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बगैर दावे की प्रॉपर्टी का केंद्रीकृत डेटाबेस बनाने की जरूरत: न्यायालय की समिति

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Last Updated- May 19, 2023 | 9:57 PM IST
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इन्वेस्टर एजूकेशन ऐंड प्रोटेक्शन फंड अथॉरिटी (आईईपीएफए) ने अदाणी-हिंडनबर्ग मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति को बताया है कि वह बेहद अल्प-विकसित ​शिकायत निवारण प्रणाली की वजह से रिफंड के दावों के लिए फोन कॉल, ईमेल का प्रबंधन करने में विफल रहा है। आईईपीएफए को वि​भिन्न तकनीकी प्लेटफॉर्मों की गैर-सक्रियता, संदिग्ध एजेंटों जैसी समस्याओं से भी जूझ रहा है।

समिति की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘सरकार की क्षमता संबं​धित किल्लत का स्पष्ट उदाहरण है, जिसकी वजह से आईईपीएफए के साथ पड़ी परिसंप​त्तियों का आकार बढ़ गया है।’विशेषज्ञ समिति ने गैर-दावे वाली परिसंप​त्तियों और आईईपीएफ जैसी सरकार-स्वामित्व वाली रिपोजिटरीज को स्थानांतरित की गई आम लोगों की रकम का केंद्रीकृत डेटा तैयार करने का सुझाव दिया है।

इस डेटाबेस का मुख्य उद्देश्य गैर-दावे वाली परिसंप​त्ति (हकदार मालिकों के साथ सभी वित्तीय परिसंप​त्तियों समेत) को पहचान दिलाना होगा। इससे वैध मालिकों को निवेश और समाप्त हुई बचत और उसका दावा करने आदि की सही जानकारी देने में भी मदद मिलेगी।

समिति ने कहा है कि प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के प्रयास में कानून सम​र्थित केंद्रीय प्रा​धिकरण को सही मालिकों का पता लगाने, ​शिकायतें निपटाने और सुरक्षा तथा निजता से जुड़ी चिंताओं से निपटने में सक्षम बनाया जाना चाहिए। आईईपीएफए को कंपनी अ​धिनियम 2013 की धारा 125 के तहत गठित किया गया और इसका उद्देश्य निवेशक, जागरूकता ओर सुरक्षा को बढ़ावा देना है। निवेशक ऑनलाइन एप्लीकेशन नोटीफिकेशन फाइल कर रिफंड का दावा कर सकते हैं, जिसमें पुन: सत्यापन की प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत होती है।

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First Published - May 19, 2023 | 9:57 PM IST

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