Sugar Production: चालू चीनी सीजन 2025-26 (अक्टूबर-सितंबर) के दौरान चीनी उत्पादन में तेजी देखने को मिल रही है। पिछले महीने तक चीनी का उत्पादन 250 लाख टन के करीब पहुंच गया है। हालांकि चीनी उद्योग ने चीनी उत्पादन अनुमान में कटौती की है। लेकिन इसके बाद भी पिछले सीजन से ज्यादा उत्पादन होने का अनुमान लगाया है। चीनी उद्योग के प्रमुख संगठन इंडियन सुगर ऐंड बायो एनर्जी मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) के मुताबिक चीनी सीजन 2025–26 में 28 फरवरी तक चीनी का उत्पादन 247.54 लाख टन हो गया है, जो पिछले सीजन की इसी तारीख तक 220.17 लाख टन था। जाहिर है इस सीजन चीनी उत्पादन अब तक पिछले सीजन से करीब 12 फीसदी ज्यादा है। इस्मा के मुताबिक 28 फरवरी तक 305 चीनी मिलें चल रही हैं, जबकि पिछले वर्ष इसी समय 330 मिलें चालू थीं।
चालू सीजन के दौरान सबसे अधिक चीनी का उत्पादन महाराष्ट्र में देखने को मिल रहा है। महाराष्ट्र में 28 फरवरी तक 95.35 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 75.05 लाख टन था। महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश में चीनी का उत्पादन अधिक हुआ। उत्तर प्रदेश में 28 फरवरी तक 74.83 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जो पिछले वर्ष फरवरी अंत तक के उत्पादन की तुलना में करीब 2.5 फीसदी अधिक है। कर्नाटक में इस साल 28 फरवरी तक चीनी उत्पादन 44.50 लाख टन पहुंच गया, पिछली समान अवधि में यह आंकड़ा 38.20 लाख टन था। दक्षिण कर्नाटक की कुछ मिलें जून/जुलाई से सितंबर 2026 के विशेष सीजन के दौरान दोबारा चलने की उम्मीद है।
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इस्मा ने तीसरे अग्रिम अनुमान के तहत देश में चीनी उत्पादन 2025-26 विपणन वर्ष के लिए 5.57 प्रतिशत घटाकर 324 लाख टन कर दिया है। पहले इस्मा ने 343.5 लाख टन उत्पादन का अनुमान लगाया था। इस्मा ने उत्पादन अनुमान से कम होने की वजह प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में कम उत्पादन होना बताई है। पिछले सीजन में देश में चीनी का उत्पादन 296.2 लाख टन था, जबकि चालू सीजन में यह बढ़कर 324 लाख टन होने का अनुमान है। एथनॉल के लिए 31 लाख टन चीनी के हस्तांतरण के बाद चीनी की कुल उपलब्धता 293 लाख टन रहने वाली है, जो वर्ष 2024-25 में 261.2 लाख टन की उपलब्धता से अधिक है। 50 लाख टन के शुरुआती स्टॉक को शामिल करते हुए कुल उपलब्धता 343 लाख टन होगी, जो घरेलू खपत 283 लाख टन से ज्यादा है। इस्मा ने निर्यात के लिए 7 लाख टन और क्लोजिंग स्टॉक 53 लाख टन रहने का अनुमान जताया है।
इस्मा का कहना है कि जैसे-जैसे चीनी सत्र आगे बढ़ रहा है, वैसे वैसे भंडार बढ़ रहे हैं और उद्योग न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में शीघ्र बढ़ोतरी की प्रतीक्षा कर रहा है। उत्पादन लागत में वृद्धि और एक्स-मिल प्राप्तियों (ex-mill realizations) में सुस्ती के कारण मिलों पर नकदी प्रवाह (कैश फ्लो) का दबाव बढ़ रहा है, जिससे गन्ना भुगतान बकाया में इजाफा हो रहा है। महाराष्ट्र में 15 फरवरी 2026 तक बकाया राशि ₹4,601 करोड़ रही, जबकि पिछले वर्ष इसी तारीख को यह ₹2,744 करोड़ थी। इस्मा ने कहा कि मौजूदा लागत ढांचे के अनुरूप एमएसपी में समय पर संशोधन मिलों की वित्तीय स्थिति को सुधारने, किसानों के भुगतान में तेजी लाने और बाजार स्थिरता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। यह कदम सरकार पर किसी अतिरिक्त राजकोषीय बोझ के बिना उठाया जा सकता है।