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EAM Jaishankar की दो टूक, विदेश और ऊर्जा नीति में भारत स्वतंत्र

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जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत ऊर्जा और विदेश नीति में राष्ट्रीय हितों के आधार पर स्वतंत्र निर्णय लेता रहेगा।

Last Updated- February 15, 2026 | 11:56 AM IST
External Affairs Minister S Jaishankar
External Affairs Minister S Jaishankar

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि भारत अपनी विदेश नीति और ऊर्जा संबंधी निर्णयों में रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखेगा। उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्र सोच उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और नीति निर्माण की मूल भावना का हिस्सा रही है।

म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत किसी भी वैश्विक दबाव के आधार पर नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेता है। उन्होंने कहा कि रणनीतिक स्वायत्तता भारत की नीति का स्थायी तत्व है और यह राजनीतिक दलों से परे एक साझा राष्ट्रीय दृष्टिकोण है।

ऊर्जा बाजार जटिल, कंपनियां व्यावसायिक आधार पर लेती हैं निर्णय

रूसी तेल आयात को लेकर उठे सवालों के जवाब में जयशंकर ने कहा कि आज का वैश्विक ऊर्जा बाजार काफी जटिल है। तेल की उपलब्धता, कीमत और संभावित जोखिम जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखकर कंपनियां निर्णय लेती हैं। भारत की तेल कंपनियां भी अन्य देशों की कंपनियों की तरह व्यावसायिक गणनाओं के आधार पर फैसले करती हैं।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं और ऐसे में सभी देश अपने हितों की पुनर्समीक्षा कर रहे हैं। भारत भी बदलते हालात के अनुरूप अपने विकल्पों का मूल्यांकन करता है।

जयशंकर ने यह भी माना कि साझेदार देशों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संवाद के जरिए साझा आधार खोजा जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि सहमति बनाने की इच्छा हो तो समाधान निकलना संभव है। भारत अपनी स्वतंत्र सोच के साथ निर्णय लेता रहेगा, भले ही वह कुछ देशों की अपेक्षाओं से अलग क्यों न हो।

रूस से तेल आयात पर संतुलन की नीति

भारत की ऊर्जा नीति का मूल उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। 1.4 अरब लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार विभिन्न स्रोतों से तेल आयात कर रही है। रूस फिलहाल भारत के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है, हालांकि पिछले वर्ष के उच्चतम स्तर की तुलना में उसकी हिस्सेदारी कुछ कम हुई है और यह लगभग 27 से 35 प्रतिशत के बीच बताई जा रही है।

हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक व्यापार समझौते के तहत रूसी तेल खरीद रोकने का आश्वासन दिया है। इस समझौते के बाद अमेरिकी टैरिफ में भी कमी आई थी। हालांकि भारत के विदेश मंत्रालय ने इस दावे की पुष्टि या खंडन नहीं किया है। मंत्रालय का कहना है कि भारत की प्राथमिकता ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाकर स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

रूस की प्रतिक्रिया और कूटनीतिक संतुलन

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव सहित रूसी अधिकारियों ने कहा है कि उन्हें भारत की ओर से तेल खरीद रोकने संबंधी कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली है। उन्होंने भारत को एक विश्वसनीय और दीर्घकालिक साझेदार बताया।

म्यूनिख सम्मेलन के दौरान जयशंकर ने जी7 देशों के विदेश मंत्रियों सहित अन्य समकक्ष नेताओं से भी मुलाकात की। उन्होंने वैश्विक सुरक्षा और संयुक्त राष्ट्र सुधार से जुड़े मुद्दों पर भारत का दृष्टिकोण साझा किया और बहुपक्षीय सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।

राष्ट्रीय हित सर्वोपरि

पूरे घटनाक्रम के बीच भारत का रुख स्पष्ट है कि ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। भारत न तो किसी दबाव में निर्णय लेगा और न ही अपने दीर्घकालिक हितों से समझौता करेगा।

जयशंकर के बयान से यह संकेत मिलता है कि वैश्विक समीकरण चाहे जैसे भी बदलें, भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को नीति निर्माण की आधारशिला बनाए रखेगा।

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First Published - February 15, 2026 | 11:56 AM IST

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