शेयर बाजार

US-Iran संकट से बाजार में घबराहट, निवेशक कहां करें निवेश? जानें किन सेक्टर पर रहेगा फोकस

ब्रोकरेज ने कहा कि इस स्थिति में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां, सिटी गैस कंपनियां, पेंट, एग्रो-केमिकल, बिल्डिंग मटेरियल और टायर सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है।

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जतिन भूटानी   
Last Updated- March 02, 2026 | 1:13 PM IST

US-Iran Conflict: भारतीय शेयर बाजार अभी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभाव से पूरी तरह उभरा ही नहीं था कि एक और संकट ने निवेशकों के बीच बड़ी चिंता पैदा कर दी है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से बाजार में घबराहट देखी जा रही है। ईरान के सबसे बड़े नेता आयतोल्ला अली खामेनेई और कई बड़े अधिकारियों को अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में मार दिया गया। हालात आगे भी बिगड़ सकते हैं।

संकट के बीच तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण निवेशकों की प्रतिक्रिया देखने को मिली। एयरलाइन, पेंट और टायर कंपनियों समेत तेल से जुड़े शेयरों में कारोबार के दौरान तेज गिरावट आई। शुरुआती कुछ मिनटों के कारोबार में ही निवेशकों को 6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान झेलना पड़ा है।

बाजार में इस स्थिति के बीच ब्रोकरेज फर्म एंटिक स्टॉक ब्रोकिंग का कहना है कि बाजार का ध्यान अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की चिंता से हटकर तेल की बढ़ती कीमतों पर जा सकता है। अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़ा संयुक्त सैन्य हमला किया है। हमारा अनुमान है कि ब्रेंट कच्चा तेल एक तिमाही तक औसतन 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल के बीच रह सकता है। यही हम मिडिल ईस्ट संघर्ष की संभावित अवधि मान रहे हैं। इससे महंगाई में 10 से 15 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ोतरी और आर्थिक ग्रोथ रेट में 5 से 8 बेसिस प्वाइंट तक कमी का खतरा हो सकता है।

ब्रोकरेज ने कहा कि ग्रोथ रेट में गिरावट और महंगाई में बढ़ोतरी बाजार गिरावट के दो बड़े कारण होते हैं। फिलहाल हाई ग्रोथ रेट और कम महंगाई के माहौल में अगर तेल 80-85 डॉलर प्रति बैरल पर एक तिमाही तक रहता है, तो इससे बाजार में बड़ी गिरावट की संभावना कम है। हालांकि, अगर तेल की ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो यह भारतीय शेयर बाजार के लिए बड़ा जोखिम हो सकता है।

US-Iran conflict किन सेक्टर पर फोकस?

ब्रोकरेज ने कहा कि इस स्थिति में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां, सिटी गैस कंपनियां, पेंट, एग्रो-केमिकल, बिल्डिंग मटेरियल और टायर सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है। वहीं, कच्चा तेल निकालने वाली कंपनियों को सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है।

ब्रोकरेज के अनुसार, तेल की ऊंची कीमतों के कारण निकट अवधि में जिन सेक्टरों की कमाई पर असर पड़ सकता है, उनमें ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (ओएमसी), सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर (सीजीडी), पेंट, एग्रो-केमिकल, बिल्डिंग मटेरियल और टायर सेक्टर शामिल हैं। वहीं, कच्चा तेल निकालने वाली अपस्ट्रीम तेल कंपनियों को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलने की संभावना है।

Industrials: एलएंडटी की कुल ऑर्डर बुक का करीब 50 प्रतिशत और राजस्व का 40 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है। अगर मौजूदा स्थिति कुछ समय तक जारी रहती है तो शॉर्ट टर्म में प्रोजेक्ट पूरे करने में दिक्कत आ सकती है। हालांकि लंबे समय में अगर क्षतिग्रस्त ढांचे का फिर से निर्माण होता है तो यह एलएंडटी के लिए सकारात्मक रहेगा। अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो इससे मिडिल ईस्ट में पूंजी खर्च कार्यक्रम को भी समर्थन मिल सकता है।

Building Material: टाइल कंपनियों पर अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर अप्रत्यक्ष रूप से पड़ सकता है। गैस की कीमत बढ़ने से शार्ट और मीडियम टर्म में मुनाफे पर दबाव आ सकता है। ऐसे में बिजली और ईंधन लागत में 5 प्रतिशत बढ़ोतरी से कजारिया का ईबीआईटीडीए वित्त वर्ष 26 और 27 में 7 प्रतिशत और 5 प्रतिशत तक प्रभावित हो सकता है। सोमानी के लिए यह असर क्रमशः 3 प्रतिशत और 9 प्रतिशत तक हो सकता है।

PVC Pipes: पीवीसी रेजिन की लागत कच्चे तेल और नैफ्था की कीमतों पर निर्भर करती है। नैफ्था एथिलीन और पीवीसी रेजिन का मुख्य कच्चा माल है। अगर कच्चे माल की कीमत 5 प्रतिशत बढ़ती है तो वित्त वर्ष 26 में ईबीआईटीडीए मार्जिन 4 प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक और वित्त वर्ष 27 में 17 प्रतिशत से 41 प्रतिशत तक घट सकता है। मार्जिन में वित्त वर्ष 26 में 60 से 150 बेसिस प्वाइंट और वित्त वर्ष 27 में 300 से 500 बेसिस प्वाइंट तक कमी आ सकती है।

ऐसे में यह संकेत टाइल और पीवीसी पाइप कंपनियों के लिए अप्रत्यक्ष जोखिम पैदा कर सकता है। टाइल कंपनियों के लिए गैस लागत बढ़ने से मार्जिन पर दबाव रहेगा, खासकर अगर कीमत बढ़ोतरी ग्राहकों तक समय पर नहीं पहुंचाई जा सके। पीवीसी कंपनियों के लिए कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से मुनाफे पर असर पड़ सकता है। हालांकि वित्त वर्ष 28 के अनुमान में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कजारिया, सोमानी, अपोलो पाइप्स, एस्ट्रल, फिनोलेक्स, प्रिंस पाइप्स और सुप्रीम इंडस्ट्रीज के शेयर पर इसका असर पड़ सकता है।

Agrochemicals and Fertilizers: भारत अमोनिया और सल्फर का बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आयात करता है। अगर तनाव बढ़ता है तो सप्लाई बाधित हो सकती है और लागत बढ़ सकती है। हर 10 प्रतिशत अमोनिया या सल्फर कीमत बढ़ने से प्रति टन ईबीआईटीडीए पर लगभग 1,500 रुपये का असर पड़ सकता है। हालांकि परादीप फॉस्फेट्स और कोरमंडल इंटरनेशनल जैसी कंपनियों के पास 25-30 दिन का कच्चे माल का स्टॉक है। इससे शार्ट टर्म में असर सीमित रह सकता है। सरकार अप्रैल में सब्सिडी दरों की समीक्षा कर सकती है, जिससे मार्जिन पर दबाव कम हो सकता है। मीडियम टर्म में फिलहाल कोई बड़ा असर नहीं दिखता।

BFSI (Banking and Financial Services): तेल की ऊंची कीमतों से सरकार की उधारी लागत बढ़ सकती है। इससे बॉन्ड यील्ड बढ़ेगी और सरकारी बैंकों को ट्रेजरी लाभ कम मिल सकता है।

Defence Stocks: भारत डायनेमिक्स और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कंपनियों की सप्लाई चेन इजरायल से जुड़ी है। अगर तनाव लंबा चलता है तो सप्लाई में दिक्कत आ सकती है। अपर इंडस्ट्रीज को बीमा और माल ढुलाई लागत बढ़ने से असर हो सकता है। कुल मिलाकर भावना के लिहाज से यह सेक्टर सकारात्मक माना जा रहा है।

Oil and Gas: अगर कच्चा तेल 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ता है तो अपस्ट्रीम कंपनियों जैसे ओएनजीसी और ऑयल इंडिया के ईबीआईटीडीए में 20 से 21 प्रतिशत और मुनाफे में 29 से 32 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के ईबीआईटीडीए में 51 से 73 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है और मुनाफे में 72 से 78 प्रतिशत तक कमी या नुकसान हो सकता है। सिटी गैस कंपनियों पर भी असर पड़ सकता है।

Transportation: अदाणी पोर्ट्स का इजरायल के हाइफा पोर्ट से कुल माल का 2.4 प्रतिशत आता है। कच्चे और तरल माल का हिस्सा 10.1 प्रतिशत है, जिस पर संघर्ष खत्म होने तक जोखिम बना रह सकता है।

Auto (Tyre Sector): टायर कंपनियों पर कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का अप्रत्यक्ष असर हो सकता है। सिंथेटिक रबर, कार्बन ब्लैक और अन्य कच्चे माल की कीमतें तेल से जुड़ी हैं। फिलहाल शार्ट टर्म में असर कम है क्योंकि कंपनियों के पास एडवांस कॉन्ट्रैक्ट हैं। मार्जिन पर दबाव वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही से दिख सकता है। मौजूदा गिरावट को मध्यम टर्म के निवेश के लिए अवसर माना जा सकता है।

IT Services: बड़ी आईटी कंपनियां आने वाले वर्षों में मिडिल ईस्ट से 5 प्रतिशत तक राजस्व का लक्ष्य रख रही हैं। अभी यह हिस्सा 5 प्रतिशत से कम है। मिड और स्मॉल कैप कंपनियों का हिस्सा भी 5 प्रतिशत से कम है। हालांकि न्यूजन सॉफ्टवेयर का करीब 30 प्रतिशत राजस्व मिडिल ईस्ट से आता है। एलटीआईमाइंडट्री और एलटीटीएस का हिस्सा लगभग 10 प्रतिशत है।

FMCG: अगर कच्चे तेल की कीमत 10 प्रतिशत बढ़ती है तो एशियन पेंट्स और कंसाई के ग्रॉस मार्जिन में 200 से 250 बेसिस प्वाइंट की कमी आ सकती है। कच्चा तेल और उससे जुड़े उत्पाद कुल कच्चे माल का 40 से 45 प्रतिशत हिस्सा हैं। इमामी के मार्जिन में 30 से 50 बेसिस प्वाइंट की कमी आ सकती है।

 

 

(डिस्क्लमेर: यहां सलाह ब्रोकरेज ने दी है। बाजार में निवेश जो​खिमों के अधीन है। निवेश संबंधी फैसला करने से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)

First Published : March 2, 2026 | 1:13 PM IST