प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विकसित भारत की ओर अगला कदम नवाचार, दीर्घकालिक क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में निजी क्षेत्र के साहसिक निवेश पर निर्भर करेगा। आर्थक परिदृश्य में बदलाव के अगले चरण के लिए उद्योग जगत की ओर से ठोस और निर्णायक प्रतिक्रिया की जरूरत है। समाचार एजेंसी पीटीआई के साथ रविवार को एक लिखित साक्षात्कार में प्रधानमंत्री ने कहा कि अब निजी क्षेत्र के लिए आगे बढ़ने, साहसपूर्वक निवेश करने और नवाचार-आधारित वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विकास के अगले चरण को गति देने का समय है।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने अपने कार्यकाल में पूर्व सरकारों द्वारा छोड़ी गई संरचनात्मक खाई को भरते हुए साहसिक सुधारों के बल पर विकसित भारत की नींव रखी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस साल का बजट मजबूरी के कारण पैदा हुआ ‘अभी नहीं तो कभी नहीं’ वाला नहीं, बल्कि पूरी तैयारी और प्रेरणा से उपजा ‘हम तैयार हैं’ वाला क्षण था।
उन्होंने कहा कि यह बजट एक विकसित राष्ट्र बनने की भारत की प्रबल इच्छा को रेखांकित करता है। उनकी सरकार का कोई भी बजट सामान्य ‘बही खाता’ दस्तावेज तैयार करने की मानसिकता से नहीं बनाया गया, क्योंकि यह हमारा दृष्टिकोण नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘विभिन्न प्रकार की चुनौतियों के इस दौर में भी हमारे राष्ट्रीय चरित्र ने अपनी मजबूत पहचान दिखाई है और हम कठिन वैश्विक परिस्थितियों में भी विकास का एक उज्ज्वल उदाहरण हैं।’
यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने तय कर लिया है कि भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य की दिशा में विकास के अगले चरण में प्रवेश करने के लिए तैयार है और क्या यह ‘अभी नहीं तो कभी नहीं’ वाली स्थिति है, मोदी ने कहा कि महामारी के बाद की विश्व व्यवस्था भारत के लिए नए द्वार खोल रही है, जिसमें विभिन्न देश व्यापार और नवाचार में भारत के साथ साझेदारी करने के लिए उत्सुक हैं।
उन्होंने कहा, ‘हमारे पास एक युवा और कुशल आबादी है और हम कम मुद्रास्फीति और व्यापक आर्थिक स्थिरता के साथ मजबूत विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हमारे युवा अंतरिक्ष, खेल और स्टार्टअप जैसे विविध क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का परिचय दे रहे हैं। हमने राजनीतिक स्थिरता और सुधार-केंद्रित नीतियां सुनिश्चित की हैं। इन घटनाक्रमों के कारण लोग इसे भारत के लिए एक ऐतिहासिक अवसर के रूप में देख रहे हैं।’
मोदी ने कहा कि उनकी सरकार के हर बजट में उद्देश्य, उन्हें हासिल करने के लिए स्पष्ट रूपरेखा और कार्यों का क्रम निर्धारित होता है, जिनमें से प्रत्येक को पूरा करने के लिए समय सीमा भी तय की जाती है। उन्होंने कहा कि इसके बाद सरकार कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करती है, जिसे अगले बजट में अगले तर्कसंगत चरण तक ले जाया जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन वर्षों में हमने पिछली सरकारों से विरासत में मिली संरचनात्मक कमियों को दूर किया है, साहसिक संरचनात्मक सुधार किए हैं, गरीबों के लिए अवसरों का विस्तार किया है, युवाओं को सशक्त बनाया है, महिलाओं की भूमिका को मजबूत किया है और किसानों के लिए गरिमा एवं सुरक्षा सुनिश्चित की है।
उन्होंने कहा, ‘इसके साथ ही हमने एक समावेशी, प्रौद्योगिकी-आधारित और मानव-केंद्रित कल्याणकारी ढांचा विकसित किया है, जिसकी पहुंच अंतिम छोर तक है और जिससे कोई भी अछूता नहीं है।’ मोदी ने कहा कि राष्ट्र निर्माण, अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और विकसित भारत की नींव तैयार करना हर स्तर पर हमारा मार्गदर्शक सिद्धांत रहा है। उन्होंने कहा, ‘यह बजट इस यात्रा में अगला चरण है, जो हमारी ‘सुधार एक्सप्रेस’ को रफ्तार प्रदान करता है।’
उन्होंने बजट से पहले पेश 2025-26 की आर्थिक समीक्षा का हवाला देते हुए कहा कि पूंजी संचय, श्रम को संगठित दायरे में लाने और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना ने मिलकर भारत की संभावित वृद्धि दर को सात प्रतिशत तक पहुंचा दिया है।
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया गया है, जो 2013 की तुलना में पांच गुना है। इसके जरिये सरकार ने दीर्घकालिक वृद्धि को गति देने के लिए बुनियादी ढांचा निर्माण, लॉजिस्टिक विस्तार और उभरते क्षेत्रों में निवेश को प्राथमिकता देने की अपनी रणनीति को मजबूत किया है। बजट में रेल, सड़क, डिजिटल और ऊर्जा अवसंरचना पर खर्च के साथ-साथ अनुपालन को आसान बनाने और ऋण प्रवाह में सुधार पर जोर दिया गया है, ताकि रोजगार सृजन और आर्थिक गति को बढ़ाया जा सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक उच्च गुणवत्ता वाले बुनियादी ढांचे की उपेक्षा की गई, जिससे आम लोगों और भारतीय कारोबार के सामने चुनौतियां खड़ी हुईं।
उन्होंने कहा, ‘टूटा-फूटा और पुराना बुनियादी ढांचा उस देश के लिए उपयुक्त नहीं है, जो विकसित भारत बनने की आकांक्षा रखता है।’ उन्होंने कहा कि इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने गति, पैमाने और अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे के निर्माण पर ध्यान देने और इस क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव करने के साथ मौजूदा ढांचे को भी उन्नत किया है। पिछले एक दशक में भारत ने अपने इतिहास का सबसे व्यापक बुनियादी ढांचा निर्माण अभियान देखा है, जिसमें गुणवत्ता पर अभूतपूर्व जोर रहा है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यवस्था में भारत की स्थिति मजबूत हो रही है और महामारी के बाद की दुनिया भारत के लिए नए अवसर खोल रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने बजट को दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य में रखते हुए कहा कि इसे केवल 2026 का बजट नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि यह 2047 तक विकसित भारत की नींव रखने वाला दस्तावेज है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अगले दशक के लिए उनकी शीर्ष तीन सुधार प्राथमिकताएं लगातार संरचनात्मक सुधार, नवाचार को प्रोत्साहन और शासन को अधिक सुगम बनाना है। उन्होंने कहा कि स्वभाव से वह कभी संतुष्ट नहीं होते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि सार्वजनिक जीवन में कुछ रचनात्मक करने के लिए बेचैनी, ज्यादा करने की लगातार इच्छा, तेजी से सुधार करने एवं बेहतर सेवा करने की जरूरत होती है।
उन्होंने अगले दशक के लिए तीन आर्थिक सुधारों को प्राथमिकता देने के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘हमारी दिशा साफ है, हम इसे किसी एक संख्या तक सीमित नहीं रखना चाहते।’ उन्होंने इसको रेखांकित करते हुए कहा, ‘पहला, हम संरचनात्मक सुधारों को जारी रखेंगे जो प्रतिस्पर्धात्मकता और उत्पादकता को बेहतर करेंगे। दूसरा, हम प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और सेवाओं में नवोन्मेष को और बढ़ाएंगे। तीसरा, हम शासन को और आसान बनाएंगे ताकि नागरिक और कारोबार क्षेत्र ज्यादा आसानी और भरोसे के साथ काम कर सकें।’
प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के ‘आर्थिक कुप्रबंधन’ के कारण भारत व्यापार वार्ताओं में मजबूती से अपना पक्ष नहीं रख सका और एक भी बातचीत निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी।
मोदी ने कहा कि भारत ने ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ (ईयू) और अमेरिका के साथ जो व्यापार समझौते किए हैं, उनसे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए, खास तौर पर श्रम-प्रधान क्षेत्रों में इन देशों में लगभग शून्य शुल्क या अन्य देशों की तुलना में काफी कम शुल्क पर वस्तुओं के निर्यात के रास्ते खुल गए हैं।
मोदी ने कहा कि रक्षा सुधारों के एक दशक के लाभ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान स्पष्ट रूप से दिखाई दिए। उन्होंने साथ ही इस बात पर जोर दिया कि भारत को सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए हर समय तैयार रहना होगा। प्रधानमंत्री कहा कि विश्व में तेजी से महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे देश के रूप में भारत का यह कर्तव्य है कि वह वर्तमान वास्तविकताओं के अनुरूप अपने रक्षा क्षेत्र का आधुनिकीकरण करे। प्रधानमंत्री ने केंद्रीय बजट 2026-27 में रक्षा क्षेत्र के लिए आवंटित 7.85 लाख करोड़ रुपये का हवाला देते हुए कहा कि यह आवंटन पिछले बजट से 15 प्रतिशत अधिक है और किसी भी मंत्रालय या विभाग को दिया गया अब तक का सबसे बड़ा आवंटन है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका होगी और सरकार द्वारा उठाए गए कदम उन्हें सशक्त बनाएंगे। पिछले कुछ वर्षों में यह गर्व का विषय रहा है कि भारत की महिलाएं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व कर रही हैं। चाहे अंतरिक्ष हो या स्टार्टअप, वे बड़ा प्रभाव डाल रही हैं।
मोदी ने कहा कि महिलाओं का कल्याण उनकी सरकार के हर फैसले का मार्गदर्शन करता है और प्रत्येक जिले में बालिकाओं के लिए ‘स्टेम’ (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) छात्रावास स्थापित करने की नई पहल से महिलाओं में शिक्षा और नवाचार में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।