Gold Price Today: अमेरिका और इजराइल के ईरान पर संयुक्त हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। इसके बीच निवेशकों ने सुरक्षित ठिकाने की तलाश शुरू कर दी है और सोने की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 1 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 5,370 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच गई। यह पिछले एक महीने का सबसे ऊंचा स्तर है।
फरवरी में सोना लगातार सातवें महीने बढ़ा है। यह 1973 के बाद सबसे लंबा ऐसा दौर है जब सोना लगातार हर महीने चढ़ा है। केंद्रीय बैंक भी बड़ी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं। साथ ही बॉन्ड और मुद्रा बाजार से पैसा निकलकर सोने में आ रहा है, जिससे कीमतों को और सहारा मिला है।
हमलों के बाद ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की। इससे तेल ले जाने वाले समुद्री रास्तों में रुकावट की आशंका बढ़ गई है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखने को मिला है।
तनाव के माहौल के बीच ओपेक प्लस देशों ने अप्रैल से रोजाना 206,000 बैरल तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। यह बढ़ोतरी दिसंबर में किए गए 137,000 बैरल प्रतिदिन के इजाफे से करीब डेढ़ गुना ज्यादा है। हालांकि कई सदस्य देशों के पास अतिरिक्त उत्पादन की क्षमता ज्यादा नहीं है। अगर होरमुज के आसपास तनाव बना रहता है, तो खाड़ी देशों से तेल निर्यात पर असर पड़ सकता है।
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केडिया एडवाइजरी का कहना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव सोना और चांदी के लिए अच्छा संकेत है। युद्ध के बाद बॉन्ड की आमदनी दर और डॉलर सूचकांक में गिरावट आई है। शेयर बाजार में भी तेज गिरावट देखी गई है और बड़ी मुद्राएं कमजोर हुई हैं। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम से बचने के लिए सोना और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं।
कमोडिटी बाजार विशेषज्ञ अनुज गुप्ता का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जल्दी खत्म होने की संभावना कम है। ऐसे में सोना और चांदी में मौजूदा तेजी आने वाले महीनों में जारी रह सकती है।
उनका कहना है कि निवेशकों को लंबी अवधि के लिए गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनानी चाहिए। हालांकि शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि में रुख पॉजिटिव बना रह सकता है। उनका अनुमान है कि लंबी अवधि में सोना 5,500 से 5,600 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है, जबकि चांदी 100 से 110 डॉलर प्रति औंस के स्तर को छू सकती है। यह टारगेट दिवाली 2026 तक के लिए बताया गया है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय बाजार विशेषज्ञों की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।