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ग्लोबल मार्केट में दोपहिया कंपनियों की टक्कर, कहीं तेज तो कहीं सुस्त निर्यात

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अक्टूबर–दिसंबर तिमाही में भारतीय दोपहिया कंपनियों के निर्यात में आंशिक सुधार दिखा, लेकिन वैश्विक बाजारों में मांग अब भी असमान बनी हुई है।

Last Updated- February 15, 2026 | 3:26 PM IST
Two-wheeler makers see split export recovery in October-December quarter
Representative Image

अक्टूबर से दिसंबर तिमाही में भारत की दोपहिया वाहन कंपनियों के निर्यात प्रदर्शन में अलग-अलग रुझान देखने को मिले। कुछ कंपनियों ने विदेशी बाजारों में मजबूत वापसी दर्ज की, जबकि कुछ अन्य अभी भी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिर मांग से जूझ रही हैं। इससे साफ है कि निर्यात में सुधार पूरी तरह व्यापक नहीं हुआ है और यह बाजार विशेष पर निर्भर बना हुआ है।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि दोपहिया निर्यात कारोबार स्वाभाविक रूप से उतार-चढ़ाव से प्रभावित रहता है। राजनीतिक परिस्थितियां, स्थानीय आर्थिक हालात और प्रतिस्पर्धा जैसे कारक इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। इसी संदर्भ में प्राइमस पार्टनर्स के प्रबंध निदेशक Anurag Singh का कहना है कि भारतीय कंपनियां अब केवल कम लागत वाले निर्यातक के रूप में नहीं देखी जातीं, बल्कि उभरते बाजारों के लिए भरोसेमंद मोबिलिटी पार्टनर के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं। उनके अनुसार, विदेशी बाजारों में संयंत्र स्थापित करना, फाइनल असेंबली ऑपरेशन शुरू करना और वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करना इस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।

Bajaj Auto: निर्यात में मजबूत वापसी

Bajaj Auto के लिए तीसरी तिमाही में निर्यात एक बड़ी ताकत बनकर उभरा। कंपनी के प्रबंध निदेशक Rajiv Bajaj ने बताया कि इस तिमाही में कंपनी का मासिक निर्यात 2 लाख यूनिट के पार पहुंच गया, जो करीब तीन वर्षों में पहली बार हुआ है।

उन्होंने कहा कि लैटिन अमेरिका के कई देशों में मांग में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली, खासकर ब्राजील और कोलंबिया जैसे बाजारों में प्रदर्शन बेहतर रहा। हालांकि अफ्रीकी बाजारों में स्थिति अभी भी मिश्रित बनी हुई है। कंपनी के कुल वॉल्यूम में निर्यात की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। उद्योग संगठन Society of Indian Automobile Manufacturers के अनुसार, अप्रैल से दिसंबर के दौरान कंपनी का निर्यात 15.5 प्रतिशत बढ़कर 14.2 लाख यूनिट रहा, जो पिछले वर्ष समान अवधि में 12.3 लाख यूनिट था।

Hero MotoCorp: वृद्धि के बावजूद संतुलित दृष्टिकोण

Hero MotoCorp ने भी निर्यात में वृद्धि दर्ज की है, लेकिन कंपनी का रुख सतर्क बना हुआ है। मुख्य वित्त अधिकारी Niranjan Gupta के अनुसार, तिमाही के दौरान वैश्विक कारोबार में 41 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई, हालांकि कुल कारोबार में निर्यात का योगदान अभी सीमित है।

कंपनी ने बताया कि निर्यात वृद्धि मुख्य रूप से प्रीमियम मोटरसाइकिल सेगमेंट की बेहतर मांग के कारण हुई है। फिलहाल कंपनी के निर्यात वॉल्यूम का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा प्रीमियम मॉडलों का है। अप्रैल से दिसंबर के दौरान कंपनी का निर्यात 48.2 प्रतिशत बढ़कर 2.78 लाख यूनिट तक पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष यह 1.87 लाख यूनिट था।

TVS Motor Company: बाजार चयन में सावधानी

TVS Motor Company के प्रबंध निदेशक Sudarshan Venu ने कहा कि अफ्रीकी बाजारों में मांग की स्थिति अभी भी अस्थिर है और कई देशों में स्पष्ट रुझान नहीं दिख रहा।

कंपनी फिलहाल निर्यात बाजारों का चयन सोच-समझकर कर रही है और केवल वॉल्यूम वृद्धि के बजाय मुनाफे और नकदी प्रवाह पर ध्यान दे रही है। लैटिन अमेरिका और आसियान क्षेत्र के कुछ हिस्सों में सुधार के संकेत मिले हैं, लेकिन कुल मिलाकर रिकवरी धीमी और असमान है। अप्रैल से दिसंबर के बीच कंपनी का निर्यात 34.7 प्रतिशत बढ़कर 10.5 लाख यूनिट हो गया, जो पिछले वर्ष 7.77 लाख यूनिट था।

Eicher Motors और Royal Enfield: ब्रांड निर्माण पर जोर

Eicher Motors की इकाई Royal Enfield निर्यात को अल्पकालिक वॉल्यूम रणनीति के रूप में नहीं देखती। कंपनी के प्रबंध निदेशक B Govindarajan के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार कंपनी के लिए दीर्घकालिक ब्रांड निर्माण का माध्यम हैं।

ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे बाजारों में खुदरा स्तर पर सुधार दिख रहा है, लेकिन कंपनी नए उत्पाद लॉन्च और एक्सक्लूसिव स्टोर विस्तार पर फोकस बनाए हुए है। अप्रैल से दिसंबर के दौरान कंपनी का निर्यात 33.6 प्रतिशत बढ़कर 99,210 यूनिट रहा, जो पिछले वर्ष 74,220 यूनिट था।

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First Published - February 15, 2026 | 3:26 PM IST

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