AI Impact Summit 2026: नई दिल्ली में इस हफ्ते आयोजित होने वाले इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में 100 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्ष, वैश्विक मुख्य कार्याधिकारी और प्रतिनिधि एकत्र हो रहे हैं। समिट से पहले केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सुरजीत दास गुप्ता को ईमेल के जरिये दिए साक्षात्कार में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) में भारत की वैश्विक महत्त्वाकांक्षा को रेखांकित किया। संपादित अंश:
समिट का फोकस मानव, पृथ्वी और प्रगति पर होगा। यह वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों, एआई-आधारित सेवाओं, प्रतिभा विकास और मजबूत सुरक्षा ढांचों के महत्त्व पर प्रकाश डालेगा ताकि नवाचार और जिम्मेदारी साथ-साथ चलें। अर्थव्यवस्था और समाज की समस्याओं को हल करके लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए एआई का उपयोग कैसे किया जाए, इसके उपाय तलाशना मुख्य उद्देश्य है।
भारत निकट भविष्य में एआई सेवाओं का प्रदाता बनने की राह पर है। हम एआई स्टैक की सभी पांच स्तरों ऐप्लिकेशन, मॉडल, चिप इन्फ्रा और ऊर्जा पर काम कर रहे हैं। हम देसी फाउंडेशनल एआई मॉडल विकसित करने वाली स्टार्टअप का समर्थन कर रहे हैं। ये मॉडल वैश्विक बेंचमार्क पर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं और अच्छे परिणाम दिखा रहे हैं। इनमें से कुछ को एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान लॉन्च किया जाएगा। उद्योग और यहां तक कि हमारे सर्वम मॉडल के शुरुआती आलोचक भी अब इसे कई लोकप्रिय एलएलएम से बेहतर बता रहे हैं। पांच स्तर में प्रगति अलग-अलग चरण में है। भारत वैश्विक एआई आर्किटेक्चर में प्रतिस्पर्धी होने के साथ-साथ सहयोगा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत में एआई ऐप्लिकेशन लाखों लोगों तक लगभग तुरंत पहुंच सकते हैं जबकि प्रायोगिक परियोजना को व्यापक स्तर पर ले जाने में वर्षों लग जाते हैं। हमारा डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा (डीपीआई) एक तैयार, इंटरऑपरेबल डिजिटल बैकबोन के रूप में कार्य करता है जो बड़े पैमाने पर एआई समाधानों को तैनात करने की लागत और घर्षण को कम करता है। कई देशों के विपरीत हमने आधार, यूपीआई, डिजिलॉकर, ओएनडीसी और को-विन जैसी मानकीकृत डिजिटल श्रृंखला बनाई हैं। इससे तीन बड़े फायदे होते हैं : व्यापकता, गति और विश्वास। हमारे स्टार्टअप को एआई बुनियादी ढांचे को फिर से बनाने की आवश्यकता नहीं है। वे एआई आधारित समाधान और नवाचार देने पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त हमारा विशाल 5जी नेटवर्क और तकनीक पसंद युवा आबादी हमारे समाज के सभी वर्गों में एआई को अपनाने और नई पीढ़ी की प्रौद्योगिकी के प्रसार को गति देगा।
ग्लोबल साउथ खुले, किफायती और विकास-केंद्रित एआई समाधानों की तलाश में है। भारत एआई को आर्थिक विकास, सामाजिक समावेश और पर्यावरण स्थिरता के उपकरण के रूप में विकसित कर रहा है। ये देश भारत को भरोसेमंद एआई भागीदार के रूप में देख रहे हैं।
हम वास्तविक दुनिया की समस्याओं का समाधान करने और सफल मॉडल को व्यापक स्तर पर प्रसार करने के लिए एआई इम्पैक्ट समिट में सरकारों, उद्योग, शिक्षा जगत और स्टार्टअप को एक साथ ला रहे हैं। यह समिट प्रमुख एआई राष्ट्रों और ग्लोबल साउथ के बीच सहयोग का काम करेगा।
हम एआई द्वारा संचालित एक नए औद्योगिक युग में प्रवेश कर रहे हैं। पहले, विकास अधिक इंजीनियरों को जोड़ने से होता था। अब विकास सीधे सिस्टम में इंटेलिजेंस शामिल करने से होगा। आज वैश्विक स्तर पर विनिर्माण, दूरसंचार, वित्त और लॉजिस्टिक जैसे क्षेत्रों में एआई आधारित स्वचालन और इंटेलिजेंट एनालिटिक्स की व्यापक मांग है। भारतीय कंपनियों के पास डोमेन का गहरा ज्ञान है। घरेलू फर्में एआई को बड़े पैमाने पर तैनात करने के लिए अच्छी स्थिति में हैं। पूरे एआई स्टैक के साथ भारत दुनिया के बैक-ऑफिस होने से रणनीतिक एआई ट्रांसफॉर्मेशन भागीदार बनने की ओर अग्रसर होगा।
हमारा युवा श्रमबल एआई उपकरणों और उभरती प्रौद्योगिकी को तेजी से अपना रहा है। हमारे स्टार्टअप द्वारा एआई और डीप टेक को अपनाने की गति भी तेजी से बढ़ रही है। हम स्कूलों और कॉलेजों में एआई शिक्षा का विस्तार कर रहे हैं। हमारी सरकार एआई के लिए तैयार श्रमबल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। हम देश भर में स्थापित किए जा रहे 570 से अधिक एआई और डेटा लैब नेटवर्क के माध्यम से एआई से संबंधित कौशल में 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करेंगे।
हमारा तकनीकी-कानूनी नजरिया है। हमारा मानना है कि एआई नियमन को नवाचार को बढ़ावा देने और दुरुपयोग को रोकने के बीच संतुलन तलाशना चाहिए। हमने एआई संचालन दिशानिर्देश जारी किए हैं।