चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल मार्केटिंग कंपनियों, बैंक, गैर-बैंक ऋणदाताओं तथा धातु एवं खनन कंपनियों के मुनाफे में तेजी से यह आंकड़ा सुधरा है।
इन चक्रीय क्षेत्रों की कंपनियों ने कच्चे तेल की कम कीमत, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती और धातु की कीमतों में तेजी से नई श्रम संहिता के कार्यान्वयन से होने वाले एकबारगी वित्तीय नुकसान की भरपाई की और कहीं ज्यादा मुनाफा कमाया।
हालांकि कई बड़ी कंपनियों खास तौर पर आईटी, बैंक और वित्तीय सेवा फर्मों को नए श्रम कानून से संबंधित खर्च के लिए अलग से रकम रखने पड़े जिससे उनके शुद्ध लाभ पर असर पड़ा।
चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल शुद्ध लाभ 14.7 फीसदी बढ़ा जो पिछली आठ तिमाही में सबसे तेज वृद्धि है। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में इन कंपनियों का समायोजित शुद्ध लाभ 5.7 फीसदी और चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 10.6 फीसदी बढ़ा था।
बिज़नेस स्टैंडर्ड के नमूने में शामिल 3,353 कंपनियों का कुल शुद्ध लाभ (समायोजित) वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में बढ़कर करीब 3.97 लाख करोड़ रुपये रहा जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में लगभग 3.47 लाख करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में 3.67 लाख करोड़ रुपये था।
तीसरी तिमाही में कंपनियों के शुद्ध लाभ में नई श्रम संहिता का भी असर दिखता है। कंपनियों का कुल शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में 9.5 फीसदी बढ़ा जो वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में 11.9 फीसदी बढ़ा था।
वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में कंपनियों की कुल मुनाफा वृद्धि में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 22.4 फीसदी रही। इस दौरान इंडियन ऑयल का शुद्ध लाभ 8 गुना होकर 13,007 करोड़ रुपये रहा जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 1,630 करोड़ रुपये था। चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में कंपनियों की कुल मुनाफा वृद्धि में भारतीय स्टेट बैंक की हिस्सेदारी 8.1 फीसदी रही। इसी तरह भारत पेट्रोलियम ने कुल मुनाफा वृद्धि में 6.8 फीसदी, टाटा स्टील ने 4.8 फीसदी और एचडीएफसी बैंक ने 3.8 फीसदी का योगदान दिया।
वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में इन 5 कंपनियों का कुल मुनाफा वृद्धि में करीब 46 फीसदी योगदान रहा। इसके अलावा महिंद्रा ऐंड महिंद्रा, जेएसडब्ल्यू स्टील, मुथूट फाइनैंस, ओएनजीसी और वेदांत ने भी मुनाफा वृद्धि में अच्छा योगदान दिया।
वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में कुल कॉरपोरेट लाभ में इन चक्रीय क्षेत्रों की कंपनियों की हिस्सेदारी 56.2 फीसदी रही जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 53.3 फीसदी था।
इसके विपरीत रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), इन्फोसिस, आईटीसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी पारंपरिक रूप से ज्यादा कमाई करने वाली कंपनियों ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में औसत से कम कमाई वृद्धि के साथ निराश किया।
चक्रीय क्षेत्रों को छोड़ दें बाकी सूचीबद्ध कंपनियों का कुल शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में महज 7.5 फीसदी बढ़ा जो वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में 17.2 फीसदी और चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 10.9 फीसदी बढ़ा था। (शेष पृष्ठ 2 पर)
हालांकि बैंकों को छोड़कर सभी क्षेत्रों में आय वृद्धि में तेजी आई। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती के बाद बेंचमार्क ऋण दर में गिरावट के कारण बैंकों की सकल ब्याज आय में नरमी देखी गई।
वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में नमूने में शामिल सभी कंपनियों की कुल शुद्ध बिक्री या आय 8.9 फीसदी बढ़ी, जो पिछली 11 तिमाही में सबसे तेज वृद्धि है। इन कंपनियों की शुद्ध बिक्री वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में 41.17 लाख करोड़ रुपये रही जो वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में लगभग 37.8 लाख करोड़ रुपये और चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 39.2 लाख करोड़ रुपये थी।
इसकी तुलना में गैर-चक्रीय क्षेत्र की कंपनियों की कुल शुद्ध आय वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में 9.36 फीसदी बढ़ी जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 9.2 फीसदी और वित्त वर्ष2026 की दूसरी तिमाही में 9.7 फीसदी बढ़ी थी। इन कंपनियों की कुल शुद्ध बिक्री या आय वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में बढ़कर 32.47 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 29.69 लाख करोड़ रुपये थी और वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में 30.76 लाख करोड़ रुपये थी।
कुल आय और मुनाफे पर धातु और जिंस की कीमतों में हालिया वृद्धि का प्रतिकूल प्रभाव भी दिखता है। जिंस की ऊंची कीमतों के कारण कंपनियों की कच्चे माल की लागत में वृद्धि हुई लेकिन आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कटौती के बाद ब्याज लागत घटने से इसकी भरपाई हो गई। बीएफएसआई से परे कंपनियों का एबिटा मार्जिन वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में 20 आधार अंक कम रहा।