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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, एयरसेल-आरकॉम की वसूली अब खतरे में

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एयरसेल और आरकॉम की दिवालियापन वसूली प्रभावित होगी और दूरसंचार कंपनियों को ऋण लेने में नई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

Last Updated- February 16, 2026 | 8:53 AM IST
Supreme Court
Representative Image

बैंकरों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से एयरसेल और रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) की दिवालियापन कार्यवाही से जुड़ी वसूली प्रभावित हो सकती है। न्यायालय के निर्णय में कहा गया कि दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को आवंटित स्पेक्ट्रम को कॉरपोरेट परिसंपत्ति के रूप में नहीं माना जा सकता है जिसे ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) के तहत पुनर्गठित किया जा सके।

बैंकरों ने कहा कि इस फैसले से क्रेडिट मूल्यांकन ढांचे में भी बदलाव आने की उम्मीद है और ऋणदाताओं द्वारा दूरसंचार कंपनियों को ऋण देते समय उपलब्ध सुरक्षा की प्रकृति का पुनर्मूल्यांकन किए जाने की संभावना है।

एक वरिष्ठ बैंकर ने नाम नहीं छापे जाने के अनुरोध के साथ कहा कि इस अदालती फैसले से दो कॉरपोरेट दिवालिया मामलों (एयरसेल और रिलायंस कम्युनिकेशंस) से जुड़ी वसूली प्रक्रिया प्रभावित होगी।

उन्होंने कहा, ‘वसूली की जो भी संभावना थी, वह अब खत्म हो गई है।’ उन्होंने कहा कि बैंक अब ज्यादा वसूली नहीं कर पाएंगे।

एयरसेल पर 13,500 करोड़ रुपये से अधिक जबकि रिलायंस कम्युनिकेशंस पर 50,000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया था।

उन्होंने यह भी कहा कि दूरसंचार कंपनियों को भविष्य में धन देने के लिए इस पहलू (स्पेक्ट्रम को एक कॉरपोरेट संपत्ति के रूप में नहीं माना जा सकता है) के संदर्भ गंभीरता से विचार करना होगा, क्योंकि सबसे मूल्यवान सुरक्षा (स्पेक्ट्रम) अब उपलब्ध नहीं होगी। बैंकर ने कहा, ‘ऋणदाताओं को यह आकलन करना होगा कि ऋण के लिए किस वैकल्पिक सुरक्षा पर विचार किया जा सकता है अन्यथा, यह एक असुरक्षित जोखिम बन जाएगा।’

इससे वोडाफोन आइडिया के फंड जुटाने की राह भी प्रभावित हो सकती है, जो बैंकों और अन्य स्रोतों से ऋण वित्त पोषण के तहत लगभग 35,000 करोड़ रुपये जुटाने की तलाश में है। बैंक कंपनी के प्रस्ताव का मूल्यांकन कर रहे हैं और कंपनी को नए ऋण देने के संबंध में अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

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First Published - February 16, 2026 | 8:53 AM IST

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