारोबारों को मिलेगी जिनमें इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) ज्यादा जमा होना सामान्य बात है क्योंकि पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली चीजों जैसे डिब्बे, सील, लेबल और अन्य सामान पर जीएसटी की दर ज्यादा होती है, जबकि तैयार उत्पाद पर जीएसटी कम लगता है।
कर विशेषज्ञों ने कहा कि इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि सिर्फ इस आधार पर रिफंड का दावा खारिज नहीं किया जा सकता कि कच्चा माल (इनपुट) और तैयार माल (आउटपुट) एक ही हैं। अक्सर कर विभाग इसी वजह से रिफंड देने से मना कर देता था, लेकिन अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि यह कारण रिफंड रोकने के लिए सही नहीं है।
12 दिसंबर 2025 के अपने आदेश में अदालत ने साउथ इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के खिलाफ जारी रिफंड खारिज करने के आदेशों को रद्द कर दिया और जीएसटी अधिकारियों को इस्तेमाल न किया हुआ आईटीसी का रिफंड देने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सीजीएसटी कानून की धारा 54(3)(ii) के तहत इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर (आईडीएस) का रिफंड केवल इसलिए नहीं रोका जा सकता क्योंकि कच्चे माल या इनपुट और तैयार उत्पाद या आउटपुट सामान एक जैसे हैं। इस फैसले का विस्तृत ब्योरा हाल ही में जारी किया गया।
डेलॉयट में अप्रत्यक्ष कर के पार्टनर हरप्रीत सिंह ने कहा कि यह फैसला महत्वपूर्ण है क्योंकि विभाग अक्सर इसी आधार पर रिफंड दावे खारिज करता रहा है। सिंह ने कहा, ‘अब करदाता इस फैसले का सहारा लेकर अपने आईडीएस रिफंड दावों का बचाव कर सकते हैं।’
याची थोक में सूरजमुखी, राइस ब्रान, कपास बीज और पाम ऑयल जैसे खाद्य तेल खरीदकर उन्हें 250 मिलीलीटर से 5 लीटर तक के छोटे पैक में बेचती है। पैक किए गए खाद्य तेल पर 5 फीसदी जीएसटी लगता है, जबकि पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री पर ज्यादा जीएसटी लगता है। इससे कंपनी के पास आईटीसी जमा होता रहा, जिसे आईडीएस वाली स्थिति बन गई।
जीएसटी कानून के अनुसार, जब इनपुट पर कर की दर आउटपुट से ज्यादा होती है और आईटीसी जमा हो जाता है तब आईडीएस रिफंड मिल सकता है। लेकिन कई मामलों में विभाग यह कहकर रिफंड खारिज कर देता था कि जब इनपुट और आउटपुट एक जैसे हों तो रिफंड नहीं मिलेगा।
अदालत ने यह भी कहा कि वर्ष 2020 में जारी सीबीआईसी परिपत्र में यह स्पष्टीकरण दिया गया था कि अगर इनपुट और आउटपुट एक जैसे हों तब रिफंड नहीं मिलेगा। हालांकि, 2022 में इस प्रतिबंधात्मक स्पष्टीकरण को हटा दिया गया था। अदालत ने माना कि संशोधित परिपत्र लाभकारी और स्पष्टीकरण देने वाला है इसलिए इसे पिछली तारीख से लागू माना जाएगा।
कर विशेषज्ञ अभिषेक रस्तोगी के अनुसार, यह फैसला एक मूल संवैधानिक सिद्धांत को दोहराता है कि कार्यकारी परिपत्र कानून द्वारा दिए गए अधिकारों को सीमित नहीं कर सकते। अदालत ने माना कि पहले के परिपत्र के आधार पर रिफंड रोकना कानून में ऐसी शर्त जोड़ने जैसा था, जिसे संसद ने कभी नहीं बनाया।