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अमेरिका-इजरायल का ईरान पर हमला: क्या आसमान छुएगी तेल की कीमत और थम जाएगी दुनिया की रफ्तार?

ट्रंप के ईरान पर हमले के फैसले से ग्लोबल तेल सप्लाई संकट में है। होर्मुज का रास्ता बंद होने और रिफाइनरियों पर खतरे ने दुनिया भर में खौफ पैदा कर दिया है

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- February 28, 2026 | 6:52 PM IST

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमला करने का फैसला लिया है, जिससे दुनिया के तेल की सप्लाई पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। ईरान खुद रोजाना करीब 3.3 मिलियन बैरल तेल निकालता है, जो पूरी दुनिया के उत्पादन का 3 फीसदी है। ओपेक में ये चौथा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। लेकिन तेल की बात सिर्फ इतनी नहीं है, ईरान की जगह ऐसी है कि वो पूरी दुनिया के एनर्जी सप्लाई पर असर डाल सकता है।

न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के एक तरफ बैठा है, जो वो शिपिंग रास्ता है जहां से सऊदी अरब और इराक जैसे बड़े सप्लायरों का एक पांचवां हिस्सा तेल गुजरता है। अभी वीकेंड की वजह से तेल बाजार बंद हैं, और ईरान पर हमलों या उसके जवाबी हमलों में किसी एनर्जी सुविधा को नुकसान पहुंचा है या नहीं, इसकी कोई शुरुआती खबर नहीं आई। लेकिन जैसे-जैसे हालात सामने आएंगे, तेल से जुड़े इन पॉइंट्स पर नजर रखनी होगी।

ईरान का तेल उत्पादन और भंडार

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान का तेल उत्पादन पिछले कुछ सालों में बढ़ा है। 2020 में ये 2 मिलियन बैरल रोज से कम था, लेकिन अब 3.3 मिलियन तक पहुंच गया है, वो भी अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों के बावजूद। ईरान इन पाबंदियों को चकमा देने में माहिर हो गया है, और उसके 90 फीसदी तेल निर्यात चीन को जाता है।

देश के सबसे बड़े तेल भंडार खुजिस्तान प्रांत में हैं, जिसमें अहवाज, मारुन और वेस्ट करुन क्लस्टर अहम हैं। यहां से निकलने वाला तेल ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। रिफाइनिंग की बात करें तो अबादान रिफाइनरी सबसे पुरानी है, जो 1912 में बनी और रोज 5 लाख बैरल से ज्यादा प्रोसेस कर सकती है। इसके अलावा बंदर अब्बास और पर्सियन गल्फ स्टार रिफाइनरी क्रूड और कंडेंसेट को हैंडल करती हैं, जो ईरान में बहुत ज्यादा मिलता है। राजधानी तेहरान की अपनी रिफाइनरी भी है।

ईरान के तेल निर्यात का मुख्य केंद्र खार्ग आइलैंड है, जो उत्तरी पर्सियन गल्फ में है। यहां कई लोडिंग बर्थ, जेट्टी, मोरिंग पॉइंट और करोड़ों बैरल स्टोरेज की सुविधा है। हाल के सालों में यहां से रोज 2 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल एक्सपोर्ट हुआ है। ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने बताया कि शनिवार को इस आइलैंड पर धमाका हुआ, लेकिन ज्यादा डिटेल नहीं दी और तेल टर्मिनल का जिक्र भी नहीं किया।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, अमेरिका की पाबंदियां ईरान के तेल खरीदारों को रोकती हैं, लेकिन चीन के प्राइवेट रिफाइनर सस्ते दाम पर खरीदते रहते हैं। ईरान पुराने टैंकरों के फ्लीट पर निर्भर है, जो ज्यादातर ट्रांसपोंडर बंद करके चलते हैं ताकि ट्रैक न हों। इसी महीने खार्ग आइलैंड पर टैंकरों को तेजी से भरा जा रहा था, शायद हमले की आशंका में तेल पानी पर ले जाने और जहाजों को सुरक्षित करने के लिए। ये वैसा ही था जैसे जून में इजरायल और अमेरिका के हमलों से पहले किया गया। अगर खार्ग पर हमला होता है, तो ईरान की इकोनॉमी को बड़ा झटका लगेगा।

ईरान के मुख्य गैस फील्ड्स दक्षिणी पर्सियन गल्फ तट पर हैं, जिसमें असालुयेह और बंदर अब्बास अहम है। यहां गैस और कंडेंसेट को प्रोसेस, ट्रांसपोर्ट और शिप किया जाता है, जो बिजली, हीटिंग, पेट्रोकेमिकल्स और दूसरे इंडस्ट्रीज के लिए इस्तेमाल होता है। ये इलाका कंडेंसेट निर्यात का मुख्य पॉइंट भी है। जून की जंग में एक लोकल गैस प्लांट पर हमला हुआ था, जिससे ट्रेडर्स में घबराहट फैली, लेकिन एक्सपोर्ट सुविधाओं पर असर नहीं पड़ा तो तेल की कीमतों में लंबा उछाल नहीं आया।

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क्षेत्रीय खतरे और पड़ोसी देशों पर असर

ईरान के सुप्रीम लीडर ने 1 फरवरी को चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो क्षेत्रीय जंग छिड़ सकती है। तेहरान का दावा है कि वो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद कर सकता है। ये बहुत बड़ा कदम होगा, जो ईरान ने कभी नहीं उठाया, लेकिन ग्लोबल मार्केट्स के लिए ये बुरा सपना है।

होर्मुज पर्सियन गल्फ से निकलने वाले ज्यादातर क्रूड और रिफाइंड फ्यूल जैसे डीजल, जेट फ्यूल का चोकपॉइंट है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा LNG एक्सपोर्टर कतर भी इसी रास्ते पर निर्भर है। ओपेक के सदस्य सऊदी अरब और UAE कुछ शिपमेंट्स को पाइपलाइन से बायपास कर सकते हैं, लेकिन होर्मुज बंद होने से एक्सपोर्ट में भारी रुकावट आएगी और क्रूड की कीमतें आसमान छू लेंगी।

फरवरी में दूसरे गल्फ देशों से शिपमेंट्स बढ़ने के संकेत मिले। सऊदी अरब ने महीने के पहले 24 दिनों में औसत 7.3 मिलियन बैरल रोज शिप किए, जो करीब तीन साल का सबसे ज्यादा है। इराक, कुवैत और UAE से कुल फ्लो जनवरी के मुकाबले 6 लाख बैरल रोज बढ़ने वाला था, वोर्टेक्सा लिमिटेड के डेटा से।

पिछले में ईरान ने पड़ोसियों के एनर्जी एसेट्स पर जवाबी हमले किए हैं। 2019 में सऊदी अरब ने तेहरान को दोष दिया था, जब ड्रोन से उसके अबकैक ऑयल प्रोसेसिंग प्लांट पर हमला हुआ, जिससे दुनिया के 7 फीसदी क्रूड उत्पादन रुक गया।

कई एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ईरान होर्मुज को लंबे समय बंद नहीं रख सकता, इसलिए शिपिंग को परेशान करने जैसे छोटे कदम ज्यादा मुमकिन हैं। पिछले साल की जंग में ईरान के तट के पास करीब 1,000 जहाजों के GPS सिग्नल जैम हो गए थे, जिससे एक टैंकर टकरा गया। सी माइंस लगाना भी धमकी का हिस्सा रहा है।

लेकिन तेहरान को सोचना पड़ेगा कि पड़ोसी एनर्जी इंफ्रा पर हमले से चीन नाराज न हो जाए। चीन गल्फ क्रूड का सबसे बड़ा खरीदार है और यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में वीटो पावर से ईरान को वेस्टर्न पाबंदियों से बचाता रहा है।

बाजार का कैसा है हाल

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, जून की जंग में तेल की कीमतों में तीन साल से ज्यादा का सबसे बड़ा उछाल आया, जब लंदन में ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया। लेकिन जैसे ही साफ हुआ कि मुख्य ऑयल इंफ्रा को नुकसान नहीं पहुंचा, कीमतें जल्दी गिर गईं।

उसके बाद से ग्लोबल मार्केट्स में ओवरसप्लाई की चिंता छाई रही, और 2025 में लंदन क्रूड साल की शुरुआत से 18 फीसदी नीचे बंद हुआ।

फिर भी इस साल कीमतें 19 फीसदी ऊपर चढ़ी हैं, खासकर अमेरिका के ईरान पर हमलों की आशंका से। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के चीफ इमर्जिंग मार्केट इकोनॉमिस्ट जियाद दाउद के एनालिसिस से पता चलता है कि सप्लाई में 1 फीसदी कमी पर कीमतें करीब 4 फीसदी बढ़ जाती हैं।

First Published : February 28, 2026 | 6:52 PM IST