पांच दिन का इंडिया एआई (आर्टिफिशल इंटेलिजेंस) इम्पैक्ट समिट सोमवार से नई दिल्ली के भारत मंडपम में शुरू होने जा रहा है। यह शिखर सम्मेलन एआई के मुद्दे पर ग्लोबल साउथ की चिंताओं एवं अपेक्षाओं के साथ उसकी आवाज को बुलंद करने वाला ऐसा पहला आयोजन होगा।
सरकारी अधिकारियों ने कहा कि एआई इम्पैक्ट समिट कई अन्य विकासशील देशों के समान भारत के उस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएगा जिसमें सामाजिक एवं आर्थिक प्रगति के लिए एआई संसाधन सभी को सुलभ कराने पर जोर दिया गया है ताकि उसे अधिक मानव केंद्रित बनाया जा सके।
अधिकारियों ने बताया कि यह दृष्टिकोण पहले के एआई शिखर सम्मेलनों के विपरीत है जहां विकसित देशों की चिंताओं और सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर जोर दिया गया था। पहले शिखर सम्मेलन को एआई सेफ्टी समिट नाम से नवंबर 2023 में ब्रिटेन के ब्लेचली पार्क में आयोजित किया गया था।
उस शिखर सम्मेलन में बातचीत इस बात पर केंद्रित थी कि फ्रंटियर एआई मॉडल से मानवता को क्या जोखिम है। साथ ही इस मुद्दे पर भी विचार-विमर्श किया गया था कि इस प्रौद्योगिकी के उपयोग को समाज के अधिक फायदे और कम नुकसान के लायक बनाने के लिए सरकारों को क्या कानून बनाना चाहिए। ब्लेचली पार्क समिट के बाद दूसरा सेफ्टी समिट मई 2024 में दक्षिण कोरिया में आयोजित किया गया था। उसके बाद फरवरी 2025 में पेरिस में एआई एक्शन समिट का आयोजन हुआ जो सस्टेनेबिलिटी पर केंद्रित था।
एक अधिकारी ने कहा कहा, ‘पिछले तीन वर्षों के दौरान एआई के प्रभाव का दायरा महज सुरक्षा एवं कार्रवाई के बारे में चिंता तक ही सीमित नहीं रह गया है। अब नवाचार, भविष्य में काम-काज का स्वरूप, विकास, एआई की सर्वसुलभता, समाज की भलाई और ग्लोबल साउथ जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने लगी है।’
विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘जहां तक भारत की बात है तो हमारा नजरिया यूरोप से अलग है। यूरोप का दृष्टिकोण सुरक्षा पर केंद्रित है जबकि हम इस बात पर जोर दे रहे हैं कि हमारे लोगों को सशक्त करने, समावेशिता बढ़ाने और शासन को अधिक कुशल बनाने, खास तौर पर उसे दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाने के टूल के रूप में इस प्रौद्योगिकी का उपयोग किस प्रकार किया जाए।’
एक अन्य सरकारी अधिकारी ने बताया कि सोमवार से शुरू होने वाले इस पांच दिवसीय शिखर सम्मेलन के दौरान विभिन्न देशों के बीच होने वाली चर्चा काफी हद तक ग्लोबल साउथ के लिए समान पहुंच सुनिश्चित करने पर केंद्रित हो सकती है। उन्होंने कहा कि इसमें भाग लेने वाले सभी देशों और कंपनियों का इस बात पर जोर रहेगा कि एआई को तैनात करते समय उपयोगकर्ताओं को भी ध्यान में रखा जाए।
नई दिल्ली के भारत मंडपम में 16-20 फरवरी तक चलने वाला यह आयोजन नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं और नकनीकी नवाचार करने वालों को एक मंच पर साथ लाएगा। आईटी सचिव एस कृष्णन ने कहा, ‘हमारा मुख्य संदेश यह है कि एआई के साथ जो कुछ भी हो वह मानव केंद्रित और समावेशी होना चाहिए। एआई संसाधनों तक सभी की पहुंच होनी चाहिए और उसे लोगों को केंद्र में रखते हुए किया जाए।’
इस शिखर सम्मेलन में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा सहित 20 राष्ट्राध्यक्ष भाग लेंगे। इसके अलावा 45 से अधिक देशों के मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी इसमें भाग लेंगे। इसका विषय ‘पीपल, प्लैनेट ऐंड प्रोग्रेस’ यानी लोग, धरती और प्रगति है।
सितंबर से ही ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ यानी विकसित एवं विकासशील देशों के प्रतिनिधियों की सह-अध्यक्षता वाले 7 थीमेटिक वर्किंग ग्रुप्स ने एआई कॉमन्स, ट्रस्टेड एआई टूल्स, शेयर्ड कंप्यूट इन्फ्रास्ट्रक्चर और एआई यूज केसेस के प्रस्तावों पर ठोस बातचीत के लिए काम किया है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनिया गुटेरेस भी इस समिट में भाग लेने के लिए भारत आ रहे हैं। उन्होंने पीटीआई से बातचीत में कहा, ‘भारत आज एक बेहद सफल उभरती अर्थव्यवस्था है। उसका प्रभाव न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था में बल्कि वैश्विक मामलों में भी बड़ा है और वह महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए भारत बिल्कुल सही जगह है। ‘
रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के वरिष्ठ सहायक मैक्सिम ओरेश्किन एआई इम्पैक्ट समिट के लिए एक बड़े प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। अगले एआई समिट का आयोजन स्विट्जरलैंड में होगा।
(साथ में अर्चिस मोहन और एजेंसियां)