Narayana Murthy
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को लेकर दुनियाभर में नौकरियों पर संकट की आशंकाएं जताई जा रही हैं। हालांकि, इंफोसिस के संस्थापक N. R. Narayana Murthy ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि तकनीक का इतिहास बताता है कि बड़े बदलाव अंततः रोजगार के नए रास्ते खोलते हैं, न कि उन्हें खत्म करते हैं।
बेंगलुरु स्थित International Institute of Information Technology Bangalore में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि किसी भी नई तकनीक का प्रभाव व्यापक स्तर पर रोजगार घटाने के रूप में नहीं देखा गया है। उनके अनुसार, तकनीक काम करने के तरीके को बदलती है और नए कौशल की मांग पैदा करती है। इसलिए कर्मचारियों को बदलते दौर के अनुसार खुद को तैयार करना चाहिए।
उनका मानना है कि एआई से उत्पादकता में तेज वृद्धि होगी। इससे कंपनियां अधिक काम कम समय में कर सकेंगी, जिससे नए प्रोजेक्ट और नई भूमिकाएं सामने आएंगी।
नारायण मूर्ति ने बैंकिंग क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि जब कोर बैंकिंग सॉल्यूशंस लागू किए गए थे, तब भी व्यापक स्तर पर नौकरियाँ जाने की आशंका जताई गई थी। लेकिन वास्तविकता यह रही कि यूनाइटेड किंगडम और बाद में भारत में बैंकिंग सेवाओं का दायरा बढ़ा और रोजगार के अवसर भी बढ़े।
उनके अनुसार, तकनीक ने बैंकों की कार्यक्षमता सुधारी, ग्राहकों तक पहुंच आसान की और नई सेवाएं शुरू करने में मदद की। परिणामस्वरूप रोजगार घटने के बजाय बढ़ा।
सॉफ्टवेयर उद्योग के संदर्भ में उन्होंने कहा कि एआई के कारण कोडिंग का बड़ा हिस्सा स्वचालित हो सकता है। ऐसे में पेशेवरों की भूमिका केवल कोड लिखने तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में उनकी जिम्मेदारी समस्याओं को स्पष्ट रूप से समझने, आवश्यकताओं को सही ढंग से परिभाषित करने और समाधान की दिशा तय करने पर अधिक केंद्रित होगी।
उन्होंने जोर देकर कहा कि मानसिकता में बदलाव और लगातार सीखते रहने की आदत ही पेशेवरों को प्रासंगिक बनाए रखेगी।
नारायण मूर्ति ने आने वाले दशक में भारत के लिए कुछ प्रमुख रुझानों की ओर संकेत किया। उन्होंने कहा कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स यानी IoT, तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाएँ और कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने वाली तकनीकें देश की दिशा तय करेंगी।
उनके मुताबिक, भारत ने अभी तक IoT की पूरी क्षमता का उपयोग नहीं किया है। फिलहाल देश में अधिकतर संरचित और प्रशिक्षित किए जा सकने वाले एल्गोरिद्म का इस्तेमाल होता है, जो पारंपरिक मॉडल पर आधारित हैं। उन्नत सेल्फ लर्निंग सिस्टम जैसे डीप लर्निंग और न्यूरल नेटवर्क का व्यापक स्तर पर इस्तेमाल अभी सीमित है।
वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी शेयरों में उतार चढ़ाव के बीच उनका यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बड़े भाषा मॉडल आधारित एआई टूल्स के कारण पारंपरिक सॉफ्टवेयर सेवाओं के भविष्य को लेकर निवेशकों में चिंता देखी जा रही है।
नारायण मूर्ति का स्पष्ट संदेश है कि तकनीकी बदलाव को डर की नजर से नहीं, अवसर के रूप में देखना चाहिए। उनका मानना है कि सही कौशल और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ एआई भारत के लिए रोजगार और विकास दोनों के नए द्वार खोल सकता है।