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बीएनपी की जीत के बाद भारत-बांग्लादेश रिश्तों में सुधार की उम्मीद, मोदी ने तारिक रहमान से की बात

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भारत ने कई अवसरों पर बांग्लादेश में हिंदुओं, बौद्ध और इसाइयों सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों पर चिंता जाहिर की थी।

Last Updated- February 13, 2026 | 11:36 PM IST
India Bangladesh

भारत सरकार अगस्त 2024 से भारत और बांग्लादेश के संबंधों में आई खटास को दूर करने और बांग्लादेश नैशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सरकार के कार्यकाल में अपने महत्त्वपूर्ण पूर्वी पड़ोसी के साथ संबंध सुधारने की उम्मीद कर रही है। यही वजह है कि शुक्रवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान को फोन किया। वह दुनिया के पहले बड़े नेता हैं जिन्होंने रहमान से सीधे बात की। रहमान बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं।

परंतु दोनों देशों के पूर्व और वर्तमान राजनयिकों का मानना है कि बांग्लादेश की नई संसद में जमात ए इस्लामी की मजबूत मौजूदगी दोनों देशों के रिश्तों के लिए चिंता का विषय बनी रहेगी। हालांकि दोनों देश आपसी व्यापार और संपर्क बढ़ाने का प्रयास भी करेंगे।

भारत सरकार ने कहा कि प्रधानमंत्री ने रहमान को शुभकामनाएं दीं और बांग्लादेश के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने की उनकी कोशिशों के प्रति पूरा समर्थन जाहिर किया। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘दोनों पड़ोसी देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों की जड़ें बहुत गहरी हैं। ऐसे में मैंने दोनों देशों के लोगों की शांति, प्रगति और समृद्धि को लेकर भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दोहराया।’

इससे पहले एक सोशल मीडिया पोस्ट में मोदी ने कहा था कि भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा। उन्होंने लिखा, ‘मैं आपके साथ काम करने की आशा करता हूं ताकि हमारे बहुआयामी संबंधों को मजबूत किया जा सके और हमारे साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाया जा सके।‘ बीएनपी ने चुनाव परिणाम को मान्यता देने के लिए मोदी का धन्यवाद किया और आशा व्यक्त की कि नई सरकार के तहत दोनों देशों के संबंध मजबूत होंगे। बीएनपी दो तिहाई से अधिक बहुमत हासिल कर सकती है। परंतु ढाका और नई दिल्ली में भारत सरकार के सूत्रों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि बांग्लादेश की नई संसद में जमात ए इस्लामी की बढ़ी हुई ताकत बीएनपी सरकार को सतर्क रखेगी, विशेषकर दोनों देशों के संबंधों के प्रश्न पर।

गौरतलब है कि जमात एक कट्टरपंथी पार्टी है, जो पाकिस्तान के करीब मानी जाती है और उसे उसके भारत विरोधी रुख के कारण जाना जाता है। बांग्लादेश की नई संसद में उसे करीब 75 सीटें मिल सकती हैं। जमात पहले भी बीएनपी की सहयोगी रह चुकी है।

उधर बीएनपी ने शुक्रवार को भारत से निष्कासित पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को प्रत्यर्पित करने की अपनी मांग दोहराई ताकि उन पर मुकदमा चलाया जा सके। बीएनपी के वरिष्ठ नेता सलाहुद्दीन अहमद ने कहा, ‘विदेश मंत्री पहले ही उनके प्रत्यर्पण का मामला उठा चुके हैं, और हम भी इसका समर्थन करते हैं। हमने भारत सरकार से भी अनुरोध किया है कि कृपया उन्हें वापस भेजें ताकि वह बांग्लादेश में मुकदमे का सामना कर सकें।’

बांग्लादेश में नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के कार्यकाल में दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण रहे। भारत ने कई अवसरों पर बांग्लादेश में हिंदुओं, बौद्ध और इसाइयों सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों पर चिंता जाहिर की थी। उम्मीद की जा रही है कि नई सरकार के आने के बाद इन पर लगाम लगेगी।

भारत के पूर्व उच्चायुक्त और वर्तमान में राज्यसभा के नामित सदस्य हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा, ‘मेरा मानना है कि कई मायनों में हम पूर्ण चक्कर पूरा कर चुके हैं। बांग्लादेश की जनता ने उस पार्टी को वोट दिया है जो राजनीतिक हितों का प्रतिनिधित्व करती है। यह एक स्वतंत्रता समर्थक पार्टी है और 1971 की भावना में विश्वास करती है, इसके विपरीत जमात ए इस्लामी ने तो 1971 में बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम का विरोध किया था।’श्रृंगला ने कहा कि बीएनपी प्रमुख ने भारत के साथ रिश्ते अच्छे बनाने और अपने देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा तय करने को लेकर सकारात्मक बातें की हैं। परंतु उन्होंने बांग्लादेश में जमात की बढ़ती ताकत को रेखांकित करते हुए यह भी कहा कि देश के सांप्रदायिक, कट्टरपंथी बनने और इस्लामीकरण की आशंकाएं भी बरकरार हैं।

भारत अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान चीन के साथ बांग्लादेश की बढ़ती दोस्ती से भी चिंतित है। के बीच बढ़ती मित्रता को लेकर भी चिंतित है।

(साथ में एजेंसियां)

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First Published - February 13, 2026 | 11:14 PM IST

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