facebookmetapixel
Advertisement
शोरूम्स में उमड़ी भीड़: अप्रैल में बिके रिकॉर्ड 26.1 लाख वाहन, ग्रामीण इलाकों ने शहरों को पछाड़ा!बायोकॉन में उत्तराधिकार का आगाज! किरण मजूमदार-शॉ ने भतीजी क्लेयर को चुना अपना वारिसगोदरेज एरोस्पेस की ऊंची उड़ान: 2032 तक सालाना 20% विकास का लक्ष्य, मुंबई में लगेगा नया प्लांटMahindra & Mahindra Q4 Results: चौथी तिमाही में मुनाफा 42% उछला, राजस्व में 29% की दमदार बढ़तL&T Q4 Results: मुनाफा 3% गिरा, लेकिन ऑर्डर बुक ₹7.40 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर!‘आत्मनिर्भर भारत के लिए विनिर्माण में चाहिए रणनीतिक स्वायत्तता’, CII अध्यक्ष राजीव मेमानी की सरकार से अपीलश्रम संहिता बनाम राज्यों के अपने कानून: क्या दोहरे नियमों के जाल में फंस जाएंगी कंपनियां?‘CSR से काम नहीं चलेगा, शोध में पैसा लगाएं’, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उद्योग जगत को दी नसीहत‘भारत की ताकत को कम आंका जा रहा है’, RBI डिप्टी गवर्नर ने बताया क्यों मजबूत है निवेश की नींवगन्ना किसानों को मोदी सरकार का तोहफा: ₹365 प्रति क्विंटल हुआ FRP, कपास उत्पादन पर भी बड़ा फैसला

एलएलएम निर्माण से पीछे न हटे भारत: सर्वम एआई के विवेक राघवन

Advertisement

सर्वम एआई के सह-संस्थापक बोले- एप्लीकेशन जरूरी हैं, लेकिन अगर मॉडल बनाने की क्षमता छोड़ी तो भारत दूसरों पर निर्भर हो जाएगा

Last Updated- February 20, 2026 | 9:02 AM IST
Vivek Raghavan, Cofounder, Sarvam
सर्वम एआई के सह-संस्थापक विवेक राघवन

सर्वम एआई की ओर से हाल में जारी लैंग्वेज मॉडलों को गूगल के सुंदर पिचाई से प्रशंसा मिली है। अभीक दास के साथ बातचीत में सर्वम के सह-संस्थापक विवेक राघवन ने इन मॉडलों की प्रभावशीलता, उन्हें प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने में आने वाली प्रमुख चुनौतियों और सक्षम एआई स्टैक बनाने की दिशा में भारत की तलाश के बारे में बातचीत की। बातचीत के मुख्य अंश:

आपके लैंग्वेज मॉडलों पर भारत के एआई तंत्र और सरकार ने किस तरह की प्रतिक्रिया दी है?

मुझे लगता है कि हर कोई उत्साहित है कि भारत किसी के बिना और डेटा निर्भरता के बगैर ऐसा एलएलएम बनाने में सफल रहा है, जो भारतीय भाषाओं के लिहाज से मजबूत है और अपने आकार के दूसरे मॉडलों के बराबर भी है। मैं यह नहीं कह रहा कि यह सबसे बड़े जेमिनी या सबसे बड़े एंथ्रोपिक मॉडल के जैसा है। हमने जो किया, वह यह था कि हमने इसे एक बहुत ही एफिशिएंट मॉडल बनाने की कोशिश की।

क्या आप भविष्य में बड़े मॉडल बनाना चाहेंगे?

हम यह जरूर करना चाहते हैं, लेकिन इससे ज्यादा जरूरी यह है कि इन मॉडलों का इस्तेमाल किया जाए औऱ हमें देखना है कि कैसे यह उपयोग हो। मुझे लगता है कि विशेष रूप से भारतीय भाषाओं में, साथ ही बड़े लैंग्वेज मॉडलों से किसी को भी जिन 95 फीसदी कार्यों की आवश्यकता होती है, उनके लिए ये ऐसा कुछ करने के लिए पूरी तरह से उपयुक्त हैं। छोटा मॉडल (30 अरब पैरामीटर) बहुत कम लागत पर भारतीय बातचीत को संभालने के लिए अच्छा है।

क्या देश का फोकस बड़े मॉडलों पर होना चाहिए या एप्लीकेशनों पर?

मुझे नहीं लगता कि ये ‘यह या वह’ वाली स्थिति है। आपको एप्लीकेशनों पर काम करना होगा, क्योंकि वहीं आप मॉडलों की वैल्यू दिखाते हैं। इसमें कोई शक नहीं है। लेकिन अगर आप मॉडल बनाने की अपनी काबिलियत छोड़ देते हैं, तो आप ऐसी हालत में आ सकते हैं कि दूसरे लोगों पर निर्भर हो जाएं और वे आपको बताएंगे कि क्या करना है।

हम यह कैसे सुनिश्चित करें कि इन मॉडलों का इस्तेमाल हो? क्या आपकी सरकार से कोई बातचीत हुई है?

मुझे यकीन है कि इस बारे में बहुत बातचीत हुई है, लेकिन इस समय मैं कुछ नहीं बता सकता।

Advertisement
First Published - February 20, 2026 | 9:02 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement