Kerala Assured Pension Plan: केरल सरकार ने राज्य के कर्मचारियों के लिए पेंशन व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की घोषणा की है। अब सरकारी कर्मचारियों को बाजार आधारित नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS के अलावा एक गारंटीड पेंशन विकल्प भी मिलेगा। सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से अस्योर्ड पेंशन स्कीम यानी APS लागू करने का फैसला किया है।
इस नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद अंतिम मूल वेतन का अधिकतम 50 प्रतिशत तक निश्चित पेंशन देने का प्रावधान किया गया है। यह कदम राज्य के कर्मचारियों को सुरक्षित और स्थिर रिटायरमेंट आय देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
अस्योर्ड पेंशन स्कीम राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई नई पेंशन योजना है। यह योजना दो वर्गों के कर्मचारियों पर लागू होगी।
पहला, वे मौजूदा कर्मचारी जो अभी NPS के तहत कवर हैं। दूसरा, वे कर्मचारी जिनकी नियुक्ति 1 अप्रैल 2026 या उसके बाद होगी।
इस योजना के तहत यदि कोई कर्मचारी कम से कम 30 वर्ष की पात्र सेवा पूरी करता है, तो उसे रिटायरमेंट के समय प्राप्त अंतिम मूल वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलेगा। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को तय और सुनिश्चित आय उपलब्ध कराना है।
यह मॉडल केंद्र सरकार की यूनिफाइड पेंशन स्कीम की तर्ज पर तैयार किया गया है, जिसमें पुरानी परिभाषित लाभ वाली पेंशन व्यवस्था और अंशदायी प्रणाली के कुछ तत्वों को जोड़ा गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि APS को अनिवार्य नहीं बनाया गया है। यह पूरी तरह वैकल्पिक योजना होगी।
कर्मचारियों के पास दो विकल्प होंगे।
वे चाहें तो NPS में बने रह सकते हैं।
या फिर अस्योर्ड पेंशन स्कीम में शामिल हो सकते हैं।
जो कर्मचारी पहले से NPS में हैं, उन्हें भी तय नियमों के तहत APS में स्थानांतरित होने का अवसर दिया जाएगा।
पूरी 50 प्रतिशत पेंशन पाने के लिए कर्मचारी को कम से कम 30 वर्ष की पात्र सेवा पूरी करनी होगी।
यह शर्त केंद्र की यूनिफाइड पेंशन स्कीम से कुछ सख्त मानी जा रही है, क्योंकि वहां 25 वर्ष की सेवा पर समान लाभ का प्रावधान है। विभिन्न राज्यों में कर्मचारी संगठन लंबे समय से सेवा अवधि की शर्त को कम करने की मांग करते रहे हैं।
अस्योर्ड पेंशन स्कीम की एक अहम विशेषता यह है कि रिटायरमेंट के बाद पेंशन पर महंगाई राहत यानी डीआर मिलती रहेगी।
इसका मतलब है कि पेंशन राशि समय-समय पर महंगाई के अनुसार बढ़ाई जाएगी। यह व्यवस्था पुरानी पेंशन योजना की तरह है, जहां सरकार महंगाई दर के आधार पर पेंशन में बढ़ोतरी करती है।
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दोनों योजनाओं के बीच सबसे बड़ा फर्क स्थिरता और बाजार जोखिम का है।
NPS की विशेषताएं
कर्मचारी और सरकार दोनों अंशदान करते हैं।
राशि को शेयर और बॉन्ड बाजार में निवेश किया जाता है।
अंतिम पेंशन बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करती है।
कर लाभ और निवेश विकल्प की लचीलापन मिलता है।
APS की विशेषताएं
रिटायरमेंट के बाद तय पेंशन की गारंटी।
आय पहले से निर्धारित और सुरक्षित।
महंगाई राहत के माध्यम से पेंशन में समय-समय पर बढ़ोतरी।
सरल शब्दों में कहें तो NPS में रिटर्न अधिक भी हो सकता है और कम भी, जबकि APS में निश्चित आय का भरोसा मिलेगा।
पिछले कुछ वर्षों से विभिन्न राज्यों में अंशदायी पेंशन प्रणाली को लेकर बहस तेज हुई है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बाजार आधारित पेंशन में जोखिम अधिक है और रिटायरमेंट के बाद आय की निश्चितता नहीं रहती।
केंद्र सरकार ने अप्रैल 2025 से अपने कर्मचारियों के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम लागू की थी। हालांकि राज्यों को अपनी पेंशन नीति तय करने की स्वतंत्रता है। ऐसे में केरल की यह पहल देश की पेंशन व्यवस्था में एक और नया मॉडल जोड़ती है।