राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में निजी अंतिम खपत व्यय (पीएफसीई) बढ़कर 7.7 प्रतिशत रहने की संभावना है, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 5.8 प्रतिशत था। इससे खपत मांग पटरी पर लौटने के संकेत मिलते हैं।
वित्त वर्ष 2026 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के दूसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में नॉमिनल सकल घरेलू उत्पाद में पीएफसीई की हिस्सेदारी 20 आधार अंक बढ़कर 56.7 प्रतिशत रहने की संभावना है, जो वित्त वर्ष 2025 में 56.5 प्रतिशत था। इन आंकड़ों को संशोधित आधार वर्ष का इस्तेमाल किया गया है। इससे अर्थव्यवस्था में मांग का पता चलता है।
हालांकि नॉमिनल हिसाब से पीएफसीई वृद्धि वित्त वर्ष 2026 में सुस्त होकर 8.9 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जो वित्त वर्ष 2025 में 9.7 प्रतिशत थी। यह नया मैट्रिक्स है, जो संशोधित श्रृंखला में जोड़ी गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नई सीरीज के मुताबिक खपत का हिस्सा कम हुआ है, जबकि व्यय का हिस्सा बढ़ा है। बैंक ऑफ बड़ौदा में मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, ‘नई सीरीज पहले वाली की तुलना में थोड़ी अलग है। सकल नियत पूंजी सृजन की दर अधिक है और यह जीडीपी का 31.7 प्रतिशत है। वहीं की हिस्सेदारी कम होकर 56.7 प्रतिशत है।’
इसी तरह का विचार व्यक्त करते हुए बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज ने कहा है, ‘कुल मिलाकर आंकड़ों को देखें तो वास्तविक हिसाब से निवेश की हिस्सेदारी थोड़ी कम हुई है, जबकि निजी खपत में भी इसकी हिस्सेदारी भी थोड़ी कम हुई है।’
इसी तरह से सरकार का व्यय भी वित्त वर्ष 2026 में थोड़ा बढ़कर 6.6 प्रतिशत हो गया है, सरकार के अंतिम खपत व्यय (जीएफसीई) से इसका पता चलता है। यह इसके पहले वित्त वर्ष में 6.5 प्रतिशत था। नॉमिनल जीडीपी में जीएफसीई की हिस्सेदारी भी बढ़कर 10.8 प्रतिशत होने की संभावना है, जो वित्त वर्ष 2025 में जीडीपी का 10.7 प्रतिशत थी। आंकड़ों से यह भी पता चला है कि सकल नियतपूंजी सृजन (जीएफसीएफ) पिछले वित्त वर्ष के 6.4 प्रतिशत की तुलना में इस वित्त वर्ष में बढ़कर 7.1 प्रतिशत होने का अनुमान है। इससे अर्थव्यवस्था में बुनियादी ढांचे में होने वाले निवेश का पता चलता है।
नॉमिनल जीडीपी में हिस्से के तौर पर जीएफसीएफ मामूली बढ़कर 31.7 प्रतिशत रहने की संभावना है, जो इसके पहले के वित्त वर्ष में 31.6 प्रतिशत था।
डेलॉयट इंडिया में अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार ने कहा, ‘सकल नियत पूंजी सृजन 7.8 प्रतिशत बढ़ने से निवेश गतिविधियां मजबूत नजर आ रही हैं। सरकार का पूंजीगत व्यय मजबूत बना हुआ है, ऐसे में हम निजी निवेश में तेजी से शुरुआती संकेत भी देख रहे हैं। खपत 8.7 प्रतिशत होने से हम उम्मीद कर रहे हैं कि आगे चलकर निवेश पर व्यय बढ़ेगा।’
डीबीएस बैंक में कार्यकारी निदेशक और वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव ने कहा कि बचत और निवेश का अनुपात पहले के अनुमान की तुलना में अधिक है। इसके अलावा वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में खपत मांग में रिकवरी नजर आ सकती है, क्योंकि पीएफसीई बढ़कर 8.7 प्रतिशत हो जाएगा है, जो वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में घटकर 8 प्रतिशत था।
क्रिसिल लिमिटेड के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि अगले वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर मजबूत बनी रहेगी और इसे निजी खपत और निवेश का सहारा मिलेगा।’