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अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा तो तेल कीमतें 110 डॉलर तक जाने की आशंका, होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा जोखिम

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पश्चिमी एशिया में अमेरिकी सैन्य तैनाती शुरू होने के बाद से कच्चे तेल में लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि व्यापारियों ने भू-राजनीतिक जोखिम पर ध्यान दिया है

Last Updated- February 27, 2026 | 9:35 PM IST
crude oil

विश्लेषकों का कहना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतें सबसे खराब स्थिति में 110 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं, जो मौजूदा स्तर से लगभग 57 प्रतिशत अधिक है। दूसरी ओर, दोनों देशों के बीच समझौते और अतिरिक्त वैश्विक आपूर्ति/क्षमता के कारण उतार-चढ़ाव के बाद कीमतों की तेजी पर विराम लग सकता है।

पश्चिमी एशिया में अमेरिकी सैन्य तैनाती शुरू होने के बाद से कच्चे तेल में लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि व्यापारियों ने भू-राजनीतिक जोखिम पर ध्यान दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े विषम जोखिम को दर्शाता है।

इक्विरस सिक्योरिटीज के मौलिक पटेल और खुशबू बालानी ने हाल में एक नोट में लिखा, ‘अगर तनाव बढ़ने से होर्मुज स्ट्रेट को खतरा होता है तो प्रीमियम आनुपातिक होने के बजाय संरचनात्मक हो जाता है। थोड़े से व्यवधान के जोखिम से भी 20-40 डॉलर प्रति बैरल का प्रीमियम बढ़ सकता है, जिससे कीमतें 95-110 डॉलर से ऊपर की ओर भी जा सकती हैं, जो अकेले ईरान के तेल के प्रभाव से कहीं ज्यादा है।’राबोबैंक इंटरनैशनल के जो डेलौरा और फ्लोरेंस श्मिट के अनुसार भूराजनीतिक जोखिम ‘फेयर वैल्यू’ के मुकाबले ‘फियर प्रीमियम’ को बनाए हुए हैं।

फरवरी के पूरे महीने में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं क्योंकि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ आक्रामकता फिर बढ़ा दी है। शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतें 72 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर को छूने के बाद लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रही थीं। विश्लेषकों के अनुसार तेल बाजार फारस की खाड़ी से आपूर्ति के खतरे पर भी ध्यान दे रहा है। वैश्विक तरलीकृत प्राकृतिक गैस के लगभग 20 प्रतिशत के अलावा करीब 2 करोड़ बैरल कच्चे और रिफाइन उत्पाद रोजाना होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते हैं।

राबोबैंक इंटरनैशनल ने कहा कि मसला इसलिए भी बढ़ रहा है कि फारस की खाड़ी के उत्पादकों के पास सीमित पाइपलाइन क्षमता है जिससे वे जलडमरूमध्य को नजरअंदाज नहीं कर सकते। राबोबैंक इंटरनैशनल के डेलौरा और श्मिट का मानना ​​है कि होर्मुज स्ट्रेट बंदर अब्बास जैसे बड़े ईरानी पोर्ट के पास है। इसलिए ईरान के पास मौजूद छोटी नावों, तेजी से हमला करने वाले यानों और समुद्री माइंस से लैस तेज इनशोर अटैक के लिए बड़ी मात्रा है।

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First Published - February 27, 2026 | 9:27 PM IST

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